जिले के महलपुर पाठा गांव में स्थित भगवान श्रीकृष्ण का प्राचीन मंदिर अब भव्य स्वरूप लेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जन्माष्टमी के अवसर पर इस मंदिर को नया और भव्य रूप देने की घोषणा की थी। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अगले ही दिन जिला प्रशासन ने कार्यवाही भी शुरू कर दी। ( Raisen: A grand Sri Krishna temple will be built in Mahalpur Patha, the administration started action on the announcement of the CM )
कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा के निर्देश पर रविवार को लोक निर्माण विभाग (भवन) के कार्यपालन यंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम महलपुर पाठा पहुंची। यहां अधिकारियों ने मंदिर और आसपास के क्षेत्र का निरीक्षण किया और मंदिर को भव्य बनाने के लिए प्रथम स्तरीय प्राक्कलन (प्रोजेक्ट प्लान) तैयार किया।
अधिकारियों ने इस दौरान मंदिर के पुजारी और ग्राम के वरिष्ठ नागरिकों से भी चर्चा की और उनकी राय जानी, ताकि मंदिर निर्माण की रूपरेखा स्थानीय परंपराओं और आस्था से जुड़ी हो।
मुख्यमंत्री की घोषणा से गांव में उत्साह
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हाल ही में महलपुर पाठा पहुंचे थे, जहां उन्होंने “श्रीकृष्ण पर्व – हलधर महोत्सव एवं लीला पुरुषोत्तम का प्रकटोत्सव” में हिस्सा लिया। इसी दौरान उन्होंने प्राचीन मंदिर को भव्य स्वरूप देने की घोषणा की थी।
ग्रामीणों का कहना है कि यह मंदिर उनकी आस्था का केंद्र है और मुख्यमंत्री की इस घोषणा से गांव और पूरे जिले में खुशी का माहौल है।
13वीं शताब्दी का ऐतिहासिक मंदिर
महलपुर पाठा का यह मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं है, बल्कि 13वीं शताब्दी में बना एक अनोखा धार्मिक स्थल है। यहां राधा-कृष्ण और देवी रुक्मणि की मूर्तियां एक ही श्वेत पत्थर पर उकेरी गई हैं, जो इसे विशेष बनाती हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, मंदिर परिसर में मौजूद शिलालेख यह बताता है कि मंदिर का निर्माण संवत 1354 (1297 ईस्वी) में किया गया था। यही नहीं, मंदिर के पास एक प्राचीन किला भी स्थित है, जहां कभी परमार वंश के शासकों का शासन रहा।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
यह मंदिर सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी खास है। हर साल मकर संक्रांति पर यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें आसपास के गांवों और जिलों से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में विष्णु यज्ञ का आयोजन भी परंपरागत रूप से किया जाता है।
मंदिर के पास बने प्राचीन किले में 51 बावड़ियां (कुंए) मौजूद हैं, जो प्राचीन स्थापत्य कला का उदाहरण पेश करते हैं। पास के जंगल से जैन परंपरा के भगवान आदिनाथ की प्रतिमा भी मिली थी, जिसे बाद में देवनगर में स्थापित किया गया।
इसके अलावा मंदिर के आसपास शिवलिंग, नंदी, गणेश, नाग देवता और नटराज की मूर्तियां भी मौजूद हैं, जो इस स्थल को बहुधार्मिक और ऐतिहासिक महत्व प्रदान करती हैं।
भव्य स्वरूप से बढ़ेगा पर्यटन
स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर को भव्य रूप मिलने से यहां श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी होगी। साथ ही यह स्थान पर्यटन के नक्शे पर भी और प्रमुखता से उभरेगा। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई है कि मंदिर के विकास से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति भी बेहतर होगी, क्योंकि यहां आने वाले श्रद्धालु और पर्यटक स्थानीय व्यवसायों को भी बढ़ावा देंगे।
प्रशासन की त्वरित कार्यवाही कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने स्पष्ट किया है कि मुख्यमंत्री की घोषणा को प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा। प्रथम स्तरीय प्राक्कलन तैयार होने के बाद जल्द ही मंदिर के भव्य स्वरूप का काम शुरू कर दिया जाएगा।