लखनऊ। सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। इस दौरान भक्त व्रत, पूजा और अनुष्ठानों के जरिए भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। इन्हीं में एक विशेष पूजा है पार्थिव शिवलिंग पूजा, जिसकी मान्यता सदियों पुरानी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से कई जन्मों के पाप मिट जाते हैं, संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
पार्थिव शिवलिंग की पूजा का ऐतिहासिक महत्व
लखनऊ के बीकेटी क्षेत्र में स्थित छोटी देवरई शनि मंदिर के मुख्य पुजारी नरेश चन्द्र शास्त्री बताते हैं कि सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा का विशेष महत्व है। यह परंपरा बहुत प्राचीन है। श्रीराम ने भी लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान शिव की पार्थिव पूजा की थी। वहीं, कलियुग में कुष्मांड ऋषि के पुत्र मंडप ने भी इस पूजा से शिव की कृपा प्राप्त की थी। एक और कथा के अनुसार शनिदेव ने काशी में मिट्टी का शिवलिंग बनाकर पूजा की थी जिससे उन्हें विशेष शक्ति प्राप्त हुई।
क्या होता है पार्थिव शिवलिंग?
“पार्थिव शिवलिंग वह होता है जो पवित्र और शुद्ध मिट्टी से बनाया जाता है। इसे बनाते समय मिट्टी में गंगाजल, गाय का घी, उपलों की राख, गोबर जैसी शुद्ध चीजें मिलाई जाती हैं। इस शिवलिंग को खासतौर पर किसी पवित्र जगह या नदी की मिट्टी से बनाना चाहिए, जिसमें गंगा नदी की मिट्टी को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। शिवलिंग की ऊंचाई 8 से 12 अंगुल के बीच रखनी चाहिए। इसे बनाते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए और इसका आकार गोल, चौकोर या घाट की आकृति जैसा होना चाहिए।”
पूजा विधि और फायदे
पुजारी नरेश शास्त्री के अनुसार पार्थिव शिवलिंग की पूजा करते समय सबसे पहले गणेश जी, माता पार्वती, भगवान विष्णु और नवग्रहों का आह्वान करना चाहिए। फिर शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद, रोली, अक्षत, बेलपत्र, भस्म, आक का फूल, धतूरा और भांग आदि अर्पित करें। शिव जी को भोग लगाएं और “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें। शिव चालीसा का पाठ भी उत्तम माना गया है।
इस पूजा के बाद चढ़ाया गया प्रसाद स्वयं ग्रहण न करें और न ही किसी और को दें। पूजा के बाद शिवलिंग को अगले दिन पवित्र नदी में प्रवाहित कर देना चाहिए।
क्या होते हैं पार्थिव पूजा के लाभ?
“पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से असमय मृत्यु का खतरा टल जाता है।”
बीमारी से ग्रसित व्यक्ति यदि शिवलिंग के सामने महामृत्युंजय मंत्र का जाप करे तो वह रोगमुक्त हो सकता है।
पारिवारिक सुख और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
आर्थिक समस्याएं दूर होती हैं और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
पारिवारिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
सावधानी और नियम
पार्थिव शिवलिंग बनाने के लिए केवल पवित्र नदी, तालाब या बेल वृक्ष की जड़ की मिट्टी का ही प्रयोग करें।
मिट्टी को दूध से शोधित करें।
गाय का गोबर, गुड़, मक्खन और भस्म मिलाकर पूजा की थाली में शिवलिंग बनाएं।
आकार 12 अंगुल से अधिक न हो, अन्यथा पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।
निष्कर्ष
सावन में पार्थिव शिवलिंग की पूजा एक अत्यंत सरल, प्रभावी और फलदायी उपाय है जिससे न केवल भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है, बल्कि जीवन की तमाम परेशानियों का समाधान भी संभव होता है। यह पूजा सच्चे मन से की जाए तो भगवान शिव अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।