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Chandrika Devi Temple सिद्धपीठ मां चंद्रिका देवी मंदिर: दर्शन से पूरी होती मनोकामना, आस्था और अध्यात्म का अद्भुत संगम UPNavratri25

Chandrika Devi Temple लखनऊ स्थित सिद्धपीठ मां चंद्रिका देवी मंदिर आस्था का बड़ा केंद्र है। मान्यता है कि मां के दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और नकारात्मकता दूर होती है। हर नवरात्र और अमावस्या पर यहां लाखों भक्त पहुंचते हैं। गोमती नदी किनारे बसे इस मंदिर का शांत वातावरण भक्तों को बार-बार आने को प्रेरित करता है।

On: September 21, 2025 7:10 PM
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Chandrika Devi Temple

लखनऊ के पास स्थित सिद्धपीठ मां चंद्रिका देवी मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल ही नहीं, Chandrika Devi Temple बल्कि आस्था और अध्यात्म का ऐसा केंद्र है, जहां श्रद्धालु बार-बार खिंचे चले आते हैं। मान्यता है कि मां के सच्चे मन से दर्शन करने पर हर मनोकामना पूरी होती है। यही वजह है कि सालभर यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। खासकर नवरात्र और अमावस्या पर यहां का नजारा बेहद खास होता है।

भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मां के दरबार में चुनरी बांधते हैं और जब मनोकामना पूरी हो जाती है तो प्रसाद और चुनरी चढ़ाकर मंदिर परिसर में घंटा बांधते हैं। मां के दरबार में अमीर-गरीब, अगड़ा-पिछड़ा सभी बराबर माने जाते हैं।

दर्शन मात्र से मिलता है दिव्य अनुभव

श्रद्धालुओं का कहना है कि मां चंद्रिका देवी के दर्शन मात्र से पिछले पापों का नाश होता है, नकारात्मकता दूर होती है और दिव्य सुरक्षा मिलती है। गोमती नदी के किनारे स्थित यह मंदिर शांति और आध्यात्मिक अनुभव का अद्भुत संगम है।

कई लोग यहां सर्वपितृ अमावस्या पर पितृ तर्पण भी करते हैं। उनका विश्वास है कि इस पवित्र स्थल पर पूजा करने से न सिर्फ मां चंद्रिका प्रसन्न होती हैं, बल्कि पूर्वजों की आत्मा को भी शांति मिलती है। नवरात्र के दौरान यहां दर्शन का महत्व और बढ़ जाता है, जिसे भक्त जीवन बदलने वाला अनुभव मानते हैं। Chandrika Devi Temple

अनूठी परंपराएं और पूजा का तरीका

इस मंदिर की एक खासियत यह है कि यहां पूजा-अर्चना अलग-अलग समाज के लोग करते हैं। मां चंद्रिका देवी की पूजा मालियों के समाज द्वारा और पछुआ देव (भैरवनाथ) की आराधना अनुसूचित जाति के लोग करते हैं। यह अनोखी परंपरा आपसी भाईचारे और समानता का संदेश देती है। Chandrika Devi Temple

मंदिर परिसर में यज्ञशाला, हवन कुंड, बर्बरीक द्वार, सुधंवा कुण्ड, महीसागर संगम तीर्थ घाट, हनुमान गढ़ी और खाटू श्याम मंदिर जैसे कई दर्शनीय स्थल हैं, जो श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देते हैं। Chandrika Devi Temple

भक्तों का उत्साह और मेले की रौनक

नवरात्र और अमावस्या के समय यहां लगने वाले मेले में लाखों की भीड़ उमड़ती है। सुबह मां का भव्य श्रृंगार होता है और फिर श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट खोल दिए जाते हैं। सुबह 6 बजे और शाम 8 बजे होने वाली भव्य आरती का नजारा भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देता है। Chandrika Devi Temple

मेला विकास समिति के सदस्य राजेश सिंह चौहान बताते हैं कि नवरात्र के दौरान भक्तों की संख्या इतनी ज्यादा हो जाती है कि मंदिर परिसर भक्तिमय माहौल से भर उठता है। Chandrika Devi Temple

सुरक्षा और व्यवस्था पर खास ध्यान

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारें बनाई जाती हैं। भीड़भाड़ के दौरान सुरक्षा के लिए स्वयंसेवकों के साथ-साथ महिला व पुरुष पुलिसकर्मी, जल पुलिस, यातायात पुलिस और पीएसी तैनात रहती है। पूरे परिसर पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। Chandrika Devi Temple

एसएचओ बीकेटी संजय सिंह बताते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रहती है ताकि किसी भी भक्त को दर्शन करने में परेशानी न हो। Chandrika Devi Temple

आध्यात्मिक पर्यटन का आकर्षण

तीन ओर से गोमती नदी से घिरा और जंगल के बीच बसा यह मंदिर सिर्फ धार्मिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि आध्यात्मिक पर्यटन के लिहाज से भी खास है। यहां की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण हर आगंतुक को अपनी ओर खींच लेता है।

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रात में जब मंदिर परिसर में दीप जलाए जाते हैं और दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है तो एक अलग ही आध्यात्मिक आभा फैल जाती है। यही वजह है कि यह मंदिर न सिर्फ लखनऊ, बल्कि पूरे देश से भक्तों को आकर्षित करता है। Chandrika Devi Temple

https://twitter.com/DainikHistory?t=un2EfdiIG8L5BD8EkPp2qg&s=08

सिद्धपीठ मां चंद्रिका देवी मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना का स्थान नहीं, बल्कि भक्तों की आस्था, भक्ति और आत्मिक शांति का केंद्र है। यहां आने वाला हर श्रद्धालु मां के चरणों में खुद को समर्पित कर दिव्य अनुभव पाता है। मां चंद्रिका देवी का यह धाम भक्तों को बार-बार आने की प्रेरणा देता है और उनकी जिंदगी में नई सकारात्मक ऊर्जा भर देता है। Chandrika Devi Temple

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अजय सिंह चौहान लखनऊ

अजय सिंह चौहान – एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार अजय सिंह चौहान लखनऊ (उत्तर प्रदेश) निवासी एक वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों से उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2009 में उन्होंने आगरा से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वे निरंतर पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे और उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लखनऊ जिले के संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। अपने 25 वर्षों के व्यापक अनुभव के दौरान अजय सिंह चौहान ने जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग, जनहित से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों को मजबूती से उठाया। उन्होंने पत्रकारिता को केवल एक पेशा न मानकर, समाज सेवा का सशक्त माध्यम माना और हमेशा निष्पक्ष, निर्भीक व जनपक्षधर लेखन को प्राथमिकता दी। वर्तमान में अजय सिंह चौहान मध्य प्रदेश के प्रमुख हिन्दी दैनिक स्वदेश के लखनऊ संस्करण में ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उनकी लेखन शैली, अनुभव और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें न केवल एक कुशल पत्रकार, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बना दिया है।

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