देवरी श्रावण मास की भक्ति और श्रद्धा से जुड़ा एक बेहद खूबसूरत दृश्य देवरी क्षेत्र के ग्राम रम्पुरा से सामने आया है, जहां 14 श्रद्धालुओं का जत्था मां नर्मदा का पावन जल लेकर बांदकपुर के लिए पैदल यात्रा पर रवाना हुआ है। कंधों पर कांवड़ उठाए ये भक्त लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय कर भगवान शिव के प्रसिद्ध धाम बांदकपुर पहुंचेंगे और मां नर्मदा के जल से महादेव का अभिषेक करेंगे।
हर साल होता है यह धार्मिक आयोजन
श्रावण मास के पवित्र महीने में पिछले 5 वर्षों से यह परंपरा ग्राम रम्पुरा में निभाई जा रही है। यह यात्रा लोकेंद्र कुमार दुबे के मार्गदर्शन में होती है, जिसमें गांव के कई श्रद्धालु भक्तिभाव से शामिल होते हैं। हर साल की तरह इस बार भी भक्तों का यह समूह बरमान घाट से नर्मदा जल भरकर निकला है और अगले चार-पांच दिनों में बांदकपुर पहुंचने का लक्ष्य है।
श्रद्धा, सेवा और सामूहिक आस्था की मिसाल
इस यात्रा में शामिल लोग कोई प्रशिक्षित तीर्थयात्री नहीं हैं, बल्कि गांव के आम लोग हैं – किसान, मजदूर, छात्र और दुकानदार। लेकिन उनके अंदर श्रद्धा, समर्पण और शिव भक्ति की भावना इतनी गहरी है कि वे कठिन रास्तों और थकावट की परवाह किए बिना हर साल यह यात्रा पूरी श्रद्धा से करते हैं।
यात्रा के दौरान श्रद्धालु हर-हर महादेव, बोल बम, और जय नर्मदे के जयकारों के साथ आगे बढ़ते हैं। रास्ते में भक्तों के रुकने और खाने-पीने की व्यवस्था भी सामूहिक रूप से की जाती है।
ये रहे प्रमुख श्रद्धालु शामिल
इस बार की कांवड़ यात्रा में लोकेंद्र दुबे, महेश लोधी, परसोतम लोधी, गुड्डू लोधी, दीनदयाल विश्वकर्मा, मजनू नोरिया, रामबाबू, बंटी, गब्बर समेत अन्य श्रद्धालु शामिल हैं। सभी ने यात्रा से पहले गांव के मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और फिर ढोल-नगाड़ों के साथ पूरे उत्साह में यात्रा की शुरुआत की।
बांदकपुर पहुंचकर होगा विशेष पूजन
बांदकपुर पहुंचने के बाद सभी श्रद्धालु विधि-विधान के साथ भगवान शिव का मां नर्मदा के जल से अभिषेक करेंगे। यह परंपरा न सिर्फ व्यक्तिगत आस्था से जुड़ी है, बल्कि समाज की सुख-शांति और क्षेत्र की खुशहाली की कामना के साथ की जाती है।
हर साल सैकड़ों श्रद्धालु श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के प्रति अपनी आस्था को इस तरह की पैदल यात्राओं के जरिए प्रकट करते हैं। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव और सामूहिक चेतना का प्रतीक भी है।
गांव में बना उत्सव जैसा माहौल
जैसे ही श्रद्धालुओं का यह जत्था गांव से रवाना हुआ, पूरे रम्पुरा गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। लोग अपने घरों से निकलकर कांवड़ियों को फूल बरसाकर विदा करने पहुंचे। गांव की महिलाएं मंगल गीत गा रही थीं और बच्चे जयकारे लगा रहे थे।
श्रद्धा से भरी यह यात्रा है प्रेरणा का स्रोत
इस तरह की धार्मिक यात्राएं आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में शांति, सेवा और अध्यात्म से जुड़ने का एक सुंदर जरिया बन चुकी हैं। ग्राम रम्पुरा के श्रद्धालु अपने आचरण और समर्पण से समाज को यह संदेश दे रहे हैं कि आस्था में शक्ति होती है और मिलकर चलने से हर सफर आसान हो जाता है।