भोपाल। राजधानी भोपाल में पुलिस और राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। “ऑपरेशन क्रिस्टल ब्रेक” के तहत शहर में छिपी 92 करोड़ रुपये की अवैध ड्रग फैक्ट्री का खुलासा हुआ। यह फैक्ट्री लंबे समय से सक्रिय थी, लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि भोपाल पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी।
विदेशी सरगना के इशारे पर चल रहा था नेटवर्क
जांच में सामने आया कि यह पूरा नेटवर्क किसी विदेशी ड्रग सरगना के इशारे पर चल रहा था। फैक्ट्री से तैयार होने वाली ड्रग्स की सप्लाई सिर्फ भोपाल या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था। एजेंसियों को शक है कि इसके तार एशिया और यूरोप तक जुड़े हुए हैं।
DRI की बड़ी कार्रवाई, 7 आरोपी गिरफ्तार
DRI अधिकारियों ने इस कार्रवाई के दौरान सात लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर मेफेड्रोन (MD ड्रग्स) के निर्माण का आरोप है। जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि इस धंधे को चलाने के लिए हवाला के जरिए सूरत और मुंबई से भोपाल तक करोड़ों रुपये भेजे जा रहे थे। हवाला नेटवर्क से जुड़े एक आरोपी को भी सूरत से गिरफ्तार किया गया।
हाई-टेक फैक्ट्री से करोड़ों का माल बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस और एजेंसियों ने फैक्ट्री से बड़ी मात्रा में केमिकल, ड्रग्स बनाने की मशीनें और तैयार माल जब्त किया है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक बरामद माल की कीमत 92 करोड़ रुपये से ज्यादा आंकी गई है। फैक्ट्री अत्याधुनिक तकनीक से लैस थी और इसे इतनी गोपनीयता से चलाया जा रहा था कि आसपास के लोगों को भी इसकी असली गतिविधियों का अंदाजा नहीं था।
नेटवर्क कई राज्यों तक फैला
जांच में खुलासा हुआ कि भोपाल से बनने वाली ड्रग्स की सप्लाई मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों तक की जा रही थी। यही नहीं, इसके जरिए देशभर में एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया था। अब सुरक्षा एजेंसियां इस मामले में विदेशी लिंक और फंडिंग की भी पड़ताल कर रही हैं।
भोपाल पुलिस को भनक तक नहीं लगी
इस मामले का सबसे बड़ा पहलू यही है कि राजधानी में इतने बड़े स्तर पर फैक्ट्री चल रही थी, लेकिन स्थानीय पुलिस पूरी तरह अनजान रही। सूत्रों के मुताबिक फैक्ट्री को बेहद गुप्त तरीके से चलाया जा रहा था। बाहर से देखने पर यह जगह सामान्य लगती थी, जिससे किसी को शक भी नहीं हुआ।
आगे और छापेमारी की संभावना
DRI और सुरक्षा एजेंसियों ने भोपाल के अलावा इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में भी छापेमारी की संभावना जताई है। अब इस नेटवर्क से जुड़े बाकी लोगों को पकड़ने और इसकी फंडिंग के स्रोतों का पता लगाने की कोशिश जारी है।
क्यों है यह मामला बड़ा?
यह अब तक की भोपाल की सबसे बड़ी ड्रग फैक्ट्री का खुलासा है।
इसमें विदेशी नेटवर्क की भूमिका साफ हुई है।
फैक्ट्री में इस्तेमाल तकनीक और गुप्त ऑपरेशन बताता है कि यह एक संगठित गिरोह था।
92 करोड़ का ड्रग्स बरामद होना दिखाता है कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था।