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15 दिन से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे दो गांव के 200 बच्चे, मूंग तुलाई केंद्र बना परेशानी की जड़

देवरी के रिछावर और रामपुरा गांव में मूंग तुलाई केंद्र के चलते रास्ता बंद हो गया है। दो गांवों के 200 बच्चे 15 दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे। जानिए पूरी स्थिति और प्रशासन की प्रतिक्रिया।

“मध्य प्रदेश सरकार भले ही शिक्षा पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि देवरी क्षेत्र के रिछावर और रामपुरा गांव के करीब 200 बच्चे पिछले 15 दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसकी वजह है प्रधानमंत्री सड़क के किनारे बना मूंग तुलाई केंद्र, जिसने पूरे रास्ते को ही जाम कर दिया है।”

“इस केंद्र की वजह से गांव वालों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी बुरी तरह से बिगड़ गई है। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब न कोई पैदल निकल पा रहा है, न बाइक जा पा रही है और न ही चार पहिया वाहन। यही एकमात्र रास्ता है जो गांव को देवरी नगर से जोड़ता है, जहां से लोग अपना जरूरी सामान लाते हैं और बच्चे स्कूल जाते हैं।”

मूंग तुलाई केंद्र बना गले की फांस

मां रेवा वेयरहाउस पर प्रशासन ने मूंग तुलाई केंद्र तो बना दिया, लेकिन वाहनों की पार्किंग की कोई उचित व्यवस्था नहीं की। किसानों ने अपने ट्रैक्टर और ट्रॉली रोड पर ही खड़ी कर दी, जिससे लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। जब कोई वाहन बाजू से निकलने की कोशिश करता है, तो सीधा खेत में पलटने का खतरा बना रहता है।

ऊपर से नगर परिषद देवरी द्वारा नर्मदा पाइपलाइन डालने का काम भी चल रहा है। रिछावर से पानी पहुंचाने वाली इस योजना के तहत रोड के बगल की खुदाई कर दी गई है। अब हालात ये हैं कि सड़क पर फिसलन बढ़ गई है और मिट्टी की वजह से कई लोग गिरकर घायल हो चुके हैं।

शिक्षा की राह में रोड़ा

ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक तरफ बच्चों की पढ़ाई के लिए विज्ञापनों में करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं। बच्चों का स्कूल जाना तो दूर, इमरजेंसी में अस्पताल ले जाने की सुविधा तक नहीं बची।

जिन बच्चों को उनके माता-पिता प्राइवेट स्कूल में भेजते हैं, उनकी फीस तो हर महीने लग रही है, लेकिन बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। ऐसे में परिजन चिंता में हैं कि पढ़ाई का नुकसान हो रहा है और बच्चों की सुरक्षा भी खतरे में है।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को कई बार दी गई सूचना

ग्रामीणों ने बताया कि कई बार इस समस्या को लेकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया, 181 पर भी शिकायत की गई, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वे कहते हैं कि अब हम जाएं तो किसके पास? और कब तक इंतजार करें?

कुछ ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर सरकार ने जल्द ध्यान नहीं दिया, तो हमें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। गांव के लोगों ने फैसला लिया है कि जब तक सड़क पर आवागमन सुचारू नहीं हो जाता, वे चुप नहीं बैठेंगे।

एसडीएम ने दिए कार्रवाई के निर्देश

इस गंभीर समस्या को लेकर जब बरेली SDM संतोष मुद्गल से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने खुद सभी वेयरहाउस का निरीक्षण किया है। मां रेवा वेयरहाउस के पास हो रही दिक्कतों को लेकर नगर परिषद के अधिकारियों और ठेकेदार के कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि जहां-जहां वाहन फंस रहे हैं, वहां मुरम डलवाकर रास्ता खुलवाया जा रहा है, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके और बच्चों की पढ़ाई भी दोबारा पटरी पर लौट सके।


निष्कर्ष

देवरी क्षेत्र के रिछावर और रामपुरा गांव के बच्चे इस वक्त अपने भविष्य के साथ समझौता कर रहे हैं। सिर्फ एक प्रशासनिक लापरवाही की वजह से। यह सवाल सिर्फ शिक्षा से जुड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीणों की मूलभूत सुविधाओं और प्रशासन की जवाबदेही से भी जुड़ा है। सरकार को चाहिए कि वह सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, उनके क्रियान्वयन पर भी गंभीरता से ध्यान दे।

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