साल 2025 की रफ्तार से भागती दुनिया में भी सिलवानी जनपद की ग्राम पंचायत बटेर का बड़ा खेत गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। यह गांव ना तो सड़क से जुड़ा है, ना ही स्वास्थ्य सुविधा है और ना ही बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित रास्ता मिल पाया है।
गांव की हालत किसी आदिम युग जैसी
बड़ा खेत गांव तक पक्की सड़क नहीं है। गांव से करीब 3 किलोमीटर दूर एक पक्की सड़क जरूर है, लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए लोगों को एक उफनती नदी पार करनी पड़ती है। खासकर बारिश के दिनों में यह नदी इतनी खतरनाक हो जाती है कि गांव पूरी तरह बाहरी दुनिया से कट जाता है।
गांव में केवल एक प्राथमिक स्कूल है, जिसमें केवल दो शिक्षक हैं। बरसात के मौसम में रास्ते इतने खराब हो जाते हैं कि शिक्षक भी स्कूल नहीं पहुंच पाते। वहीं कुछ बच्चे पास के खैरी हाईस्कूल में पढ़ाई के लिए जाते हैं, लेकिन बारिश के वक्त उन्हें भी घर लौटना मुश्किल हो जाता है।
मीडिया रिपोर्ट के बाद हरकत में आया प्रशासन
हाल ही में गांव की बदहाल सड़कों का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कीचड़ से भरे रास्तों और बच्चों की परेशानी को साफ देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद मीडिया ने ग्राउंड रिपोर्टिंग की, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी।
जनपद सीईओ नीलम रैकवार मौके पर पहुंचीं, लेकिन रास्ता इतना बदहाल था कि उनकी गाड़ी कीचड़ में फंस गई। गाड़ी को निकालने के लिए ट्रैक्टर मंगवाना पड़ा, लेकिन वो भी कीचड़ में धंस गया। आखिरकार दूसरे ट्रैक्टर से खींचकर रास्ता बनाया गया और सीईओ गांव पहुंच सकीं।
“बच्चों को डर तो लगता है, लेकिन अब आदत हो गई है”
जब मीडिया टीम वहां पहुंची तो नदी का जलस्तर इतना बढ़ा हुआ था कि टीम गांव तक नहीं जा सकी। इसी दौरान कुछ बच्चे खैरी से लौट रहे थे, जो नदी के किनारे ही फंसे थे। जब टीम ने बच्चों से बातचीत की, तो उन्होंने कहा – “डर तो लगता है, पर अब आदत हो गई है। रोज़ इसी तरह आना-जाना पड़ता है।”
सरपंच और सचिव पर ग्रामीणों का गुस्सा
गांव के लोगों का गुस्सा अब सरपंच और सचिव पर फूट पड़ा है। ग्रामीणों का कहना है कि, “हमारे सरपंच और सचिव को बस शराब और मुर्गा पार्टी से मतलब है। गांव की तकलीफ उन्हें दिखाई ही नहीं देती। हम कई बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।”
गांव पहुंचने के बाद जनपद सीईओ नीलम रैकवार ने गांव की दुर्दशा देखी और भरोसा दिलाया कि वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है। उन्होंने गांव के हालात को गंभीर माना और कहा कि जल्द ही समाधान के प्रयास होंगे।
अब गांव को मुख्यमंत्री से उम्मीद
गांव के लोगों की आखिरी उम्मीद अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और सांसद शिवराज सिंह चौहान से है। ग्रामीणों का कहना है कि, “हमने हर दरवाजा खटखटा लिया, अब बस सरकार से उम्मीद है कि कभी तो हमारे गांव की तस्वीर बदलेगी।”