जितेंद्र साहू रायपुर , धमतरी जिले का नगरी नगर हर साल नवरात्रि और विजयदशमी महोत्सव (Vijaya Dashami Nagri) के जरिए कौमी एकता और भाईचारे की मिसाल पेश करता है। नव आनंद कला मंदिर नगरी के तत्वावधान में आयोजित होने वाला यह आयोजन इस साल अपने 74वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। यहां का माहौल ऐसा होता है कि न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि आसपास के गांवों से भी लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।
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समिति से जुड़े श्रीराम नव युवक परिषद नगरी के महासचिव नरेश छेदैहा बताते हैं कि यहां माता रानी का आकर्षक पंडाल सजाया जाता है, जिसे देखने के लिए लोगों में गजब का उत्साह रहता है। इस आयोजन की खासियत यह है कि इसे सभी जाति और धर्म के लोग मिलकर मनाते हैं। यही कारण है कि यह आयोजन नगरी की पहचान और कौमी एकता का प्रतीक बन चुका है।
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शोभा यात्रा का अद्भुत नजारा
इस महोत्सव का शुभारंभ माता रानी की भव्य शोभा यात्रा से होता है। नगर पंचायत नगरी से जनप्रतिनिधियों द्वारा पूजा-अर्चना के बाद यात्रा शुरू होती है। इसमें नई बस्ती सेवा दल और पुरानी बस्ती सेवा दल के भक्त मिलकर ढोल, मंजीरे और सुर-ताल के बीच जस गीत गाते हैं। महिलाएं कलश धारण कर शोभायात्रा में शामिल होती हैं, वहीं डीजे की धुन पर युवा उत्साह बढ़ाते हैं।
गांधी चौक और राजा बाड़ा जैसे प्रमुख स्थलों पर माता रानी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। नौ दिनों तक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन होता है। खास बात यह है कि नवरात्रि के दौरान नगरी में किसी वार्ड या मोहल्ले में अलग से सार्वजनिक आयोजन नहीं किया जाता, जिससे पूरा नगर एक ही छतरी के नीचे एकजुट होकर महोत्सव मनाता है। (Vijaya Dashami Nagri)
जसगीत और ज्योति कक्ष की परंपरा
हर दिन ढोल-मंजीरा की धुन और जसगीत की मधुर रचना माता रानी की महिमा का बखान करती है। साथ ही, आयोजन स्थल पर बने ज्योति कक्ष में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मनोकामना ज्योति प्रज्वलित करते हैं। समिति की 14 रामायण मंडलियां इस आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं। (Vijaya Dashami Nagri)
यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यहां के व्यापारी वर्ग, कर्मचारी वर्ग और पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सहयोग करता है। यही वजह है कि लोग साल भर इस महोत्सव का इंतजार करते हैं। (Vijaya Dashami Nagri)
74 साल पुरानी ‘बिनवा छेना’ की परंपरा
नगरी में नवरात्रि पूजा के दौरान एक अनोखी परंपरा आज भी निभाई जाती है। यहां आहुति के लिए बिनवा छेना का उपयोग होता है। इसे सरल भाषा में कहें तो खेत-खलिहान में पड़े गोबर जब प्राकृतिक रूप से सूख जाते हैं, तो उन्हें उठा लिया जाता है। यही ‘बिनवा छेना’ कहलाता है। इसे जलाकर दशांग धूप की आहुति दी जाती है। यह परंपरा 74 साल पुरानी है और आज भी उतनी ही श्रद्धा से निभाई जा रही है। (Vijaya Dashami Nagri)
विशेष हवन यज्ञ आकर्षण का केंद्र
नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन दोपहर 12 बजे गांधी चौक राजा बाड़ा में विशेष हवन यज्ञ आयोजित होता है। इसमें दुर्गा सप्तशती के 13 अध्यायों का पाठ, बीज मंत्रों का उच्चारण और नर्वाण मंत्रोपचार के साथ जंगल से लाई गई ताजी जड़ी-बूटियों की आहुति दी जाती है। (Vijaya Dashami Nagri)
विशाल हवन कुंड में संपन्न होने वाला यह यज्ञ श्रद्धालुओं के लिए अद्वितीय अनुभव होता है। माताएं, बहनें और पुरुष वर्ग मिलकर इस आयोजन में हिस्सा लेते हैं। यहां का वातावरण मंत्रोच्चार और जड़ी-बूटियों की सुगंध से आध्यात्मिक बन जाता है।
समिति की सक्रिय भूमिका
नव आनंद कला मंदिर नगरी समिति को इलाके में अनुकरणीय और आदर्श समिति माना जाता है। इस आयोजन की तैयारियों में समिति के अध्यक्ष मोरध्वज पटेल, सचिव दीपेश निषाद, सह-कोषाध्यक्ष मिश्री तातेड़, उपाध्यक्ष अशोक पटेल, सुरेश साहू, रविंद्र साहू समेत पूरी टीम दिन-रात जुटी रहती है। (Vijaya Dashami Nagri)
नगरी का नवरात्रि और विजयदशमी महोत्सव सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह कौमी एकता और भाईचारे का प्रतीक बन चुका है। 74 साल से लगातार चल रहा यह पर्व लोगों की आस्था, संस्कृति और परंपराओं को एक सूत्र में पिरोए हुए है। यही वजह है कि यह आयोजन पूरे इलाके के लिए प्रेरणास्रोत और गौरव का विषय बन गया है। (Vijaya Dashami Nagri)