देवरी। RAISEN Ganesha Utsav धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं की जब भी बात होती है तो गांव-गांव में होने वाले गणेश उत्सव का ज़िक्र जरूर होता है। देवरी से करीब 10 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत रामपुर में गणेश उत्सव का आयोजन पिछले 47 सालों से लगातार किया जा रहा है। यहां हर साल गणेश जी की स्थापना पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ की जाती है। इस बार भी गणेश उत्सव को लेकर गांव में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।
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गांव की गणेश उत्सव समिति के अनुसार, शुरुआत में सिर्फ एक ही स्थान पर गणपति की स्थापना होती थी, लेकिन धीरे-धीरे समय के साथ अलग-अलग जगहों पर भी गणेश प्रतिमाएं रखी जाने लगीं। हर साल उत्सव के दौरान धार्मिक आयोजनों का भी सिलसिला जारी रहता है। इस बार समिति ने भागवत कथा का आयोजन करने का निर्णय लिया है, जिससे ग्रामीणों में काफी उत्साह है।RAISEN Ganesha Utsav
मिट्टी की प्रतिमा बनाने पर जोर
समिति के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का कहना है कि पहले के समय में गणेश जी की प्रतिमा केवल मिट्टी से बनाई जाती थी। तब गांव से देवरी तक पक्की सड़क भी नहीं थी, कच्चे रास्तों से बरसात के दिनों में गणपति लाने में काफी परेशानी होती थी। लेकिन कठिनाइयों के बावजूद ग्रामीणों का उत्साह कम नहीं हुआ।RAISEN Ganesha Utsav
वहीं आजकल मूर्तियां बनाने में केमिकल्स और प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) का इस्तेमाल बढ़ गया है। समिति ने स्पष्ट संदेश दिया है कि मिट्टी की प्रतिमाओं को ही अपनाया जाए, क्योंकि अधिकतर प्रतिमाएं नर्मदा नदी में विसर्जित की जाती हैं। केमिकल वाली मूर्तियों से नदी का पानी प्रदूषित होता है और जलजीवों को नुकसान पहुंचता है। समिति ने युवाओं और ग्रामीणों से अपील की है कि धार्मिक आयोजनों की मर्यादा बनाए रखते हुए पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों का ही उपयोग करें।https://dainikhistory.com/
धार्मिक आयोजनों में अनुशासन की जरूरत
गणेश समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि विसर्जन के समय कई बार देखा जाता है कि युवा नशे की प्रवृत्ति में शामिल होकर कार्यक्रमों को गलत दिशा में ले जाते हैं। लेकिन धार्मिक आयोजन हमारी परंपरा और संस्कृति से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें बड़े-बुजुर्गों के साथ सम्मानपूर्वक और अनुशासन से करना चाहिए।RAISEN Ganesha Utsav
बुजुर्गों की यादें और युवाओं की पहल
गांव के वरिष्ठ नागरिक रामकुमार दुबे, जो समिति के सचिव भी रह चुके हैं, ने बताया कि –
“हमारी समिति गांव की सबसे पहली समिति थी। जब हम छोटे थे तभी से गणेश जी की स्थापना करते आ रहे हैं। आज हम 65 साल से ज्यादा उम्र के हो गए हैं, लेकिन समिति का उत्साह आज भी बरकरार है। यह आयोजन पूरे गांव के लोगों के सहयोग से होता है।”RAISEN Ganesha Utsav
वहीं किशन लोधी ने कहा कि पहले गांव में सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन फिर भी गणेश उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता था। आज के युवाओं ने इसमें और भी नए कार्यक्रम जोड़ दिए हैं, लेकिन हम सभी उनसे यही अपील करते हैं कि धार्मिक उत्सव को अनुशासन और परंपरा के साथ मनाएं।
गांव के युवा सदस्य लोकेंद्र कुमार दुबे ने भी कहा –
“हमारे बुजुर्गों को देखकर ही हमने यह परंपरा सीखी है। वे कई सालों से पूरे गांव के साथ मिलकर गणेश जी की स्थापना करते रहे हैं। अब हम सभी मिलकर इस परंपरा को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य है कि यह उत्सव 50 साल पूरे करे और आगे भी जारी रहे।”RAISEN Ganesha Utsav
रामपुर गांव का यह गणेश उत्सव सिर्फ धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिकता की मिसाल भी है। 47 सालों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही उत्साहपूर्ण है। समिति और ग्रामीणों की सोच यही है कि परंपरा और पर्यावरण दोनों का संतुलन बनाए रखते हुए आने वाली पीढ़ियां भी इस उत्सव को आगे बढ़ाएं।RAISEN Ganesha Utsav