रविशंकर सोनी पवई। Lightning Strike सोमवार की शाम तेज बारिश और बादलों की गड़गड़ाहट के बीच नगर के ऐतिहासिक एवं सिद्ध स्थल हनुमान भाटा में अचानक आकाशीय बिजली गिर गई। इस घटना में हाल ही में बने श्री राधाकृष्ण मंदिर की गुंबद में बड़ा छेद हो गया। साथ ही मंदिर के ऊपर चारों कोनों पर बने छोटे-छोटे मंदिर भी क्षतिग्रस्त हो गए।
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गनीमत रही कि उस समय मंदिर परिसर में कोई मौजूद नहीं था, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह सब भाटेश्वर सरकार की कृपा से ही संभव हुआ कि कोई जनहानि नहीं हुई। Lightning Strike
बिजली गिरने से गुंबद में हुआ छेद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सोमवार शाम करीब 4 बजे अचानक तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली मंदिर की गुंबद पर गिरी। इससे गुंबद के बीचों-बीच बड़ा छेद हो गया। वहीं, चारों कोनों पर बने छोटे मंदिर भी बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए। Lightning Strike
मंदिर से जुड़े लोगों ने बताया कि यह मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है और यहां आए दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। Lightning Strike
मंदिर में नहीं लगा तड़क-चालक
स्थानीय भक्तों और जिम्मेदारों का कहना है कि मंदिर में अभी तक तड़क-चालक (Lightning Arrester) नहीं लगाया गया है। यही वजह रही कि बिजली गिरने से इतनी बड़ी क्षति हुई। Lightning Strike
दरअसल, हनुमान भाटा सिद्ध स्थल लाखों लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां चंदेल कालीन त्रिदेवों का संगम स्थित है। साथ ही कुछ साल पहले नवीन राधाकृष्ण मंदिर का निर्माण कराया गया है, जबकि राम-जानकी मंदिर का निर्माण कार्य अभी जारी है।
मंगलवार और शनिवार को यहां दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। भक्त बड़ी श्रद्धा से चढ़ावा भी चढ़ाते हैं और मंदिर में दान स्वरूप हर माह हजारों रुपये एकत्र होते हैं। यही राशि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था, जैसे तड़क-चालक लगवाने में उपयोग की जा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव हो सके। Lightning Strike
धर्मार्थ शाखा से नहीं जुड़ा हनुमान भाटा
यह भी बड़ी हैरानी की बात है कि इतनी प्रसिद्ध धार्मिक स्थली होने के बावजूद हनुमान भाटा का नाम अभी तक धर्मार्थ शाखा से नहीं जुड़ा है। Lightning Strike
जानकार बताते हैं कि यह स्थल नगर के पश्चिम दिशा में पवई-मोहन्द्रा मार्ग पर स्थित एक विशाल और दुर्गम पहाड़ी पर बसा है। यहां चंदेल कालीन ढोलिया मठ के अलावा श्री हनुमान, भगवान महाकालेश्वर और भगवान नरसिंह की आदमकद प्रतिमाएं विराजमान हैं।
इतिहास और आस्था से जुड़ा यह स्थल हर समय भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करता है, लेकिन फिर भी इसे प्रशासनिक स्तर पर वह पहचान और सुविधा नहीं मिल पाई है जिसकी यह हकदार है। Lightning Strike
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आस्था का केंद्र, सुरक्षा पर सवाल
हनुमान भाटा की पहचान केवल धार्मिक स्थल के रूप में ही नहीं, बल्कि आस्था और ऐतिहासिक धरोहर के रूप में भी है। यहां आने वाले श्रद्धालु मानते हैं कि यह स्थल उनकी मनोकामनाएं पूरी करता है। Lightning Strike
लेकिन आकाशीय बिजली गिरने की घटना ने प्रशासन और मंदिर समिति दोनों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इतने बड़े धार्मिक स्थल पर सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त हैं? Lightning Strike
भक्तों की मांग है कि मंदिरों की सुरक्षा और संरक्षा को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द तड़क-चालक लगाया जाए और हनुमान भाटा को धर्मार्थ शाखा से जोड़ा जाए, ताकि मंदिरों के रख-रखाव और संरक्षण के लिए नियमित फंड उपलब्ध हो सके। Lightning Strike
आकाशीय बिजली गिरने से मंदिर को हुई क्षति निश्चित ही भक्तों के लिए दुखद है, लेकिन यह एक चेतावनी भी है कि धार्मिक स्थलों की सुरक्षा को लेकर अब गंभीर कदम उठाने की जरूरत है। हनुमान भाटा जैसे प्राचीन और आस्था से जुड़े स्थल को संरक्षण मिलना बेहद जरूरी है। Lightning Strike
अगर समय रहते जरूरी इंतजाम किए गए तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सकेगा और यह स्थल यूं ही श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना रहेगा। Lightning Strike