लखनऊ। बीकेटी तहसील के लासा, सुल्तानपुर, बहादुरपुर, अकड़रिया, जमखनवा समेत कई गांवों के किसानों के लिए राहत की खबर है। गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर और जलभराव से इस बार भी कई किसानों की फसलें बर्बाद हो गई हैं। लेकिन इस बार मुआवजा पाने के लिए किसानों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। तहसीलदार शरद सिंह ने किसानों की सुविधा के लिए हरदा कॉलोनी में विशेष कैंप शुरू किया है, जहां प्रभावित किसान अपने जरूरी दस्तावेज जमा कर सीधे मुआवजे के लिए आवेदन कर सकते हैं।
क्यों खास है ये कैंप?
पिछले साल भी गोमती के जलभराव ने हजारों किसानों की धान, उरद और सब्जियों की फसलें पूरी तरह तबाह कर दी थीं। लेकिन तब कई किसानों को मुआवजा नहीं मिल पाया था। इसका कारण था लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया, दस्तावेज़ी देरी और किसानों की बार-बार तहसील के चक्कर लगाने की मजबूरी।
इस बार तहसील प्रशासन ने तय किया है कि कोई भी किसान मुआवजे से वंचित न रहे। इसी वजह से हरदा कॉलोनी में कैंप लगाकर किसानों के आधार कार्ड, बैंक पासबुक, खतौनी और मोबाइल नंबर जैसे जरूरी दस्तावेज मौके पर ही जमा किए जा रहे हैं।
पूरे अगस्त चलेगा कैंप
तहसीलदार शरद सिंह ने बताया कि कैंप सोमवार से शुरू हो चुका है और यह अगस्त महीने भर चलेगा। किसान यहां आकर अपनी फसल बर्बादी की जानकारी और आवेदन एक साथ दे सकते हैं।
इससे न केवल प्रक्रिया आसान होगी बल्कि मुआवजा मिलने में समय भी कम लगेगा। उन्होंने बताया कि कैंप में पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाएगा ताकि किसी भी तरह का भ्रष्टाचार न हो और सरकारी सहायता सीधे किसानों तक पहुंचे।
जो किसान नहीं आ सकते, उनके लिए भी व्यवस्था
हर किसान हरदा कॉलोनी तक नहीं आ सकता, खासकर वे किसान जिनकी जमीनें जलभराव से पूरी तरह घिर चुकी हैं। ऐसे किसानों के लिए राजस्व टीम गठित की गई है। यह टीम गांव-गांव जाकर किसानों से सीधे संपर्क करेगी, उनके दस्तावेज लेगी और मुआवजे की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
इस तरह कोई भी प्रभावित किसान छूटने न पाए, यही प्रशासन का मकसद है।
किसानों को मिलेगी राहत
कई बार किसानों को फसल नुकसान के बाद मुआवजा पाने में महीनों लग जाते हैं। इस बीच उन्हें आर्थिक तंगी, कर्ज चुकाने का दबाव और अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इस पहल से अब किसानों को उम्मीद है कि मुआवजा जल्दी और बिना किसी परेशानी के मिल जाएगा।
किसानों की प्रतिक्रिया
गांव जमखनवा के किसान रामप्रसाद ने बताया –
“पिछली बार पानी में हमारी पूरी धान की फसल चली गई थी, लेकिन मुआवजा पाने में लगभग छह महीने लग गए। इस बार अगर तहसीलदार जी का ये कैंप है तो हम सीधे आवेदन कर देंगे और उम्मीद है कि समय पर पैसा मिल जाएगा।”
वहीं, लासा गांव के किसान हरीश यादव ने कहा –
“हमारे लिए यह बहुत बड़ी राहत है। तहसील तक बार-बार जाना बहुत मुश्किल होता है। अब गांव के पास ही कैंप लग गया है तो आसानी होगी।”
कदम किसानों के हित में
तहसीलदार शरद सिंह का कहना है –
“हमारा मकसद है कि कोई भी किसान मुआवजे से वंचित न रहे। जलभराव जैसी प्राकृतिक आपदा में किसान पहले से ही नुकसान झेल रहा होता है। ऐसे में उसकी मदद करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि मुआवजे की प्रक्रिया को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जाएगा ताकि हर आवेदन की स्थिति स्पष्ट रहे और किसान किसी भी समय अपनी फाइल की स्थिति जान सकें।