नोएडा के राज्य जीएसटी कार्यालय में तैनात अपर आयुक्त (IAS) संदीप भगिया पर महिला अधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों को लेकर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
अमिताभ ठाकुर का कहना है कि महिला अधिकारियों ने अपने लिखित शिकायत पत्र में संदीप भगिया के खिलाफ जो बातें बताई हैं, वो बेहद गंभीर हैं और उनकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में देरी से कार्रवाई करना न केवल पीड़ित पक्ष के लिए निराशाजनक है, बल्कि विभाग की छवि पर भी सवाल खड़े करता है।
मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र, डीओपीटी को भी सूचना
अमिताभ ठाकुर ने बताया कि उन्होंने यह पत्र 5 अगस्त 2025 को मुख्यमंत्री कार्यालय में भेजा था, जिसकी प्रति भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) को भी भेजी गई है। पत्र मिलने के बाद मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव संजय प्रसाद ने राज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव को जांच के निर्देश दिए थे।
हालांकि, ठाकुर के अनुसार, अब एक सप्ताह बीत चुका है लेकिन इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। यही वजह है कि उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि आरोपी अफसर को तत्काल वर्तमान पद से हटाया जाए और जांच की जिम्मेदारी एक महिला प्रमुख सचिव को दी जाए, ताकि पीड़ित महिला अधिकारियों को न्याय मिल सके।
गंभीर आरोप, कार्रवाई में देरी पर सवाल
इस मामले में महिला अधिकारियों का कहना है कि जब तक आरोपी अफसर उसी पद पर बैठा रहेगा, निष्पक्ष जांच की उम्मीद करना मुश्किल है। आरोपों की प्रकृति को देखते हुए पीड़ित पक्ष ने भी ट्रांसफर की मांग का समर्थन किया है।
अमिताभ ठाकुर का कहना है कि सरकारी दफ्तरों में इस तरह के मामलों में तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए ताकि बाकी कर्मचारी भी यह संदेश लें कि महिला अधिकारियों के साथ किसी भी तरह का गलत व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सख्त और पारदर्शी जांच की मांग
आजाद अधिकार सेना के अध्यक्ष का स्पष्ट कहना है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष होनी चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि जांच अधिकारी पर किसी तरह का दबाव न हो और पीड़ित महिलाओं को बिना डर अपने बयान दर्ज कराने का मौका मिले।
ठाकुर ने यह भी कहा कि यह मामला केवल एक अफसर और कुछ महिला अधिकारियों के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह पूरे सरकारी सिस्टम की विश्वसनीयता से जुड़ा है। अगर ऐसे मामलों में समय पर और सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो इससे गलत संदेश जाएगा।
जनता और कर्मचारियों की नजर जांच पर
इस घटना ने न केवल विभागीय हलकों में बल्कि आम जनता के बीच भी चर्चा का विषय बना दिया है। कर्मचारी संगठन भी इस मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य कर विभाग आगे क्या कदम उठाता है।
अगर आने वाले दिनों में इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो संभव है कि आजाद अधिकार सेना और पीड़ित पक्ष इस मुद्दे को और जोर-शोर से उठाए।