जितेंद्र साहू धमतरी, 8 अगस्त 2025। Naming of school in Dhamtari became a controversy, villagers locked it छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्कूलों की तालाबंदी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। कभी शिक्षकों की कमी तो कभी उनके तबादले या नियुक्ति को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी रहती है, लेकिन इस बार मामला कुछ अलग है। नगरी विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय फरसियां में स्कूल को लेकर तालाबंदी हुई है, लेकिन इस बार इसकी वजह शिक्षक नहीं, बल्कि स्कूल का नामकरण है।
दान की जमीन, पर नहीं मिला सम्मान!
फरसियां गांव में वर्ष 2016 में एक नवीन हायर सेकेंडरी स्कूल का निर्माण हुआ था, लेकिन उस समय स्कूल भवन के लिए सरकार के पास भूमि नहीं थी। ऐसे में गांव के दो भाई – कोमल कश्यप और सुभाष कश्यप ने अपने परिवार की करीब 1.10 एकड़ पुश्तैनी जमीन स्कूल के लिए दान कर दी थी। इनकी सिर्फ एक ही शर्त थी – स्कूल का नाम उनके पूर्वज स्व. इतवारी राम चिंडा के नाम पर रखा जाए।
परिवार को उम्मीद थी कि सरकार और शिक्षा विभाग उनकी भावना का सम्मान करेगा और उनके पूर्वज के नाम को अमर करने का मौका देगा, लेकिन 8 साल बीतने के बाद भी स्कूल का नाम परिवर्तन नहीं किया गया। इस उपेक्षा से नाराज़ होकर अब दानदाता परिवार, शाला प्रबंधन समिति और स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर दी है।
ग्रामीणों का साफ संदेश – नाम बदलो, नहीं तो ताला नहीं खुलेगा
ग्रामीणों का कहना है कि जब परिवार ने बिना किसी लाभ के स्कूल के लिए ज़मीन दी थी, तो अब उनके पूर्वज का नाम स्कूल से जोड़ने में क्या दिक्कत है? उन्होंने प्रशासन से कई बार निवेदन किया, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारी पालक, छात्र और ग्रामीण एक ही बात पर अड़े हैं – जब तक स्कूल का नाम स्व. इतवारी राम चिंडा के नाम पर नहीं रखा जाएगा, स्कूल नहीं खुलेगा।
प्रशासन नदारद, अब तक नहीं पहुंचे अधिकारी
खबर लिखे जाने तक शिक्षा विभाग का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मौके पर नहीं पहुंचा था। इससे प्रदर्शनकारियों में और भी ज्यादा नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि अगर प्रशासन इस मुद्दे पर जल्द कार्रवाई नहीं करता तो विरोध और भी उग्र हो सकता है।
सवाल शिक्षा व्यवस्था पर भी उठे
इस घटना ने एक बार फिर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर समय पर दानदाताओं की मांग पूरी कर दी जाती, तो यह नौबत ही नहीं आती। ऐसे मामलों से शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का विश्वास कमजोर होता है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर समाधान निकाले।