रविशंकर सोनी पवई। Ganesh Utsav बुधवार से नगर में शुरू होने वाले दस दिवसीय गणेश उत्सव को लेकर तैयारियों का माहौल पूरे शहर में देखने को मिल रहा है। नगर में स्थापित होने वाली गणेश प्रतिमाओं को लेकर विभिन्न समितियां पहले से ही सक्रिय हो चुकी हैं। पंडालों के लिए स्थान तय करने और सजावट तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है।
वहीं दूसरी ओर, मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। पवई के जाने-माने मूर्तिकार नत्थू लाल कुश्वाहा और बृजेन्द्र दहायत ने बताया कि बड़ी प्रतिमाओं की बुकिंग एक महीने पहले ही हो जाती है। मध्यम और छोटी मूर्तियों को ग्राहक अपनी पसंद के अनुसार चुनते हैं। मूर्तिकार मुख्यतः नगर के तीन प्रमुख स्थानों पर प्रतिमाओं का निर्माण करते हैं।
नगर में छोटी-बड़ी पंडालों और घरों में स्थापित होने वाली प्रतिमाओं की संख्या लगभग तीन सौ के आसपास होती है। इसके अलावा, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी गणेश उत्सव पर प्रतिमाओं की स्थापना की जाती है। यह त्योहार केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और मूर्तिकारों के लिए आय का भी महत्वपूर्ण जरिया है।
मूर्तिकार बताते हैं कि प्रतिमा निर्माण में मिट्टी, रंग और सजावट का विशेष ध्यान रखा जाता है। बड़ी प्रतिमाओं में महीनों की मेहनत और कला समाहित होती है। लोग अपनी पसंद और परंपरा के अनुसार गणेश जी की प्रतिमाएं बनवाते हैं। नगर के विभिन्न पंडालों में बड़े और आकर्षक पंडालों का निर्माण किया जाता है, जो इस त्योहार की शोभा को और बढ़ाते हैं।
इस साल भी नगर में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक समितियों ने पंडालों की व्यवस्था शुरू कर दी है। हर पंडाल में सुरक्षा, साफ-सफाई और सजावट का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और पुलिस भी इन आयोजनों को सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विशेष निगरानी रख रही है।
नगरवासियों में उत्साह का माहौल है। बच्चे और बुजुर्ग सभी गणेशोत्सव के आगमन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। गणेश प्रतिमाओं की पूजा, आरती और सजावट का दृश्य पूरे नगर को भक्तिमय और रंगीन बना देता है।
गणेश उत्सव न केवल धार्मिक महत्त्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सहयोग का भी प्रतीक है। विभिन्न समितियां मिलकर नगर में प्रतिमाओं की स्थापना, पंडाल की सजावट और आयोजन की पूरी व्यवस्था करती हैं। स्थानीय व्यवसायियों और कलाकारों के लिए यह अवसर रोजगार और कला प्रदर्शन का भी महत्वपूर्ण मौका है।
मूर्तिकार नत्थू लाल कुश्वाहा ने बताया कि हर प्रतिमा में भगवान गणेश के भाव, मुस्कान और शांति का संदेश झलकता है। वे कहते हैं कि इस त्योहार की तैयारी और मूर्तियों का निर्माण, हमारी कला और संस्कृति को जीवित रखने का एक तरीका है।
पवई में गणेश उत्सव का आयोजन न केवल धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नगर की सांस्कृतिक पहचान और लोगों की एकजुटता का भी प्रतीक बन चुका है। इस बार भी नगरवासियों को रंग-बिरंगे पंडाल और भव्य गणेश प्रतिमाओं के दर्शन होंगे।
गणेश उत्सव की तैयारियों का उत्साह नगर के हर कोने में देखा जा सकता है। मूर्तिकारों की मेहनत, समितियों की तैयारी और नगरवासियों की श्रद्धा इस त्योहार को विशेष बनाती है। इस दस दिवसीय उत्सव में धार्मिक भक्ति के साथ-साथ सांस्कृतिक और सामाजिक उत्साह भी देखने को मिलेगा।