लखनऊ। Demand for action against illegal clinic राजधानी लखनऊ के माल विकासखंड क्षेत्र में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे क्लीनिक, नर्सिंग होम और डायग्नोस्टिक सेंटरों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। माल कस्बा निवासी समाजसेवी दीपक गुप्ता उर्फ गुल्लन ने बुधवार को जिलाधिकारी (DM) और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को लिखित शिकायत देकर इन अवैध क्लीनिक और अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
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Demand for action against illegal clinic
(In the Mal area of Lucknow, a social activist has lodged a complaint with the District Magistrate (DM) and Chief Medical Officer (CMO) against illegally operating clinics, nursing homes, and diagnostic centers running without registration. Quack doctors have been accused of putting patients’ lives at risk. Questions have been raised over the role of the Health Department, and an investigation has been ordered.)
दीपक गुप्ता का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से इन अवैध क्लीनिक और अस्पतालों का संचालन हो रहा है। उनके मुताबिक, ब्लॉक माल क्षेत्र में कई झोलाछाप डॉक्टर बिना किसी रजिस्ट्रेशन और योग्यता के क्लीनिक चला रहे हैं और आम जनता के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं।
अवैध अस्पतालों का खेल, मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़
शिकायतकर्ता ने पत्र में लिखा है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के अधिकारियों को इस पूरे मामले की जानकारी है, लेकिन अपने निजी स्वार्थ और मिलभगत के कारण वे शासन-प्रशासन को इसकी सूचना नहीं देते। उन्होंने यह भी कहा कि झोलाछाप डॉक्टर इलाज के नाम पर मरीजों को केवल दवा नहीं बल्कि “मौत” दे रहे हैं।
दीपक गुप्ता का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। नोडल अधिकारियों को भी बचाने की कोशिश की जाती है, जिससे क्षेत्र में अवैध क्लीनिक और नर्सिंग होम बेधड़क चलते रहते हैं।
सिर्फ माल नहीं, पूरे लखनऊ में फैला नेटवर्क
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि सिर्फ माल और मलिहाबाद ही नहीं, बल्कि लखनऊ के सभी आठ विकासखंडों में सैकड़ों अवैध अस्पताल और क्लीनिक खुलेआम चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर जगहों पर झोलाछाप डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, जिनके पास न तो अनुभव है और न ही सही योग्यता।
इन अवैध अस्पतालों की वजह से मरीजों की जान हर रोज खतरे में रहती है। कई बार गलत इलाज और दवाइयों की वजह से मरीजों की हालत बिगड़ जाती है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाता।
स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल
यह मामला स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। समाजसेवी दीपक गुप्ता ने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार इन अवैध अस्पतालों और नर्सिंग होम की शिकायत विभागीय अधिकारियों से की, लेकिन हर बार विभागीय मिलीभगत के चलते कार्रवाई नहीं हुई।
अब उन्होंने सीधे डीएम और सीएमओ को शिकायती पत्र सौंपकर मांग की है कि इन अवैध अस्पतालों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि मरीजों की जिंदगी सुरक्षित रह सके।
जांच के आदेश, कार्रवाई की उम्मीद
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए सीएमओ ने संबंधित अधिकारियों को जांच के आदेश दिए हैं। अब देखना यह होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस बार वास्तव में कार्रवाई करता है या मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा।https://dainikhistory.com/
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अवैध अस्पतालों और क्लीनिकों पर रोक नहीं लगाई गई तो यह आम जनता की सेहत के साथ बहुत बड़ी लापरवाही होगी।