बीकेटी (लखनऊ)। Allegations of selling soil नगर पंचायत बीकेटी के अंतर्गत आने वाले पल्हरी गांव में नाले की सफाई के दौरान निकली मिट्टी को बेचने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि शुक्रवार की रात वार्ड के सभासद की मिलीभगत से मिट्टी को चोरी-छिपे डंपरों में भरकर खनन माफियाओं को बेच दिया गया। वहीं, ईओ नगर पंचायत ने इस मामले की जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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बरसात से पहले नाला सफाई, निकली थी कई डंपर मिट्टी
गांव पल्हरी के पास स्थित अनंत विहार कॉलोनी में बरसात के दिनों में अक्सर जलभराव की समस्या बनी रहती थी। बारिश के समय पानी सड़क पर भर जाता था, जिससे स्थानीय लोग हादसों का शिकार होते थे। इसी समस्या के स्थायी समाधान के लिए नगर पंचायत ने नाले की सफाई का काम कराया। नाले की सफाई के Allegations of selling soil दौरान कई डंपर मिट्टी निकली थी, जिसे किनारे पर डाल दिया गया था। https://dainikhistory.com/
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मिट्टी गांव के बाहर पड़ी थी, लेकिन शुक्रवार की रात अचानक कुछ डंपर आए और जेसीबी की मदद से उस मिट्टी को भरकर ले जाया गया। Allegations of selling soil
सभासद पर मिलीभगत के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि यह मिट्टी मुबारकपुर गांव के खनन माफियाओं को बेची गई। इसमें मनोज चौकीदार, राजकुमार यादव, अभिषेक यादव, सत्यम यादव और सूरज यादव के नाम सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह काम मुबारकपुर के ही एक सभासद प्रेम यादव की मिलीभगत से हुआ। Allegations of selling soil
सूत्रों के मुताबिक, एक डंपर मिट्टी दो हजार रुपये में बेची गई। इस तरह रातभर कई डंपर मिट्टी बिक गई। ग्रामीणों का कहना है कि नाले की सफाई से निकली मिट्टी नगर पंचायत की संपत्ति थी और उसे निजी हित में बेचना पूरी तरह गलत है। Allegations of selling soil
ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना को लेकर पल्हरी गांव और आसपास के लोगों में गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि नाले की सफाई के नाम पर निकली मिट्टी को बेचकर फायदा उठाना जनता और सरकार दोनों के साथ धोखा है। उनका कहना है कि नगर पंचायत की निगरानी में निकली मिट्टी का इस्तेमाल गांव के अन्य विकास कार्यों या भराव में होना चाहिए था, लेकिन इसे व्यक्तिगत लाभ के लिए बेच देना भ्रष्टाचार का मामला है। Allegations of selling soil
ईओ ने कहा- दोषी बख्शे नहीं जाएंगे
नगर पंचायत बीकेटी के ईओ इंद्रभान ने इस पूरे मामले पर गंभीरता दिखाई है। उन्होंने कहा,
“नाले की सफाई से निकली मिट्टी को बेचना गलत है। मामला संज्ञान में आया है, अब इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। अगर जांच में आरोप सही पाए गए, तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
ईओ का यह बयान ग्रामीणों के लिए राहत की बात है, क्योंकि वे लगातार इस मामले की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
बरसात से पहले सफाई जरूरी, लेकिन पारदर्शिता भी हो
बरसात से पहले नाले और नालियों की सफाई बेहद जरूरी होती है, ताकि जलभराव की समस्या से लोगों को राहत मिल सके। लेकिन सफाई के दौरान निकले मलबे या मिट्टी को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। पल्हरी गांव का मामला इस बात का उदाहरण है कि कैसे कुछ लोग सरकारी काम से निकले मलबे को निजी लाभ के लिए बेचकर फायदा उठाते हैं।
स्थानीय लोगों की मांग
गांववालों ने मांग की है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जिन लोगों ने मिट्टी बेचने का काम किया है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नगर पंचायत को सख्त कदम उठाने चाहिए।
पल्हरी गांव का यह मामला सिर्फ मिट्टी बेचने का नहीं है, बल्कि यह जिम्मेदारियों की अनदेखी और भ्रष्टाचार का संकेत है। अगर इस मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हुई और दोषियों को सजा मिली, तो यह आगे के लिए एक बड़ा सबक बन सकता है। वहीं, यह भी जरूरी है कि नगर पंचायत अपने कार्यों में पारदर्शिता रखे, ताकि जनता का भरोसा बना रहे।