रविशंकर सोनी, पन्ना/पवई। (Kalehi Devi Darshan) शारदीय नवरात्र के पहले दिन से ही पन्ना जिले के देवी मंदिरों में आस्था की लहर दौड़ पड़ी है। सोमवार सुबह से ही नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालु माता के दरबार में दर्शन करने पहुंच रहे हैं। प्राचीन माता कलेही देवी मंदिर के साथ ही कामला माता, मरही माता, खेर माता और चंडी देवी मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
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नवरात्र के नौ दिनों तक श्रद्धालुओं का आना-जाना लगातार जारी रहेगा। इनमें से खासतौर पर पंचमी और अष्टमी तिथि को मां कलेही मंदिर में होने वाली महाआरती का महत्व सबसे ज्यादा होता है। इन दिनों हजारों की संख्या में भक्त मंदिर पहुंचकर दर्शन करते हैं। अष्टमी पर मां कलेही का विशेष श्रृंगार होता है, जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र बनता है। (Kalehi Devi Darshan)
माता कलेही का स्वरूप और आस्था
मंदिर के पुजारी हरिकेष बडोलिया ने बताया कि माता कलेही देवी कालरात्रि का ही स्वरूप मानी जाती हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां दर्शन करने से उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यही वजह है कि भक्तजन सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति पाने के लिए नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाते हैं। (Kalehi Devi Darshan)
मंदिर परिसर में बाहर से आने वाले भक्तों के लिए धर्मशाला और टीन शेड की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो। (Kalehi Devi Darshan)
पहले पहाड़ी पर विराजमान थीं मां कलेही
कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले माता कलेही एक दुर्गम पहाड़ी पर विराजमान थीं। यह स्थान हनुमान भाटा सिद्ध स्थल के नाम से प्रसिद्ध था। उसी समय नगर के एक नगायच परिवार की महिला रोजाना उस ऊंची पहाड़ी पर पूजा करने जाती थी।
जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, महिला के लिए पहाड़ पर चढ़ना कठिन होने लगा। तब उन्होंने माता से प्रार्थना की कि अब हमसे चढ़ाई नहीं होती, कृपा कर आप नीचे चल आइए। भक्त की पुकार सुनकर माता नीचे आने के लिए तैयार हो गईं, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि पीछे मुड़कर मत देखना। (Kalehi Devi Darshan)
महिला माता के साथ चलने लगी, लेकिन जैसे ही उसने सोचा कि माता पीछे आ रही हैं या नहीं और मुड़कर देखा, देवी उसी स्थान पर रुक गईं। बाद में उसी जगह पर मंदिर का निर्माण हुआ और तब से यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
चैत्र नवरात्र में लगता है विशाल मेला
शारदीय नवरात्र के साथ-साथ चैत्र नवरात्र में भी यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। खासकर चैत्र नवरात्र की नवमी से लेकर 15 दिनों तक यहां विशाल मेला आयोजित होता है। (Kalehi Devi Darshan)
इस मेले में दूर-दराज से व्यापारी आते हैं और घर-गृहस्थी से जुड़े सामान, कपड़े, किराना, बर्तन, खिलौने और बच्चों के मनोरंजन के साधन लेकर पहुंचते हैं। यह मेला स्थानीय लोगों के लिए उत्सव जैसा माहौल बना देता है। (Kalehi Devi Darshan)
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भक्तिमय माहौल और जन-जन की आस्था
नवरात्र के दौरान माता कलेही मंदिर परिसर पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। सुबह से देर रात तक जय माता दी के जयकारे गूंजते रहते हैं। महिलाएं और युवा माता के भजन-कीर्तन में शामिल होकर माहौल को और भी श्रद्धामय बना देते हैं।
देश के अलग-अलग हिस्सों से भी भक्त यहां दर्शन करने आते हैं। मंदिर प्रबंधन समिति के अनुसार, इस वर्ष नवरात्र के दौरान भक्तों की संख्या और ज्यादा बढ़ने की संभावना है। (Kalehi Devi Darshan)
क्यों खास है मां कलेही मंदिर
- माता कलेही को कालरात्रि का स्वरूप माना जाता है।
- यहां दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होने का विश्वास है।
- नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाने की परंपरा है।
- चैत्र नवरात्र में 15 दिन का मेला लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
- यह स्थान आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का जीवंत प्रतीक है।
नवरात्र का पर्व सिर्फ पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि यह लोगों को एकजुट करने वाला उत्सव भी है। मां कलेही देवी मंदिर की आस्था हर साल नई ऊर्जा और भक्ति का संचार करती है। यही कारण है कि यहां आने वाले श्रद्धालु न केवल दर्शन करते हैं, बल्कि अपने जीवन में शांति और समृद्धि की कामना भी लेकर लौटते हैं। (Kalehi Devi Darshan)