छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां तैनात एक महिला आरक्षक ने बीजापुर जिले में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके पर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का कहना है कि दिलीप उइके ने कई सालों तक शादी का झांसा देकर न केवल उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए, बल्कि तीन बार जबरन गर्भपात भी कराया।
(A woman constable from Balod district has accused Bijapur deputy collector Dilip Uikey of raping her on the pretext of marriage and forcing her to undergo abortion thrice. The girl says that the accused not only had physical relations with her but also exploited her in matters of money and property. The police have seriously registered a case and started investigation.)
2017 में शुरू हुई पहचान
इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2017 में हुई थी, जब महिला आरक्षक और दिलीप उइके की पहचान डौंडी स्थित आईटीआई में हुई। शुरू में यह मुलाकात एक सामान्य जान-पहचान थी, लेकिन धीरे-धीरे बातचीत दोस्ती में और फिर दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई।
महिला का आरोप है कि इसी दौरान दिलीप उइके ने उससे शादी का वादा किया। भरोसा दिलाने के बाद पहली बार जब वह गर्भवती हुई तो आरोपी ने उसे दवा खिलाकर जबरन अबॉर्शन करा दिया।
पढ़ाई और खर्चों में भी लिया मदद
युवती ने आगे बताया कि नौकरी लगने के बाद भी उसने दिलीप उइके पर पूरा भरोसा किया और पढ़ाई, कोचिंग और खर्चों के नाम पर हर महीने उसे पैसे भेजे। यहां तक कि एक कार भी उसके नाम से खरीदी गई, जिसका लोन बाद में उसके ही खाते में ट्रांसफर करा दिया गया।
इससे साफ होता है कि रिश्ता केवल निजी नहीं रहा बल्कि आर्थिक लेन-देन का भी हिस्सा बन गया था।
अंडमान यात्रा के दौरान बने संबंध
महिला आरक्षक ने बताया कि दिसंबर 2024 में आरोपी ने उसे अंडमान यात्रा पर ले जाकर संबंध बनाए। इसी दौरान जनवरी 2025 में वह दोबारा गर्भवती हो गई।
युवती का कहना है कि गर्भवती होने की खबर मिलते ही आरोपी ने उसे अपने क्वार्टर में बुलाकर जबरन गर्भपात की दवा दी। इससे उसकी तबीयत बहुत बिगड़ गई थी, लेकिन आरोपी ने उसकी कोई परवाह नहीं की।
तीसरी बार भी कराया गर्भपात
मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि महिला तीसरी बार भी गर्भवती हुई। लेकिन इस बार भी दिलीप उइके ने समाज और बदनामी का हवाला देते हुए उसे दवा देकर गर्भपात कराया।
महिला का आरोप है कि इस दौरान आरोपी ने उससे लगभग 3.30 लाख रुपये भी लिए।
आखिरकार पहुंची पुलिस के पास
लंबे समय तक सहने और भरोसा टूटने के बाद महिला आरक्षक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। उसके बयान के आधार पर डौंडी थाना पुलिस ने बीएनएस (BNS) की धारा 69 के तहत मामला दर्ज किया है।
एएसपी मोनिका ठाकुर ने इस केस की पुष्टि करते हुए कहा कि मामला बेहद गंभीर है और पुलिस सभी तथ्यों की जांच कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि आरोपी से पूछताछ की जाएगी और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
वहीं, जब इस मामले में डिप्टी कलेक्टर दिलीप उइके से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सामाजिक और कानूनी पहलू
यह मामला केवल एक व्यक्तिगत विवाद भर नहीं है, बल्कि समाज और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए भी गहरी चिंता का विषय है। एक तरफ जहां महिला पुलिसकर्मी ने अपने ही भरोसेमंद साथी पर इतना गंभीर आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर आरोपी एक सरकारी अधिकारी है, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।
कानून की नजर में शादी का झांसा देकर बनाए गए संबंधों को ‘सहमति’ नहीं माना जाता। सुप्रीम कोर्ट कई बार यह साफ कर चुका है कि यदि कोई व्यक्ति शादी का वादा करके बार-बार संबंध बनाता है और बाद में शादी से इंकार करता है तो इसे दुष्कर्म की श्रेणी में रखा जाएगा।
महिला की आवाज और संवेदनशीलता
पीड़िता का कहना है कि उसके साथ केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक और आर्थिक शोषण भी हुआ है। लगातार गर्भपात के कारण उसकी सेहत पर भी गहरा असर पड़ा है।
ऐसे मामलों में पीड़ित महिलाओं को न केवल न्याय की आवश्यकता होती है बल्कि मानसिक और सामाजिक सहयोग की भी जरूरत होती है।
पुलिस की अगली कार्रवाई
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि आरोप किस हद तक सही हैं। यदि सबूत पुख्ता पाए गए तो आरोपी डिप्टी कलेक्टर के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।