Fraud: Bank employee जगदलपुर (बस्तर)। बस्तर जिले की पुलिस ने एक बड़े वित्तीय धोखाधड़ी का खुलासा करते हुए 24 घंटे के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है, जहां एक बैंक कर्मचारी ने ट्रैक्टर लोन लेने वाले ग्राहकों से उनकी किस्त की रकम लेकर बैंक में जमा न कर अपने निजी खर्चों में उड़ा दिए। आरोपी के खिलाफ 31 ग्राहकों से कुल 27 लाख 43 हजार 955 रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
कैसे सामने आया मामला?
इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब पोंचि बचरा गांव निवासी भीमधर मौर्य नाम के एक किसान ने ट्रैक्टर लोन चुकाने के बाद इंडसइंड बैंक से एनओसी (ऋण मुक्ति प्रमाणपत्र) लेने गया। लेकिन बैंक मैनेजर ने उसे बताया कि उसका लोन अब तक जमा नहीं हुआ है। यह सुनकर वह हैरान रह गया, क्योंकि उसने तीन बार में कुल 5.75 लाख रुपये की रकम बैंक कर्मचारी को जमा करने के लिए दी थी और उसे बाकायदा रसीद भी दी गई थी।
जब रसीद बैंक मैनेजर को दिखाई गई, तो उन्होंने साफ तौर पर कहा कि ये रसीदें फर्जी हैं और रकम बैंक में कभी जमा ही नहीं हुई। इसके बाद भीमधर मौर्य ने इसकी शिकायत सिटी कोतवाली थाना जगदलपुर में दर्ज कराई।
आरोपी की पहचान और ठिकाना
पुलिस की जांच में पता चला कि इस धोखाधड़ी को अंजाम देने वाला कोई और नहीं बल्कि बैंक का कर्मचारी अमन कुमार साव है। उसकी उम्र 33 वर्ष है और वह जगदलपुर के बोधघाट थाना क्षेत्र के पं. दीनदयाल उपाध्याय वार्ड राउत पारा का निवासी है। वर्तमान में वह हिकमीपारा, हिंगलाजिन मंदिर के पास रहता था और वहीं से काम कर रहा था।
कैसे करता था ठगी?
अमन कुमार साव का तरीका बेहद शातिराना था। जब भी कोई ग्राहक ट्रैक्टर लोन की किस्त जमा करने आता, तो वह खुद को बैंक का भरोसेमंद कर्मचारी बताकर उनके पैसे ले लेता और बदले में कंप्यूटर से फर्जी रसीद बना कर दे देता। लेकिन वह रकम बैंक में जमा करने की बजाय खुद के खर्चों में इस्तेमाल करता रहा।
जांच में सामने आया है कि उसने ऐसे ही 31 ग्राहकों से अलग-अलग किस्तों के नाम पर कुल 27,43,955 रुपये की धोखाधड़ी की। आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया कि उसने ये सारा पैसा खाने-पीने, घर के खर्च और अपनी व्यक्तिगत जरूरतों में खर्च कर दिया है।
पुलिस की तेज़ कार्रवाई
पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें अति. पुलिस अधीक्षक महेश्वर नाग, नगर पुलिस अधीक्षक अमित देवांगन और थाना प्रभारी भोला सिंह राजपूत के निर्देश पर कार्रवाई शुरू की गई।
कोतवाली पुलिस ने जब आरोपी की तलाश शुरू की, तो उसका ठिकाना बिलासपुर में मिला। बिना वक्त गंवाए पुलिस टीम वहां पहुंची और उसे हिरासत में लेकर जगदलपुर लाया गया। पूछताछ में उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया।
क्या-क्या जब्त हुआ?
पुलिस ने आरोपी के पास से एक सैमसंग कंपनी का मोबाइल फोन (मॉडल A13) जब्त किया है। यह वही मोबाइल था जिससे वह ग्राहकों के साथ संपर्क करता था और रसीदें भेजता था। फिलहाल आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
मामले में दर्ज हुई कानूनी धाराएं
इस मामले में आरोपी अमन कुमार साव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे फ्रॉड में आरोपी अकेला शामिल था या फिर इसमें किसी अन्य बैंक कर्मचारी की भी मिलीभगत थी। मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच की जा रही है ताकि कोई भी दोषी बच न सके।
पुलिस की सतर्कता और कड़ी निगरानी
इस पूरे ऑपरेशन में कोतवाली थाना की टीम ने चुस्ती और सतर्कता के साथ काम किया। 24 घंटे के भीतर आरोपी को पकड़ना और उसे न्यायिक प्रक्रिया में लाना, पुलिस की तत्परता को दर्शाता है। टीम में मुख्य रूप से शामिल रहे:
निरीक्षक: भोला सिंह राजपूत
सहायक उपनिरीक्षक: प्रमोद सिन्हा
प्रधान आरक्षक: विनोद चांदने, राजेश राजपूत
आरक्षक: रंगलाल खरे
बैंकिंग सिस्टम पर भी सवाल
इस घटना ने एक बार फिर बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह उठता है कि इतने लंबे समय तक आरोपी कैसे ग्राहकों से पैसे लेकर फर्जी रसीद बनाकर बैंक के नाम पर ठगी करता रहा और किसी को भनक तक नहीं लगी?
बैंक प्रबंधन को भी इस पूरे मामले में जवाबदेह ठहराया जा सकता है कि जब लाखों की रकम की हेराफेरी हो रही थी, तब आंतरिक ऑडिट या जांच में यह पकड़ में क्यों नहीं आया?
जनता को सतर्क रहने की अपील
बस्तर पुलिस ने इस घटना के बाद आम नागरिकों से अपील की है कि वे कोई भी राशि जमा करते समय बैंक की आधिकारिक रसीद जरूर लें और हमेशा बैंक की मूल शाखा में ही जाकर लेनदेन करें। किसी व्यक्ति विशेष को नकद देने से पहले उसकी पहचान और अधिकृत स्थिति की जांच जरूर करें।