लखनऊ। खरीफ सीजन में जब धान और अन्य फसलों को यूरिया खाद की सबसे ज्यादा जरूरत है, तभी लखनऊ जिले के बीकेटी तहसील क्षेत्र में यूरिया की किल्लत ने किसानों की नींद उड़ा दी है। सरकार की सख्ती और कृषि विभाग की कार्रवाई के बावजूद यहां यूरिया की कालाबाजारी धड़ल्ले से जारी है। हालत ये है कि किसान सुबह से शाम तक लंबी-लंबी लाइनों में खड़े रहते हैं और खाली हाथ घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं।
इस गंभीर समस्या को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रदेश उपाध्यक्ष रामप्रकाश सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश स्तरीय अधिकारियों और जिले के आलाधिकारियों को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि खरीफ के पीक सीजन में किसानों को यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
किसानों की बढ़ती परेशानी
बीकेटी तहसील के ज्यादातर लोग खेती-किसानी पर ही निर्भर हैं। मौजूदा वक्त में धान की फसल की बढ़वार के लिए यूरिया सबसे अहम खाद है। लेकिन किसानों का कहना है कि सरकारी आपूर्ति बेहद कम है और जो खाद बाजार में उपलब्ध है, उसे प्राइवेट व्यापारी मनमाने दामों पर बेच रहे हैं।
किसान नेता रामप्रकाश सिंह का कहना है कि यह स्थिति किसानों के साथ सीधे-सीधे अन्याय है। “किसान सारा दिन लाइन में खड़ा रहता है, लेकिन शाम को बिना यूरिया लिए वापस लौटता है। जिम्मेदार अधिकारी शासन को झूठी रिपोर्ट भेजकर अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, जबकि जमीन पर हालात एकदम अलग हैं।”
कालाबाजारी पर नहीं लग रही लगाम
किसानों ने आरोप लगाया है कि प्राइवेट दुकानों और साधन सहकारी समितियों में जब भी यूरिया की खेप आती है, तो हजारों किसान वहां उमड़ पड़ते हैं। लेकिन उपलब्धता सीमित होने की वजह से मुश्किल से चौथाई किसानों को ही खाद मिल पाती है। बाकी किसान खाली हाथ लौट जाते हैं।
किसान नेताओं का कहना है कि यह स्थिति जानबूझकर बनाई जा रही है, ताकि किसान परेशान हों और राजनीतिक रूप से सरकार के खिलाफ माहौल बने। उनका कहना है कि कृषि प्रधान देश में अगर किसानों को ही समय पर खाद न मिले, तो यह एक बहुत बड़ी साजिश जैसी लगती है।
किसानों का गुस्सा बढ़ता जा रहा
पत्र में चेतावनी देते हुए रामप्रकाश सिंह ने लिखा है कि अगर तीन दिन के अंदर बीकेटी तहसील क्षेत्र में जरूरत के अनुसार यूरिया की आपूर्ति नहीं की गई, तो हजारों किसान अपने मवेशियों के साथ मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
उन्होंने बताया कि इस समस्या की जानकारी दर्जनों बार अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। “अगर सरकार ने अब भी ध्यान नहीं दिया तो किसान मजबूरन सड़कों पर उतरेंगे और मुख्यमंत्री को खुद जमीनी हकीकत बताने जाएंगे।”
सरकार की चुनौती और किसानों की उम्मीद
प्रदेश सरकार भले ही यह दावा करती रही है कि किसानों को खाद और बीज की आपूर्ति पर्याप्त रूप से हो रही है, लेकिन किसानों के अनुभव इसके बिल्कुल उलट हैं। खरीफ का यह सीजन किसानों के लिए बेहद अहम है क्योंकि इस समय अगर खाद की कमी हुई तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।
किसानों की उम्मीद अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से है कि वे खुद इस मामले में दखल देंगे और बीकेटी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में खाद आपूर्ति की निगरानी करेंगे।
किसान नेताओं की मांगें
खरीफ सीजन में तुरंत पर्याप्त मात्रा में यूरिया उपलब्ध कराया जाए।
प्राइवेट दुकानों में होने वाली कालाबाजारी पर रोक लगे।
साधन सहकारी समितियों में किसानों के लिए पारदर्शी वितरण व्यवस्था हो।
जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।