जितेंद्र साहू धमतरी। Suicide due to egg vegetable: तीज उपवास के कारण पत्नी ने अंडे की सब्जी बनाने से मना किया पति ने फांसी लगाकर दी जान त्योहार का समय खुशियों का होता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में तीज का त्योहार मातम में बदल गया। सिहावा थाना क्षेत्र के सांकरा गांव में एक पति-पत्नी के बीच अंडे की सब्जी को लेकर हुए मामूली विवाद ने एक परिवार की जिंदगी बदल दी। नाराज पति ने फांसी लगाकर अपनी जान दे दी, जिसके बाद पूरे गांव में मातम पसर गया है।
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A tragic incident took place on the day of Teej in Sankra village of Dhamtari district, Chhattisgarh. After his wife refused to cook egg curry due to the festival fast, a man got angry and hanged himself from a tree. The entire village is in mourning after the incident. Police have registered a case and started the investigation
कैसे हुआ पूरा मामला?
मामला धमतरी जिले के सिहावा थाना क्षेत्र के सांकरा गांव का है। गांव के बीचपारा में रहने वाले टिकू राम सेन (उम्र लगभग 40 वर्ष) बीती रात घर से कुछ ही दूरी पर स्थित आंवला के पेड़ पर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सुबह जब लोगों ने उनका शव पेड़ से लटकता देखा तो गांव में हड़कंप मच गया। परिजनों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
सूचना मिलते ही सिहावा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को नीचे उतारकर पंचनामा कार्रवाई की और फिर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच कर रही है।
त्योहार पर पत्नी ने अंडा बनाने से किया मना
पुलिस जांच में जो वजह सामने आई, उसने सभी को चौंका दिया। दरअसल, टिकू राम सेन बीते दिन बाजार से अंडा खरीदकर घर लाए थे और रात को अंडे की सब्जी बनाने की जिद कर रहे थे। इस पर उनकी पत्नी ने साफ मना कर दिया।
पत्नी ने कहा कि यह तीज का समय है और पूरे परिवार को करूं-भात (चावल-तरकारी) खाने के बाद अगले दिन उपवास करना है। त्योहार के कारण अंडा बनाना ठीक नहीं होगा। इस बात पर टिकू राम सेन नाराज हो गए और गुस्से में उन्होंने घर से बाहर जाकर आत्मघाती कदम उठाया।
अचानक खुशियों से मातम में बदला माहौल
तीज का त्योहार हर साल बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। गांव की महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करती हैं। इस बार भी सांकरा गांव की महिलाएं तीज की तैयारियों में जुटी थीं, लेकिन अंडा की सब्जी को लेकर हुई मामूली कहासुनी ने पूरे माहौल को मातम में बदल दिया।
Suicide due to egg vegetable
टिकू राम सेन के अचानक उठाए कदम से न सिर्फ उनका परिवार बल्कि पूरा गांव सदमे में है। लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतना बड़ा कदम सिर्फ एक छोटे से विवाद के कारण हो सकता है।https://www.facebook.com/profile.php?id=61579662817046&mibextid=ZbWKwL
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
घटना के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पत्नी बार-बार यह कहते हुए रो रही है कि उसने त्योहार की परंपरा निभाने के लिए अंडा बनाने से मना किया था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उसका पति ऐसा कदम उठा लेगा।https://dainikhistory.com/mp/three-deaths-while-saving-cow-three-killed-in-a-serious-injured-car-in-the-process-of-saving-the-cow/
गांव के लोगों का कहना है कि टिकू राम सीधा-सादा इंसान था। वह अक्सर छोटी-छोटी बातों पर भावुक हो जाता था, लेकिन किसी ने कभी नहीं सोचा था कि वह अपनी जिंदगी खत्म कर लेगा।
पुलिस की जांच जारी
सिहावा थाना पुलिस ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का है। परिजनों के बयान लिए जा रहे हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं इसके पीछे कोई और कारण तो नहीं है।
मानसिक स्वास्थ्य पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि गुस्से और तनाव में उठाया गया एक कदम जिंदगी को हमेशा के लिए खत्म कर सकता है। आजकल आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जिनमें अधिकतर कारण गुस्सा, अवसाद, या आपसी विवाद होते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हालात में परिवार को धैर्य रखना चाहिए और बातचीत के जरिए समस्याओं का हल निकालना चाहिए। किसी भी त्योहार या परंपरा से बड़ी इंसान की जान नहीं होती।
गांव में शोक का माहौल
सांकरा गांव में तीज की खुशियां पूरी तरह मातम में बदल चुकी हैं। जहां एक तरफ महिलाएं व्रत और पूजा की तैयारी कर रही थीं, वहीं दूसरी तरफ टिकू राम सेन का अंतिम संस्कार किया जा रहा था। गांव के लोग इस घटना को लेकर गहरा दुख व्यक्त कर रहे हैं।
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि “आज के समय में धैर्य और समझदारी की बहुत जरूरत है। छोटी-छोटी बातों को दिल पर लेना खतरनाक हो सकता है।”
धमतरी की यह घटना समाज को एक बड़ी सीख देती है। जीवन की समस्याएं और विवाद कभी इतने बड़े नहीं होते कि उनके लिए अपनी जान गंवाई जाए। परिवार और समाज को चाहिए कि वे ऐसे हालात में एक-दूसरे को संभालें और बातचीत के जरिए समस्या का समाधान करें।