टीकमगढ़, मध्यप्रदेश।
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले से एक दिल दहला देने वाली और अमानवीय घटना सामने आई है। बल्देवगढ़ थाना क्षेत्र के इम्लाना गांव में दर्जनों गायों को गांव वालों ने खेत बर्बाद होने के डर से एक खंडहरनुमा बिल्डिंग में बंद कर दिया। यह बिल्डिंग गांव से दूर सुनसान इलाके में स्थित थी, और दो महीने तक किसी ने वहां झांककर भी नहीं देखा। नतीजा ये हुआ कि वहां बंद की गई सभी गायें भूख और प्यास से तड़प-तड़प कर मर गईं।
गांव के लोग भूले गायों को, खंडहर बनी उनकी कब्रगाह
पूरा मामला तब सामने आया जब गांव के कुछ जागरूक लोगों ने इस दर्दनाक स्थिति की जानकारी गो-सेवकों को दी। जब गो-सेवक और कुछ ग्रामीण उस जगह पर पहुंचे तो वहां का दृश्य देखकर सभी दहल गए। खंडहर के अंदर चारों तरफ गायों के कंकाल पड़े थे, जो भूख-प्यास और तड़प की गवाही दे रहे थे। माहौल इतना भयावह और दुर्गंध भरा था कि वहां कुछ देर खड़ा रहना भी मुश्किल था।
खंडहर में छिपी क्रूरता की दास्तान
बताया जा रहा है कि यह खंडहरनुमा इमारत गांव से बाहर स्थित है, जिसे अब कोई उपयोग में नहीं लाता। गांव के लोगों ने खेतों को नुकसान से बचाने के लिए करीब एक दर्जन गायों को इस बिल्डिंग में बंद कर दिया था। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह रही कि उन्होंने इसके बाद पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। किसी ने इन गायों को चारा नहीं दिया, पानी नहीं दिया और न ही किसी प्रकार की देखभाल की।
प्रशासन की चुप्पी और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जेसीबी मशीन से गायों के कंकालों को दफन कर दिया गया। लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि कुल कितनी गायों की मौत हुई है। इस संवेदनशील मामले में जिला प्रशासन पूरी तरह चुप है। कैमरे पर कोई अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इससे कई सवाल उठते हैं—क्या प्रशासन की यह चुप्पी कहीं इस अमानवीय कृत्य को छुपाने की कोशिश तो नहीं?
गो-सेवकों की नाराज़गी और ग्रामीणों में सन्नाटा
गोसेवकों ने इसे एक क्रूर और शर्मनाक हरकत बताया है। उनका कहना है कि यदि समय रहते इन गायों की जानकारी दी गई होती, तो उनकी जान बचाई जा सकती थी। इस पूरे घटनाक्रम से ग्रामीणों में भी सन्नाटा पसरा है। हालांकि अब कुछ लोग इस बात से सहमत हैं कि यह एक सामूहिक लापरवाही का परिणाम है, जिसमें मूक जानवरों की कीमत चुकानी पड़ी।
क्या होगी कार्यवाही?
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में दोषियों पर कोई सख्त कार्रवाई करेगा? क्या इन बेजुबान गायों की मौत यूं ही अनदेखी रह जाएगी? जब गायों को लेकर भावनाएं इतनी गहरी हैं, तो ऐसी घटनाओं पर सख्त और पारदर्शी कार्रवाई क्यों नहीं की जाती?