देश विदेश जनसम्पर्क उत्तरप्रदेश मौसम सक्सेस स्टोरी खेल एजुकेशन कृषि राशिफल धर्म

ग्रामीण परंपरा का अनोखा उत्सव: काजलियो का त्यौहार देवरी-सिलवानी में कल्चर एंड ट्रेडिशन का रंगीन संगम: Kajalio & Bhujariya Festival में दिखा उत्साह और Unity

देवरी क्षेत्र में काजलियो और सिलवानी में भुजरियों का पर्व पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। गांव-गांव में पूजा, शोभायात्रा, ढोल-नगाड़ों और विसर्जन के साथ इन त्योहारों ने भाईचारे, हरियाली और समृद्धि का संदेश दिया। ग्रामीणों और युवाओं की भागीदारी ने परंपरा को जीवित रखा।

On: August 10, 2025 8:09 PM
Follow Us:

सिलवानी से शिवम नामदेव देवरी से दुर्गेश तिवारी की रिपोर्ट देवरी क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने की मिसाल देखने को मिलती है। रक्षाबंधन के दूसरे दिन यहां बड़े ही हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ काजलियो का त्यौहार मनाया जाता है। यह त्योहार न सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकजुटता और पीढ़ियों तक परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश भी देता है।( In Deori and Silwani areas, the festival of Kajliyo and Bhujari was celebrated with great pomp in the traditional manner. With drums, worship and immersion, these festivals gave the message of brotherhood and cultural unity.)

सुबह से ही गांव के प्रतिष्ठित लोग और बुजुर्ग एक जगह एकत्रित होकर “शेरे” का आयोजन करते हैं। यह एक तरह का सामूहिक आयोजन है, जहां से काजलियो को गांव के सम्मानित व्यक्ति के घर ले जाया जाता है। वहां पूरे विधि-विधान के साथ पूजन होता है। इसके बाद काजलियो को गांव के मुख्य मंदिर में ले जाया जाता है, जहां पुजारी विशेष पूजा-पाठ करते हैं।

पूजन के बाद पूरा गांव ढोल-नगाड़ों और बाजों की धुन पर नाचते-गाते हुए मां नर्मदा के घाट की ओर बढ़ता है। यहां काजलियो का विसर्जन किया जाता है। विसर्जन के बाद सभी ग्रामवासी एक-दूसरे को बधाई और शुभकामनाएं देते हैं। यह परंपरा गांव में पीढ़ियों से चली आ रही है और आज भी उसी जोश और आस्था के साथ निभाई जा रही है।

गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि शहरों में जहां त्योहारों का स्वरूप बदल गया है, वहीं गांवों में आज भी त्योहार पूरी पारंपरिक शैली में मनाए जाते हैं। इसका असर युवा पीढ़ी पर भी पड़ता है, जिससे वे अपने संस्कार, संस्कृति और परंपरा को संजोना सीखते हैं। यह त्योहार एक प्रकार से सांस्कृतिक शिक्षा और सामाजिक एकता का प्रतीक है।

हरियाली अमावस्या पर भुजरियों का पर्व: उत्साह, उमंग और भाईचारे का संगम


सिलवानी और आसपास के ग्रामीण व कस्बाई इलाकों में श्रावण मास की हरियाली अमावस्या के अवसर पर रविवार को पारंपरिक लोक उत्सव भुजरियों का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही महिलाएं और युवतियां रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर भुजरियों की टोकरी सिर पर रखकर शोभायात्राओं में शामिल हुईं।

भुजरियां हरियाली, समृद्धि और भाईचारे का प्रतीक मानी जाती है। इस मौके पर नगर में दो स्थानों से चल समारोह निकाले गए। शोभायात्राओं के दौरान रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। महिलाएं भजन गाती हुई, सिर पर सजाई गई भुजरियों की टोकरी लेकर चल रही थीं।

नगर के प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना हुई और पूरे क्षेत्र में शांति व सुख-समृद्धि की कामना की गई। चल समारोह का समापन राम मंदिर से लगकर बहने वाली बेगम नदी के तट पर हुआ, जहां भुजरियों का विसर्जन किया गया। इसके बाद लोग श्रीराम मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे और फिर गले मिलकर भाईचारे और सौहार्द का परिचय दिया।

इस अवसर पर बच्चों ने पारंपरिक खेलों और झूलों का आनंद लिया, वहीं घर-घर में विशेष पकवान बनाए गए। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में माहौल पूरी तरह उत्सवी रंग में रंगा रहा। प्रशासन की ओर से भी सुरक्षा और यातायात की व्यवस्था चाक-चौबंद रही, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ।

भुजरियों का पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और लोक परंपराओं को जीवित रखने का सुंदर उदाहरण है। खासकर युवा वर्ग में इस त्योहार को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिला। नगर के नागरिक और समाजसेवी वर्ग भी सक्रिय रूप से इसमें शामिल हुए और जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचकर उन्हें त्योहार की शुभकामनाएं दीं।

परंपरा और आधुनिकता का संगम
काजलियो और भुजरियों, दोनों ही त्योहार अपने-अपने तरीके से धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। जहां काजलियो का पर्व ग्रामीण इलाकों में पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का प्रतीक है, वहीं भुजरियों का पर्व सामूहिक उत्सव और सामाजिक एकता की मिसाल पेश करता है।

इन आयोजनों में न सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, बल्कि लोगों के बीच भाईचारा, मेल-जोल और एक-दूसरे के प्रति सम्मान की भावना भी प्रबल होती है। ऐसे त्योहार हमें यह याद दिलाते हैं कि बदलते समय में भी हमारी जड़ें और परंपराएं उतनी ही मजबूत हैं, जितनी पीढ़ियों पहले थीं।


[URIS id=5981]

Join WhatsApp

Join Now

- Join Arattai

Join Now

और पढ़ें

Kailash Vijayvargiya Statement

Kailash Vijayvargiya Statement दूषित पानी पीने से 10 लोगों की मौत, एमपी के मंत्री बोले क्या घंटा हो गया- बयान पर विवाद, माफी के बाद भी सवाल बरकरार 2026

World Meditation Day

World Meditation Day विश्व ध्यान दिवस पर पुलिस लाइन पन्ना में तीन दिवसीय ‘तनाव मुक्ति एवं ध्यान’ कार्यक्रम, पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों को मिला मानसिक सुकून

MP News

MP News अजब मध्य प्रदेश की गजब कहानी: निवाड़ी के स्कूलों में बने शौचालयों की पोल खुली, 8 माह 15 दिन की जांच के बाद सामने आई हकीकत

Damoh News

Damoh News: कोदो की रोटी खाने से एक ही परिवार के 14 लोगों की बिगड़ी तबीयत, देर रात जिला अस्पताल में कराया गया भर्ती

ABVP Raisen News

ABVP Raisen News उदयपुरा के रमाकांत सिंह चौहान बने अभाविप के प्रांत कार्यकारिणी सदस्य, कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर

Panna News

Panna News पवई में ब्राह्मण समाज का विरोध, राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर अधिकारी पर कार्रवाई की मांग तेज

error: Content is protected !!