लखनऊ। Journalist Attack Lucknow राजधानी में एक पत्रकार पर हुए हमले और लूटपाट की घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला इटौंजा थाना क्षेत्र के राजापुर गांव का है, जहां रविवार देर रात तीन नकाबपोश बदमाशों ने पत्रकार पर जानलेवा हमला किया। खास बात यह है कि घटना के पूरे तीन दिन बाद जाकर एफआईआर दर्ज हुई, वो भी तब जब विधायक योगेश शुक्ला के हस्तक्षेप की नौबत आ गई।
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कवरेज से लौटते वक्त हमला
जानकारी के मुताबिक कठवारा गांव निवासी पत्रकार अनिल कुमार सिंह रविवार की रात लगभग 10:30 बजे इटौंजा टोल से कवरेज कर अपने घर लौट रहे थे। उसी दौरान राजापुर गांव के पास निर्माणाधीन पानी की टंकी के पास अचानक एक बाइक पर सवार तीन नकाबपोश बदमाशों ने उन्हें रोक लिया। Journalist Attack Lucknow
हमलावरों ने पहले उनकी बाइक तोड़ी, फिर लाठी-डंडों से उन पर हमला कर मारपीट की। इतना ही नहीं, बदमाशों ने उनकी जेब से 110 रुपये भी लूट लिए। घटना के दौरान हमलावरों ने उन्हें धमकी देते हुए कहा – “ज्यादा पत्रकारिता दिखाओगे तो जान से हाथ धो बैठोगे।” Journalist Attack Lucknow
मजदूरों के आने से भागे बदमाश
पीड़ित पत्रकार ने बताया कि घटना के दौरान पास ही ढलाई मशीन और ट्रैक्टर पर मजदूर आ रहे थे। उनकी आवाज सुनकर बदमाश घबरा गए और बाइक से मौके से फरार हो गए। इस बीच अनिल सिंह ने किसी तरह अपनी जान बचाई। Journalist Attack Lucknow
पुलिस की लापरवाही, पत्रकारों का विरोध
हमले के अगले दिन यानी सोमवार को पत्रकार ने थाने पहुंचकर लिखित तहरीर दी। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि 48 घंटे तक पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। इससे नाराज होकर मंगलवार को पीड़ित समेत क्षेत्र के पत्रकार इटौंजा थाने में दिनभर डटे रहे। Journalist Attack Lucknow
पत्रकारों ने पुलिस की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की मांग की। आखिरकार शाम को स्थानीय विधायक योगेश शुक्ला और नगर पंचायत चेयरमैन अवधेश कमल अवस्थी के दखल के बाद अज्ञात हमलावरों के खिलाफ केस दर्ज हुआ।
पीड़ित पत्रकार का आरोप
पीड़ित अनिल कुमार सिंह का कहना है कि यह हमला पूरी तरह से सुनियोजित था। उन्होंने बताया कि बदमाशों ने न केवल उनकी बाइक तोड़ी बल्कि बार-बार धमकाया भी। उनका कहना है कि पत्रकारों पर हमले लगातार बढ़ रहे हैं और पुलिस समय पर कार्रवाई नहीं करती। Journalist Attack Lucknow
पत्रकार सुरक्षा पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन अगर खबर कवरेज से लौटते वक्त पत्रकार ही सुरक्षित न हों तो यह चिंता की बात है।
स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि पुलिस को मामले को गंभीरता से लेना चाहिए था। अगर पहले दिन ही एफआईआर दर्ज कर ली जाती तो शायद आरोपियों को पकड़ने में आसानी होती। Journalist Attack Lucknow
विधायक का बयान
विधायक योगेश शुक्ला ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र की आवाज हैं और उन पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी और पुलिस को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस जांच शुरू
एफआईआर दर्ज होने के बाद अब पुलिस ने अज्ञात हमलावरों की तलाश शुरू कर दी है। आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और बदमाशों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल पुलिस का कहना है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। Journalist Attack Lucknow
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यह घटना न केवल पत्रकार सुरक्षा की कमी को उजागर करती है बल्कि पुलिस की लापरवाही को भी सामने लाती है। तीन दिन बाद एफआईआर दर्ज होना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि पुलिस कितनी तेजी से आरोपियों को पकड़कर पत्रकार और समाज को न्याय दिला पाती है।