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सावन में हर दुख दूर करते हैं रत्नेश्वर महादेव, 150 साल पुराना है लखनऊ का यह भव्य शिव मंदिर

लखनऊ के इटौंजा कस्बे में स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर एक ऐतिहासिक और आस्था से जुड़ा शिवालय है, जिसका निर्माण वर्ष 1892 में राजा इंद्र विक्रम सिंह ने कराया था। सावन और शिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की भव्य नक्काशी, रामलीला आयोजन और नवरात्रि में लगने वाला मेला इसे धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र बना देता है।

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के इटौंजा कस्बे में स्थित रत्नेश्वर महादेव मंदिर (बड़ा शिवालय) न सिर्फ श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि इतिहास और स्थापत्य कला का अद्भुत संगम भी है। रामलीला मैदान परिसर में स्थित यह प्राचीन मंदिर करीब 133 साल पुराना है और इसकी भव्यता आज भी वैसी ही बनी हुई है जैसी इसके निर्माण के समय थी।

सावन में बाबा की आराधना से दूर होती है हर व्याधि
यहां के ग्रामीणों का मानना है कि शिव भक्त अगर सावन मास में श्रद्धा से बाबा का जलाभिषेक करें, या फिर 11 या 21 सोमवार का व्रत रखें, तो उनकी हर मनोकामना पूरी होती है और गंभीर से गंभीर बीमारी भी बाबा हर लेते हैं। यही वजह है कि सावन के महीने में यहां हर दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और विशेषकर सोमवार को रुद्राभिषेक का आयोजन होता है।

1892 में राजा इंद्र विक्रम सिंह ने कराया था निर्माण
इस मंदिर का निर्माण सन् 1892 में इंटौंजा रियासत के राजा इंद्र विक्रम सिंह ने कराया था। मंदिर के अंदर स्थापित शिवलिंग की दिव्यता देखते ही बनती है। मंदिर की दीवारों पर की गई भित्ति चित्रकारी और नक्काशीदार द्वार, विशेष रूप से सिंह के चित्र, इसकी सुंदरता को और भी बढ़ा देते हैं। मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुआं भी है जो पूरी तरह नक्काशीदार है।

रामलीला मैदान के पास खड़ा है भव्य शिवालय
मंदिर के सामने ही राजा इंद्र विक्रम सिंह के दो महल स्थित हैं, जहां उनके वंशज आज भी निवास करते हैं। रामलीला मैदान के पास स्थित इस मंदिर में हर साल इंटौंजा की ऐतिहासिक रामलीला का आयोजन भी मंदिर ट्रस्ट की देखरेख में होता है। यहां रावण, कुंभकरण और मेघनाद के विशाल पुतले पहले से ही खड़े कर दिए जाते हैं, जिससे यह स्थान धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है।

नवरात्र में लगता है भव्य मेला
यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ का स्थान नहीं, बल्कि यहां हर साल नवरात्रि के अवसर पर भव्य मेला भी लगता है। यह मेला लोगों को सिर्फ खरीदारी का ही मौका नहीं देता, बल्कि संस्कृति, रिश्ते और बचपन की यादों से भी जोड़ता है। रंग-बिरंगे कपड़े पहने ग्रामीण, बच्चों की खिलखिलाहट, झूले की आवाज, मिठाइयों की खुशबू और लोकगीतों की धुनें—यह सब मिलकर मेले को एक अनमोल अनुभव बना देते हैं।

मेले में लकड़ी के खिलौने, मिट्टी के बर्तन, चूड़ियां और पारंपरिक हस्तशिल्प वस्तुएं भी मिलती हैं। बुजुर्ग लोग बैठकर पुराने किस्से सुनाते हैं, जबकि युवा यहां अपने सपनों को आकार देते हैं।

कावड़ यात्रा में उमड़ती है भक्तों की भीड़
सावन मास में इस मंदिर में विशाल कावड़ मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों शिवभक्त दूर-दूर से जल चढ़ाने के लिए आते हैं। इस बार सावन में चार सोमवार पड़ रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ गई है। सोमवार को तो यहां पैर रखने तक की जगह नहीं बचती।

महाशिवरात्रि हो या सावन का कोई भी सोमवार, रत्नेश्वर महादेव के दरबार में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। लोगों का मानना है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद बाबा जरूर पूरी करते हैं।

एक नज़र में रत्नेश्वर महादेव मंदिर की खास बातें:
सन् 1892 में हुआ निर्माण

राजा इंद्र विक्रम सिंह द्वारा बनवाया गया

अद्वितीय भित्ति चित्र और शिल्प कला

सावन और शिवरात्रि में विशाल आयोजन

रामलीला मैदान परिसर में स्थित

नवरात्रि में लगता है बड़ा मेला

कावड़ यात्रा के लिए प्रसिद्ध स्थल


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अजय सिंह चौहान लखनऊ

अजय सिंह चौहान – एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार अजय सिंह चौहान लखनऊ (उत्तर प्रदेश) निवासी एक वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों से उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2009 में उन्होंने आगरा से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वे निरंतर पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे और उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लखनऊ जिले के संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। अपने 25 वर्षों के व्यापक अनुभव के दौरान अजय सिंह चौहान ने जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग, जनहित से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों को मजबूती से उठाया। उन्होंने पत्रकारिता को केवल एक पेशा न मानकर, समाज सेवा का सशक्त माध्यम माना और हमेशा निष्पक्ष, निर्भीक व जनपक्षधर लेखन को प्राथमिकता दी। वर्तमान में अजय सिंह चौहान मध्य प्रदेश के प्रमुख हिन्दी दैनिक स्वदेश के लखनऊ संस्करण में ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उनकी लेखन शैली, अनुभव और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें न केवल एक कुशल पत्रकार, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बना दिया है।

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