रायसेन MP Police Action जिले के बाड़ी थाना क्षेत्र से सामने आए एक बड़े मामले ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। यहां 17 सितंबर 2025 की शाम करीब 5 बजे 5 वर्षीय बालक आदर्श धानक (उर्फ आदर) अचानक लापता हो गया। परिवार ने पुलिस को सूचना दी कि कोई अज्ञात शख्स बच्चे को बहला-फुसलाकर ले गया है।
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जैसे ही शिकायत दर्ज हुई, थाना बाड़ी पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। यह खबर इलाके में तेजी से फैली और पुलिस प्रशासन भी तुरंत एक्शन मोड में आ गया। MP Police Action
बच्चे के लापता होने से घर में मचा कोहराम
परिजनों के मुताबिक, छोटा आदर्श अपने भाई और मोहल्ले के बच्चों के साथ खेल रहा था। खेल खत्म कर वह घर की ओर लौटा, लेकिन कभी घर तक पहुंचा ही नहीं। बड़े भाई ने पहले यही सोचा कि वह घर आ गया होगा, लेकिन जब वहां नहीं मिला तो पूरे परिवार की चिंता बढ़ गई। आखिरकार परिजनों ने पुलिस की शरण ली। MP Police Action
पुलिस की ताबड़तोड़ कार्यवाही
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत हाईलेवल प्लानिंग बनाई। पुलिस महानिरीक्षक (IG) मिथिलेश कुमार शुक्ला, डीआईजी प्रशांत खरे और पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार पाण्डेय के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमलेश कुमार खरपुसे और एसडीओपी कुँवर सिंह मुकाती के नेतृत्व में 7 अलग-अलग टीमें गठित की गईं। MP Police Action
इन टीमों को अलग-अलग दिशा में रवाना किया गया। रातभर खेत, नदी, जंगल, तालाब और सुनसान जगहों पर सर्च ऑपरेशन चला। यहां तक कि आरोपी के रिश्तेदारों के घरों तक दबिश दी गई। MP Police Action
तकनीक और ह्यूमन इंटेलिजेंस का कमाल
पुलिस ने मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी। आसपास के इलाकों के सीसीटीवी फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साधनों के साथ-साथ ह्यूमन इंटेलिजेंस का भी सहारा लिया गया। लगातार दबिश और सर्च ऑपरेशन के चलते पुलिस को आखिरकार बड़ी सफलता मिली। MP Police Action
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15 घंटे में मासूम सकुशल बरामद
कड़ी मेहनत और त्वरित कार्रवाई के चलते पुलिस ने 18 सितंबर की सुबह ही मामले को सुलझा लिया। बम्होरी रोड से पुलिस ने अपहृत बालक को आरोपी के कब्जे से सुरक्षित छुड़ा लिया। बच्चा सकुशल परिजनों को सौंपा गया तो परिवार की आंखों में खुशी के आंसू छलक उठे। MP Police Action
आरोपी गिरफ्तार – निकला आदतन अपराधी
इस पूरे मामले में पुलिस ने जिस आरोपी को गिरफ्तार किया, उसका नाम है – सुनील उर्फ कमल फास्ट, पिता सुरेश वाल्मीकि, निवासी इमलिया, हाल उमरिया (थाना ओबेदुल्लागंज, जिला रायसेन)। MP Police Action
पुलिस की जांच में सामने आया कि आरोपी एक आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ पहले से कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड
| क्रमांक | थाना | अपराध क्रमांक एवं वर्ष | धारा |
|---|---|---|---|
| 1 | बरेली | 28/2016 | 429, 435 IPC |
| 2 | बरेली | 31/2016 | 25 Arms Act |
| 3 | सुल्तानपुर | 233/2017 | 25 A. A |
| 4 | ओबेदुल्लागंज | 30/2023 | 376, 506 IPC |
| 5 | मंडीदीप | 492/2015 | 25 Arms Act |
यह रिकॉर्ड साफ दर्शाता है कि आरोपी पहले भी कई बार अपराधों में शामिल रह चुका है।
घटना में प्रयुक्त वाहन भी जब्त
पुलिस ने आरोपी से घटना में प्रयुक्त स्कूटी को भी जब्त किया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि आखिर आरोपी ने बच्चे का अपहरण क्यों किया और उसके पीछे क्या मकसद था।
पुलिस टीम की सराहनीय भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में कई अधिकारियों और पुलिसकर्मियों ने अहम भूमिका निभाई। जिनमें प्रमुख नाम शामिल हैं –
- एसडीओपी बरेली – कुँवर सिंह मुकाती
- निरीक्षक राजेश तिवारी (थाना बाड़ी) व टीम
- निरीक्षक कपिल गुप्ता (थाना बरेली) व टीम
- निरीक्षक संतोष सिंह (थाना सुल्तानपुर) व टीम
- निरीक्षक जयवंत ककोडिया (थाना उदयपुरा) व टीम
- निरीक्षक महेश टांडेकर (थाना गोहरगंज) व टीम
- निरीक्षक संजीत पर्ते (रक्षित केंद्र रायसेन)
- उप निरीक्षक शैलेंद्र तोमर (थाना उमरावगंज) व टीम
- उप निरीक्षक जयदीप सिंह (थाना देवरी) व टीम
- उप निरीक्षक शैलेंद्र दायमा (चौकी प्रभारी सेंडोरा) व टीम
- उप निरीक्षक प्रीतम सिंह (थाना बहोरी) व टीम
- एएसआई चन्द्रशेखर यादव (थाना भारकच्छ) व टीम
- एएसआई सुरेन्द्र सिंह (साइबर रायसेन)
IG ने घोषित किया 30,000 का इनाम
इस त्वरित और सफल कार्रवाई को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक मिथिलेश कुमार शुक्ला ने आरोपी की गिरफ्तारी और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी पर ₹30,000 इनाम की घोषणा की।
नतीजा – पुलिस की फुर्ती ने बचाई मासूम की जान
यह घटना एक मिसाल है कि कैसे पुलिस ने समय पर और रणनीतिक तरीके से काम करते हुए महज़ 15 घंटे के भीतर एक नाबालिग की जान बचा ली। यह सिर्फ पुलिस की टीमवर्क नहीं बल्कि मानवीय संवेदनाओं का भी परिणाम है।
इलाके के लोग भी पुलिस की तेजी और तत्परता की सराहना कर रहे हैं। परिजनों के मुताबिक, अगर पुलिस ने इतनी तेजी से काम न किया होता तो शायद नतीजा कुछ और होता।
यह घटना साफ दर्शाती है कि जब पुलिस गंभीरता और तकनीक दोनों का इस्तेमाल करती है, तो अपराधियों के लिए बच निकलना लगभग नामुमकिन हो जाता है।