उत्तर प्रदेश , आईएएस अधिकारी विजय विश्वास पंत ( IAS Vijay Vishwas Pant ) उन गिने-चुने अधिकारियों में से एक हैं, जिनकी पहचान काम से होती है, न कि सुर्खियों से। उन्होंने अपने फैसलों और कार्यशैली से न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में एक मिसाल कायम की है। उनकी छवि एक ऐसे अफसर की है, जो भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सख्त कदम उठाते हैं और जनता की समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी मानकर उनका समाधान ढूंढते हैं।
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उत्तराखंड के हल्द्वानी निवासी विजय विश्वास पंत का प्रशासनिक सफर मेहनत, ईमानदारी और निष्ठा की मिसाल पेश करता है। उनके पिता बांदा जिले में पीसीएस अधिकारी रहे और माता गणित की प्राध्यापिका। घर का यही अनुशासन और शिक्षा का माहौल उन्हें प्रशासनिक क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
पढ़ाई से प्रशासन तक का सफर
विजय विश्वास पंत की शुरुआती पढ़ाई रानीखेत के निर्मला कान्वेंट स्कूल से हुई, जबकि इंटरमीडिएट उन्होंने सेंट पॉल्स कॉलेज से पूरा किया। आगे की पढ़ाई में उनका झुकाव इंजीनियरिंग की ओर था और वह IIT में छात्रों को पढ़ाने का सपना देखते थे। लेकिन उनकी मां चाहती थीं कि बेटा IAS बने। मां के सपनों को साकार करने और अपनी मेहनत से उन्होंने 2004 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास की। यही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
प्रशासनिक जीवन की शुरुआत उन्होंने सहारनपुर से की, जहां 2006 में उन्हें पहली नियुक्ति ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के तौर पर मिली। इसके बाद वाराणसी में सीडीओ और महोबा, सोनभद्र, मैनपुरी, कानपुर नगर जैसे जिलों के जिलाधिकारी बने। हर जिले में रहते हुए उन्होंने अलग-अलग समस्याओं को गहराई से समझा और समाधान की दिशा में कड़े कदम उठाए।
भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ सख्त कार्रवाई
विजय विश्वास पंत को जनता इसलिए भी पसंद करती है क्योंकि वे भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ समझौता नहीं करते। कानपुर में डीएम रहते हुए उन्होंने “स्वच्छ और सुंदर कानपुर” अभियान की शुरुआत की। इस दौरान वह खुद धूप में निकलकर सड़कों पर झाड़ू लगाते और लोगों को जागरूक करते। उनकी यह कार्यशैली जनता के बीच विश्वास पैदा करती है कि अधिकारी भी उनके साथ खड़ा है। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
उनकी साफ-सुथरी छवि और ईमानदार फैसलों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी प्रभावित किया। मुख्यमंत्री ने कई मौकों पर उनके कामों की सराहना की। यही वजह है कि उन्हें लगातार बड़े और जिम्मेदार पद दिए गए। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
प्रयागराज से लखनऊ कमिश्नर तक का सफर
प्रयागराज कमिश्नर के तौर पर उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी महाकुंभ 2025 का आयोजन था। उन्होंने बड़े स्तर पर इसकी रूपरेखा तैयार की और व्यवस्थाओं को मजबूती दी। मौनी अमावस्या के स्नान के दिन जब संगम नोज पर भगदड़ जैसी स्थिति बनी, तब उनका एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में वह श्रद्धालुओं को पहले ही चेतावनी दे रहे थे—“जो सोवत है, सो खोवत है। जागिए और स्नान कर लीजिए, भीड़ बढ़ सकती है।” ( IAS Vijay Vishwas Pant )
उनकी यह दूरदर्शिता और समय पर सतर्कता दिखाने वाली अपील चर्चा में रही। भले ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, लेकिन पंत हमेशा की तरह काम पर ज्यादा ध्यान देने वाले अफसर के रूप में ही सामने आए। प्रयागराज में उनकी सख्त और प्रभावी कार्यशैली की वजह से ही उन्हें लखनऊ मंडल का कमिश्नर नियुक्त किया गया। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
जनता के बीच सहज और अपनेपन वाला रवैया
हल्द्वानी से ताल्लुक रखने वाले विजय विश्वास पंत जब यूपी के अलग-अलग जिलों में तैनात रहे, तो वहां की जनता ने उन्हें अपनेपन के साथ अपनाया। वे हमेशा समस्याओं को जनता की तरह महसूस करते और उनका हल निकालने की दिशा में तुरंत कदम उठाते। यही वजह है कि आम लोग उन्हें सिर्फ अधिकारी नहीं, बल्कि अपना साथी मानते हैं। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
उनकी कार्यशैली में अनुशासन, संवेदनशीलता और निर्णय लेने की क्षमता साफ झलकती है। वे कड़े फैसले लेने से नहीं हिचकिचाते, लेकिन साथ ही मानवीय दृष्टिकोण से भी चीजों को देखते हैं। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
सुर्खियों से दूर, काम के जरिए पहचान
विजय विश्वास पंत खुद कहते हैं कि उन्हें सुर्खियों में रहना पसंद नहीं है। उनका मानना है कि अधिकारी का काम है जनता के लिए फैसले लेना और उनकी जिंदगी आसान बनाना। शायद यही वजह है कि उन्होंने हर जिले में अपनी छाप सिर्फ काम से छोड़ी।
उनकी पहचान एक अनुशासित और सख्त IAS अधिकारी के रूप में है, लेकिन साथ ही वे खुले विचारों वाले और जनता से जुड़ने वाले अफसर भी हैं। उनके कई प्रशासनिक मॉडल्स को सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी सराहा है और दूसरे जिलों में लागू करने का सुझाव दिया है। ( IAS Vijay Vishwas Pant )
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जिन जिलों में रहे तैनात
- 2006 – सहारनपुर में पहली पोस्टिंग बतौर ज्वाइंट मजिस्ट्रेट
- 2007 – वाराणसी में मुख्य विकास अधिकारी
- 2008 – महोबा जिले के जिलाधिकारी
- इसके बाद सोनभद्र, मैनपुरी और कानपुर नगर के डीएम
- प्रयागराज और आजमगढ़ के कमिश्नर
- वर्तमान में लखनऊ मंडल के कमिश्नर
हर पद पर रहते हुए उन्होंने प्रशासनिक जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाया।
आईएएस विजय विश्वास पंत की कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो प्रशासनिक सेवा में आना चाहते हैं। उनकी मेहनत, ईमानदारी और काम के प्रति समर्पण इस बात का सबूत है कि सही सोच और मजबूत इरादे से कोई भी बदलाव संभव है।
उन्होंने बार-बार साबित किया है कि एक अफसर सिर्फ आदेश देने वाला नहीं, बल्कि जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं को हल करने वाला साथी भी हो सकता है। सुर्खियों से दूर रहकर अपने काम से पहचान बनाने वाले विजय विश्वास पंत सचमुच आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल हैं। ( IAS Vijay Vishwas Pant )