गोवर्धन/वृंदावन। ब्रज की भूमि पर भक्ति और सेवा की अनोखी झलक सोमवार को देखने को मिली। वृंदावन स्थित श्री हित राधा केली कुंज आश्रम में परम संत प्रेमानंद जी महाराज के आशीर्वाद से सभी बृजवासी ब्राह्मण, गोप-ग्वाल और ग्वालिनों को जोड़े से प्रसादी कराई गई। यह आयोजन संत महाराज की सेवा भावना और बृजवासियों के प्रति उनके गहरे स्नेह का प्रतीक रहा। (At the Kelly Kunj Ashram in Vrindavan, Saint Premanand Maharaj offered collective prasad to the Brijwasi Brahmins, cowherds and milkmaids. The devotee families who arrived in 21 buses were given a grand welcome and traditional food was served to them.)
सुबह से ही गोवर्धन के अलग-अलग इलाकों से भक्तों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। करीब 21 बसों के माध्यम से गोवर्धन के ब्राह्मण समाज के लोग सपत्नीक वृंदावन पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। केली कुंज आश्रम में प्रवेश करते ही शिष्यों ने सभी ब्राह्मण परिवारों के पैर धुलवाए और पुष्पवृष्टि कर उनका अभिनंदन किया। यह दृश्य देखकर हर कोई भावविभोर हो उठा।
प्रसादी का अद्भुत आयोजन
संत प्रेमानंद जी महाराज की प्रेरणा से तैयार इस आयोजन में सैकड़ों ब्रजवासी परिवारों ने प्रसादी ग्रहण की। भोज में पारंपरिक ब्रज व्यंजन परोसे गए। सभी भक्त परिवार बड़े आनंद और उल्लास के साथ प्रसाद का स्वाद लेते रहे। भोजन के बाद पूरा आश्रम “राधे-राधे” और “जय श्री राधे” के जयकारों से गूंज उठा।
महाराज जी के दर्शन की चाह
भोजन प्रसादी के बाद सभी भक्तजन संत प्रेमानंद जी महाराज के दर्शन करने के लिए लालायित हो उठे। हर किसी की यही इच्छा थी कि इस पावन अवसर पर महाराज जी के दर्शन कर आशीर्वाद ले सकें। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों से इस बार महाराज जी स्वयं प्रसादी स्थल पर उपस्थित नहीं हो पाए। बावजूद इसके भक्तों के उत्साह और भक्ति में कोई कमी नहीं आई।
बृजवासियों की भावनाएं
भंडारे में शामिल हुए गोवर्धन के बृजवासी भक्तों ने बताया कि राधा रानी की असीम कृपा संत प्रेमानंद महाराज पर बनी हुई है। इसी कृपा से वह लगातार धर्म, संस्कृति और सनातन परंपरा का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। बृजवासियों की सेवा करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। समय-समय पर वे इस तरह के आयोजन कर ब्रज की परंपरा और संस्कृति को जीवित रखते हैं।
एक भक्त ने भावुक होकर कहा –
“यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हमें संत प्रेमानंद महाराज के आशीर्वाद से इस भोजन प्रसादी में शामिल होने का अवसर मिला। उनकी विनम्रता और सेवा भाव ही उन्हें महान संतों की श्रेणी में स्थापित करता है।”
ब्रज संस्कृति का प्रतीक
ब्रज की भूमि पर संतों की परंपरा सदियों से समाज को दिशा देती आई है। संत प्रेमानंद महाराज भी उसी परंपरा के वाहक हैं। उनके द्वारा किए गए इस आयोजन ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि ब्रज संस्कृति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं, बल्कि भक्ति, सेवा और समाजिक समरसता का सुंदर संगम है।
सैकड़ों जोड़ों को सामूहिक प्रसादी कराना इस बात का प्रमाण है कि आज भी ब्रज में सेवा और संत परंपरा जीवंत है। ब्रजवासियों के चेहरे पर दिखाई देने वाली खुशी और उनके आभार भरे शब्द इस आयोजन की सफलता को बयां कर रहे थे।