जितेन्द्र साहू बीजापुर
छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बार फिर नक्सलियों ने निर्दयी चेहरा दिखाया है। जिले के तर्रेम थाना क्षेत्र के गांव छुटवाई और बड़ा तर्रेम में नक्सलियों ने दो ग्रामीणों की बेरहमी से हत्या कर दी। मारे गए ग्रामीणों की पहचान कवासी जोगा (55) और मंगलू कुरसम (50) के रूप में हुई है। दोनों की हत्या धारदार हथियार से की गई है।
रात के अंधेरे में घुसे नक्सली, बेरहमी से उतारा मौत के घाट
यह वारदात 20 और 21 जुलाई की दरम्यानी रात की बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक 4 से 5 नक्सली रात के अंधेरे में गांव में घुसे और दोनों ग्रामीणों को उनके घर से बाहर निकाल कर धारदार हथियार से काट डाला।
पुलिस को जो शुरुआती जानकारी मिली है, उसके अनुसार मृतक मंगलू कुरसम का बेटा नंदू कुरसम कुछ समय पहले नक्सली संगठन छोड़कर आत्मसमर्पण कर चुका है। इसी बात से नाराज़ नक्सलियों ने नंदू को सबक सिखाने की योजना बनाई थी। लेकिन जिस वक्त हमला हुआ, नंदू गांव में नहीं था। इसलिए गुस्से में नक्सलियों ने उसके पिता मंगलू की हत्या कर दी।
दूसरे मृतक कवासी जोगा के संबंध में भी यही आशंका जताई जा रही है कि नक्सलियों को मुखबिरी का शक था।
इलाके में बढ़ाई गई सर्चिंग, फोर्स अलर्ट पर
बीजापुर के एएसपी चंद्रकांत गोवर्ना ने बताया कि घटना के बाद इलाके में सर्च ऑपरेशन तेज़ कर दिया गया है। जवानों की टीम जंगलों में गश्त बढ़ा रही है और माओवादियों के ठिकानों पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि-
“अब नक्सलियों की संख्या सीमित रह गई है, इसलिए वे अपनी मौजूदगी दिखाने के लिए इस तरह की कायराना हरकतें कर रहे हैं। लेकिन फोर्स उन्हें हर हाल में खत्म करेगी।”
25 दिन में 10 हत्याएं, दहशत में ग्रामीण
बीजापुर में हालात लगातार डरावने होते जा रहे हैं। बीते 25 दिनों के अंदर मुखबिरी के शक में 10 लोगों की हत्या कर दी गई है। मारे गए लोगों में 6 ग्रामीण, 2 छात्र और 2 शिक्षा दूत शामिल हैं। यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।
ग्रामीणों में डर का माहौल है, क्योंकि नक्सली अक्सर उन लोगों को निशाना बनाते हैं जो सरकार की ओर झुकाव दिखाते हैं, या फिर जिनके परिजन आत्मसमर्पण करते हैं।
25 साल में 1821 लोगों की जान ले चुके हैं नक्सली
बीजापुर और बस्तर संभाग के अन्य इलाकों में नक्सल हिंसा कोई नई बात नहीं है। एक सरकारी आंकड़े के अनुसार, पिछले 25 वर्षों में नक्सलियों ने करीब 1821 लोगों की हत्या की है। इनमें बड़ी संख्या में ग्रामीण, सरकारी कर्मचारी और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।
हर बार जब कोई नक्सली आत्मसमर्पण करता है, तो माओवादी संगठन उसे गद्दार मानते हैं और उसकी हत्या या उसके परिवारवालों को टारगेट करते हैं। यही कारण है कि आत्मसमर्पण करने वाले कई पूर्व नक्सलियों के परिजन अब भी डर के साये में जी रहे हैं।
सरकार के लिए बड़ी चुनौती
लगातार हो रही हत्याओं ने प्रशासन और सरकार की चिंता बढ़ा दी है। एक ओर सरकार आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उनके परिजन माओवादियों की हिंसा के शिकार बन रहे हैं।
इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और हमलावरों की पहचान की कोशिश की जा रही है। ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत स्थानीय पुलिस को भेजे।