लखनऊ, अजय सिंह चौहान – Water air pollution बीकेटी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इन दिनों एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। क्षेत्र के पहाड़पुर, अतरौरा, मोहम्मदपुर सरैंया और सहपुरवा सहित कई गांवों में वायु और जल प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि लोगों की स्वास्थ्य स्थिति लगातार बिगड़ रही है। पेंड़-पौधे, पशु-पक्षी, खेत-फसल और यहां तक कि गर्भ में अजन्मे शिशु तक इस प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं।
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बीकेटी के लोगों की परेशानी का मुख्य कारण है पहाड़पुर गांव में स्थापित पुरुषोत्तम राम ग्लूकोज़ फैक्ट्री। फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित जल आसपास के खेतों और नालों में छोड़ा जा रहा है। इससे न केवल भूजल प्रदूषित हो रहा है, बल्कि लोग विभिन्न संक्रामक और गंभीर बीमारियों की चपेट में भी आ रहे हैं। हवा में फैल रही हानिकारक गैसें लोगों की सांसें रोक रही हैं, जिससे स्वास्थ्य संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों की शिकायतें और प्रशासनिक उदासीनता
ग्रामीणों ने कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को इस गंभीर समस्या की लिखित शिकायत दी। बावजूद इसके, कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सिर्फ जुर्माने की मामूली कार्रवाई हुई और मामला वहीं ठंडा पड़ गया। कुछ ही दिनों बाद फैक्ट्री के कारण पैदा होने वाली बदबू और दूषित जल की समस्या फिर से कायम हो गई।Water air pollution
ग्रामीण अब सवाल कर रहे हैं – आखिर चुनावी वादों में जल और वायु प्रदूषण जैसे जानलेवा मुद्दे क्यों नहीं शामिल किए जाते? क्या केवल सत्ता पाने के लिए ही राजनीतिक दल विकास के लॉलीपॉप बांटते रहते हैं, जबकि लोगों की सांसों और जीवन पर संकट मंडरा रहा है?
चुनावी दलों का मौन
बीकेटी विधानसभा क्षेत्र में मुख्य राजनीतिक दल – बीजेपी, कांग्रेस, सपा और बसपा – सभी इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। यह स्थिति निश्चित रूप से लोगों के जीवन के लिए खतरनाक है। चुनावों में वायु और जल प्रदूषण पर कोई ठोस वायदा न करना, ग्रामीणों की भलाई और सुरक्षा की अनदेखी माना जा सकता है।Water air pollution
ग्रामीण बताते हैं कि केवल चुनाव जीतने के लिए ही राजनीतिक दल जनता को विकास का झूठा भरोसा देते हैं, जबकि असली जीवन रक्षक मुद्दों पर ध्यान नहीं देते। स्वच्छ जल और हवा की कमी से स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस मुद्दे पर गंभीर नजर नहीं आ रहे।Water air pollution
प्रदूषण का प्रभाव – स्वास्थ्य और जीवन पर संकट
स्थानीय लोगों के अनुसार, फैक्ट्री से निकलने वाला दूषित जल खेतों और नहरों में जाता है। इससे सब्जियों और फलों में भी प्रदूषित तत्व पहुंच रहे हैं। वहीं, हवा में फैल रही हानिकारक गैसें बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही हैं। सर्दी-जुकाम, सांस की तकलीफ, त्वचा रोग और अन्य संक्रामक बीमारियां अब सामान्य हो चुकी हैं।Water air pollution
पशु और पक्षी भी इस प्रदूषण से प्रभावित हो रहे हैं। गायें और बकरी अपने घास-चरने के लिए दूषित पानी पी रही हैं, जिससे उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा है। खेतों की उपज भी घट रही है। यही नहीं, इस प्रदूषण के कारण क्षेत्र की हरियाली और जल स्रोत धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं।Water air pollution
ग्रामीणों की उम्मीद और मांगें
ग्रामीण अब चाहते हैं कि चुनाव में सिर्फ विकास और वोट के वादों के बजाय उनकी स्वच्छ जल और वायु की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए। उनका मानना है कि अबकी बार वे सिर्फ उसी को वोट देंगे, जो उनके जीवन और स्वास्थ्य से जुड़े इस गंभीर मुद्दे का ठोस समाधान दे सके।https://dainikhistory.com/
ग्रामीणों की मांग है:
फैक्ट्री से निकलने वाले दूषित जल को तुरंत रोकने की ठोस कार्रवाई।
वायु प्रदूषण को कम करने के लिए प्रभावी उपाय।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए नियमित निगरानी और सख्त कार्रवाई।
स्वास्थ्य जांच शिविर और प्रभावित लोगों के इलाज की सुविधा।
बीकेटी चुनाव में वायु और जल प्रदूषण क्यों नहीं मुद्दा?
विशेषज्ञ बताते हैं कि विकास की भ्रांत अवधारणा और राजनीतिक दलों की नीतियां इस गंभीर मुद्दे को चुनावी चर्चा में लाने से रोक रही हैं। दलों की प्राथमिकता सिर्फ सत्ता हासिल करना है। इसलिए चुनावी घोषणाओं में पानी और हवा की सफाई, स्वास्थ्य सुरक्षा या पर्यावरण संरक्षण जैसी समस्याएं शामिल नहीं होतीं।
फिलहाल बीकेटी के गांव – पहाड़पुर, अतरौरा, मोहम्मदपुर सरैंया और सहपुरवा – लगातार प्रदूषण की चपेट में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अब जनता अपने जीवन से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने वाले प्रतिनिधियों को ही चुनना चाहती है।