मैहर (मध्यप्रदेश) का नाम आते ही सबसे पहले मन में ( Maihar Devi Temple ) मां शारदा देवी के भव्य मंदिर की छवि उभरती है। नवरात्रि पर्व के दौरान यहां का माहौल देखते ही बनता है। इस बार भी शारदीय नवरात्रि की शुरुआत होते ही मां शारदा के दरबार में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ रही है।
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पहले ही दिन सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। बताया जा रहा है कि पहले दिन ही एक लाख से ज्यादा भक्तों ने मां शारदा के दर्शन किए। वहीं, रोजाना करीब 60 से 75 हजार लोग यहां पहुंच रहे हैं और रविवार को यह संख्या डेढ़ से दो लाख तक पहुंच सकती है। ( Maihar Devi Temple )
शहर में गूंजे मां शारदा के जयकारे
नवरात्रि का आगाज होते ही पूरा मैहर भक्तिमय माहौल में डूब चुका है। हर गली, हर चौराहे पर मां के जयकारों की गूंज सुनाई दे रही है। मंदिर के पट खुलते ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। सुबह से रात तक मंदिर परिसर में आस्था और भक्ति का रंग छाया रहा।
श्रद्धालु देश के अलग-अलग हिस्सों से यहां पहुंचकर मां शारदा के चरणों में मत्था टेक रहे हैं और अपनी मनोकामनाएं मांग रहे हैं। मंदिर प्रांगण और आसपास भजन-कीर्तन से वातावरण और भी दिव्य हो उठा है।
भक्तों के लिए खास इंतज़ाम
नवरात्रि मेले के दौरान मंदिर परिसर और शहर में विशेष व्यवस्था की गई है। भक्तों की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा और सुविधा पर खास ध्यान दिया है। ( Maihar Devi Temple )
600 से अधिक पुलिसकर्मी और अधिकारी पूरे क्षेत्र में तैनात हैं।
सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है ताकि सुरक्षा में कोई कमी न रहे।
समाजसेवी संगठन और प्रशासन मिलकर पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा और विश्राम स्थलों की व्यवस्था कर रहे हैं।
भक्तों के लिए प्रसाद और पूजा सामग्री की दुकानें सजी हुई हैं।
प्रशासन का कहना है कि उनकी प्राथमिकता हर श्रद्धालु को सुरक्षित और सुगम दर्शन कराना है।
मैहर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व
मां शारदा देवी का मंदिर त्रिकूट पर्वत की चोटी पर स्थित है, जो समुद्र तल से करीब 600 मीटर ऊंचाई पर है। यह मंदिर मैहर शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर है। ( Maihar Devi Temple )
इस शक्ति पीठ तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 1080 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। हालांकि, यहां रोपवे की भी सुविधा है, जिसके जरिए लोग 170 रुपये का टिकट लेकर आसानी से मंदिर तक पहुंच सकते हैं।
शक्ति पीठ से जुड़ी मान्यताएं
मां शारदा देवी का यह मंदिर देश का एकमात्र शक्ति पीठ है, जहां मां शारदा की पूजा होती है। मान्यता है कि माता सती का हार यहां गिरा था, जिसके बाद यह स्थान शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। ( Maihar Devi Temple )
लोगों का कहना है कि हर रात जब मंदिर के पट बंद कर दिए जाते हैं, तब सुबह दरवाजे खुलने पर देवी प्रतिमा के सामने ताजे फूल चढ़े मिलते हैं। माना जाता है कि यह पूजा रहस्यमयी शक्ति या फिर अमर योद्धा आल्हा-ऊदल द्वारा की जाती है।
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आल्हा-ऊदल की कहानी
कहा जाता है कि मां शारदा देवी आल्हा-ऊदल की कुलदेवी थीं। दोनों वीर योद्धाओं की भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने आल्हा को वरदान दिया था। मान्यता है कि आज भी आल्हा और ऊदल रात में सबसे पहले माता के दर्शन और पूजा करने आते हैं, लेकिन वे किसी को दिखाई नहीं देते। ( Maihar Devi Temple )
नवरात्रि में मां के 9 रूपों की आराधना
नवरात्रि पर्व के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की आराधना की जाती है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा होती है।
इसके बाद क्रमशः मां ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की उपासना होती है।
नवरात्रि महोत्सव के दौरान सुबह-शाम विशेष आरती और श्रृंगार के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना की जाती है।
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भक्तों की आस्था और अनुभव
श्रद्धालुओं का कहना है कि नवरात्रि में मैहर आने का अनुभव अद्भुत होता है। यहां की आध्यात्मिक ऊर्जा और वातावरण ऐसा है कि हर कोई खुद को मां के चरणों में समर्पित कर देता है। ( Maihar Devi Temple )
कई लोग यहां अपनी पारिवारिक समस्याओं का समाधान पाने और मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। वहीं, हजारों श्रद्धालु मां के दर्शन करके अपने जीवन को सफल और धन्य मानते हैं।
मैहर का मां शारदा देवी मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आस्था और मान्यताओं की दृष्टि से भी विशेष स्थान रखता है। नवरात्रि पर्व के दौरान यहां का मेला, भक्तों की भीड़ और प्रशासन की व्यवस्थाएं इसे और भी खास बना देती हैं।
देशभर से लाखों लोग यहां पहुंचकर मां शारदा के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करते हैं। 600 मीटर ऊंचाई पर स्थित इस शक्ति पीठ का हर दर्शन श्रद्धालुओं के लिए जीवनभर की यादगार बन जाता है। ( Maihar Devi Temple )
देवराज दुबे के साथ मैहर से नीलेंद्र दुबे की विशेष रिपोर्ट