देवरी फॉरेस्ट विभाग की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन लकड़ी चोरों को रंगे हाथों पकड़ लिया है। यह कार्रवाई सोमवार की सुबह तड़के 3 बजे की गई, जब फॉरेस्ट टीम को सूचना मिली कि कुछ लोग मोटरसाइकिल से अवैध रूप से कीमती लकड़ी ले जा रहे हैं।
मुखबिर से मिली इस सूचना के आधार पर देवरी रेंज के रेंजर शिरोमणि मीणा ने अपनी टीम के साथ बिना देर किए मौके पर पहुंचकर ऊंचा खेड़ा गांव में दबिश दी। यहां तीन लकड़ी चोरों को धरदबोचा गया, जो अलग-अलग स्थानों से कीमती लकड़ी लेकर पलंग और फर्नीचर बनाने की तैयारी में थे।
जानिए कैसे हुआ खुलासा?
शिरोमणि मीणा ने बताया कि उन्हें नेटवर्क के माध्यम से सूचना मिली कि गीता खेड़ा डैम के आसपास से कुछ लोग मोटरसाइकिल पर कीमती लकड़ी की तस्करी कर रहे हैं। इस सूचना पर उन्होंने तत्काल एक्शन लेते हुए टीम को सक्रिय किया और ऊंचा खेड़ा इलाके में नाकेबंदी की।
यहां से दो आरोपियों कमलेश भारद्वाज और राजेश भारद्वाज, जो कि हीरापुर के रहने वाले हैं, को धरदबोचा गया। दोनों के पास से 12 नग लकड़ी बरामद की गई, जिनकी कीमत करीब ₹8000 आंकी गई है। पूछताछ में पता चला कि ये लकड़ियां फर्नीचर और पलंग बनाने के लिए ले जाई जा रही थीं।
तीसरा आरोपी भी चढ़ा हत्थे
इस कार्रवाई के दौरान एक और आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया, जिसका नाम सुंदरलाल आदिवासी है और वह आलनपुर गांव का निवासी है। सुंदरलाल के पास से भी लकड़ी मिली, जिसकी कीमत करीब ₹5000 बताई जा रही है। वह भी मोटरसाइकिल से लकड़ी लेकर आ रहा था।
तीनों आरोपियों के खिलाफ वन अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फॉरेस्ट विभाग ने सभी का पंचनामा बनाकर लकड़ियों को जब्त कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
क्या बोले रेंजर शिरोमणि मीणा?
रेंजर मीणा ने कहा कि –
“वन विभाग किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगा। जो भी व्यक्ति जंगल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कोई भी हो। हमारी टीम पूरी तरह से सतर्क है और लगातार पेट्रोलिंग कर रही है।”
अवैध लकड़ी व्यापार की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय
हाल के दिनों में देवरी और आसपास के इलाकों में अवैध लकड़ी तस्करी की घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ असामाजिक तत्व जंगलों से बेशकीमती लकड़ियों की चोरी कर फर्नीचर का धंधा करने में लगे हैं। हालांकि, वन विभाग की मुस्तैदी के चलते समय-समय पर ऐसी कार्रवाइयां होती रहती हैं।
इस तरह की कार्रवाई न केवल अवैध तस्करी पर लगाम लगाती है, बल्कि वन संरक्षण के प्रति प्रशासन की गंभीरता को भी दर्शाती है।