गोवर्धन। Shri Krishna’s sixth celebration जन्माष्टमी के बाद होने वाली श्रीकृष्ण की छठी पर मंगलवार देर शाम अडींग गांव में सर्वसमाज द्वारा एक भव्य धार्मिक आयोजन हुआ। परंपरागत रीति-रिवाजों के बीच हुए इस कार्यक्रम में छठी पूजन, कुआं पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें न केवल अडींग गांव के लोग बल्कि आसपास के गांवों और कस्बों से भी हजारों श्रद्धालु शामिल हुए।
पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ छठी पूजन
श्रीकृष्ण जन्म के उपरांत छठी तिथि को आयोजित होने वाले इस पूजन की शुरुआत महिलाओं ने पारंपरिक ढंग से की। सज-धज कर आई महिलाओं ने पूजा-अर्चना की और भगवान श्रीकृष्ण की छठी का पूजन पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न किया। इस दौरान गांव का माहौल भक्तिमय हो गया।
कुआं पूजन और महिलाओं का नृत्य बना आकर्षण
छठी पूजन के बाद कुआं पूजन का आयोजन हुआ। महिलाओं ने इसमें बड़ी संख्या में भाग लिया और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करते हुए पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। ढोलक और मंजीरे की थाप पर किए गए इस नृत्य ने पूरे वातावरण को भक्ति और उल्लास से भर दिया।
भजन-कीर्तन और भक्तिमय वातावरण
शाम होते ही आयोजन स्थल पर भजन-कीर्तन की शुरुआत हुई। भक्ति गीतों की गूंज से पूरा माहौल भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने भजन गाते हुए जयकारे लगाए और ‘नंदलाल’ के जन्मोत्सव के इस अनूठे अवसर का आनंद उठाया।
आयोजन के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक विशाल भंडारा रहा। भंडारे में हजारों की संख्या में भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की और आयोजन की सफलता में गांववासियों और स्वयंसेवकों का अहम योगदान देखने को मिला। लोगों ने बताया कि हर साल यह आयोजन सामूहिक सहयोग से ही संपन्न होता है।
वर्षों पुरानी परंपरा
गांव के बुजुर्गों के अनुसार अडींग गांव में यह परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है। हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद छठी तिथि को यह आयोजन उसी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। ग्रामीणों का मानना है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था से जुड़ा है, बल्कि गांव की एकता और संस्कृति का प्रतीक भी है।
श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बना
पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति भाव काबिले-तारीफ रहा। आयोजन स्थल को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से सजाया गया था। जैसे ही शाम ढली, वहां का वातावरण पूरी तरह से धार्मिक रंग में रंग गया।