‘Killed I didn’t give 12 thousand rupees!’ रायसेन जिले की गौहरगंज उप-जेल से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जेल में बंद 22 वर्षीय कैदी तिलक सिंह शाक्य की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। तिलक का शव जेल की किचन में उसके लोअर से बने फांसी के फंदे पर लटका मिला। इस घटना ने जेल के अंदर की सुरक्षा और कैदियों की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। (Suspicious death of prisoner in Gauharganj jail)
क्या हुआ उस रात?
जानकारी के मुताबिक, तिलक सिंह शाक्य, जो बलात्कार और पॉक्सो एक्ट के तहत पिछले आठ महीने से जेल में सजा काट रहा था, शुक्रवार रात को जेल की किचन में फांसी पर लटका पाया गया। जैसे ही जेल प्रशासन को इसकी खबर मिली, आनन-फानन में तिलक को औबेदुल्लागंज अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
परिजनों के गंभीर आरोप: “यह आत्महत्या नहीं, हत्या है!” (Serious allegations by family: “This is not suicide, it is murder!”)
तिलक की मौत की खबर सुनते ही उसके परिजन अस्पताल पहुंचे और वहां का माहौल गमगीन हो गया। रोते-बिलखते परिजनों ने जेल प्रशासन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि हत्या है। परिजनों ने बताया कि तिलक ने हाल ही में मुलाकात के दौरान उन्हें बताया था कि जेल के अंदर उससे 12,000 रुपये की बड़ी रकम मांगी जा रही थी। पैसे न देने पर उसके साथ मारपीट भी की जाती थी। परिजनों का आरोप है कि तिलक को पैसे न देने के कारण ही मार दिया गया और फिर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई।
जेलर ने आरोपों को बताया निराधार
हालांकि, गौहरगंज उप-जेल के जेलर यशवंत शिल्पकार ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को निराधार बताया है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस घटना ने गौहरगंज जेल प्रशासन के सुरक्षा दावों की पोल खोल दी है। जेल जैसी सुरक्षित जगह पर एक कैदी का फांसी लगा लेना, और वह भी किचन जैसी जगह पर, जेल प्रशासन की घोर लापरवाही को उजागर करता है। सवाल उठता है कि इतनी कड़ी सुरक्षा के बावजूद कैदी तक लोअर कैसे पहुंचा और उसने फांसी कैसे लगाई? क्या जेल के अंदर कैदियों की नियमित रूप से तलाशी नहीं होती? या फिर यह जानबूझकर की गई अनदेखी का मामला है?
न्यायिक जांच की मांग
एसडीओपी शीला सुराणा ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि घटना की मजिस्ट्रियल जांच की जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि कैदी ने फांसी क्यों लगाई। परिजनों ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार लगाई है।
फिलहाल, इस मामले की गहराई से जांच होना बाकी है। तिलक सिंह शाक्य की मौत एक रहस्य बनकर रह गई है, जिसे सुलझाना पुलिस और न्यायिक अधिकारियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। उम्मीद है कि जांच में सच सामने आएगा और गुनहगारों को सजा मिलेगी।