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कमलनाथ के गढ़ में आदिवासी महिला का आरोप—भाजपा मंडल अध्यक्ष ने दी जान से मारने की धमकी, अश्लील इशारों और फोटो खींचने का भी आरोप Alarm bells on women safety

छिंदवाड़ा में भाजपा दमुआ नगर मंडल अध्यक्ष सोनू पाटिल पर आदिवासी महिला को जान से मारने, छेड़छाड़ और गाली-गलौज करने का गंभीर आरोप। पीड़िता ने एसपी से की सुरक्षा की मांग, कांग्रेस ने भी उठाए सवाल।

On: August 12, 2025 4:52 PM
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छिंदवाड़ा, म.प्र. — मध्यप्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। छिंदवाड़ा जिले के दमुआ नगर मंडल भाजपा अध्यक्ष सोनू पाटिल पर एक आदिवासी महिला ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता का कहना है कि सोनू पाटिल न केवल उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करता है, बल्कि गाली-गलौज, छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी भी देता है। मामला पुलिस अधीक्षक (SP) के पास पहुंच चुका है और अब पूरे जिले में इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है।

(Serious allegations of murder, molestation and abuse of a tribal woman against BJP Damua Nagar Mandal President Sonu Patil in Chhindwara. The victim demanded protection from the SP, Congress also raised questions.)

पीड़िता का आरोप: “कभी भी उठा लेंगे, किसी के मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ेंगे”

दमुआ के राखीकोल इलाके में रहने वाली दिव्या उईके नाम की आदिवासी महिला ने अपने लिखित शिकायत पत्र में बेहद गंभीर बातें दर्ज कराईं। उन्होंने बताया कि उनके घर के सामने भाजपा नेता सोनू पाटिल और उसका भाई गोलू पाटिल रहते हैं। ये दोनों आए दिन बिना किसी कारण गाली-गलौज करते हैं और डराने-धमकाने की कोशिश करते हैं।

दिव्या का कहना है—

“जब मैं दुकान पर अकेली होती हूं, सोनू पाटिल गंदे इशारे करता है, मोबाइल से मेरी फोटो खींचता है और कहता है कि मैं भाजपा का अध्यक्ष हूं, मेरी पहुंच बहुत दूर तक है, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

महिला के मुताबिक, कुछ दिन पहले सोनू पाटिल ने मोहल्ले में ही सबके सामने अपशब्द कहे। जब उन्होंने विरोध किया, तो वह घर में घुसकर धक्का-मुक्की करने लगा। इतना ही नहीं, जब पीड़िता रिपोर्ट दर्ज कराने निकली, तो उसे घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया और धमकी दी गई—

“अगर रिपोर्ट करने गई, तो जिंदा नहीं बचेगी।”

भाई पर भी आरोप: गंदे मैसेज और मोबाइल तोड़ना
महिला ने यह भी आरोप लगाया कि सोनू पाटिल का भाई, गोलू पाटिल, उसे व्हाट्सएप पर अश्लील और गंदे संदेश भेजता था। परेशान होकर महिला ने उसे ब्लॉक कर दिया, तो गोलू पाटिल ने उसका मोबाइल छीनकर पटक दिया और नुकसान पहुंचाया।

अकेली महिलाएं, मजदूरी पर गए पति
दिव्या ने अपने आवेदन में लिखा है कि उनके परिवार में सिर्फ तीन महिलाएं हैं। उनके पति मजदूरी करने के लिए नागपुर में रहते हैं। ऐसे में वह और उनका परिवार खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।


पीड़िता ने साफ चेतावनी दी—

“अगर मेरे या मेरे परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सोनू पाटिल और गोलू पाटिल की होगी।”

कांग्रेस का BJP पर हमला: “महिलाओं के साथ अत्याचार आम बात”
इस मामले पर कांग्रेस ने भी भाजपा पर सीधा हमला बोला। छिंदवाड़ा जिला कांग्रेस अध्यक्ष, विश्वनाथ ओक्टे ने कहा—

“भाजपा के शासन में महिलाओं पर अत्याचार आम हो गया है। यह तो छिंदवाड़ा की घटना है, पूरे प्रदेश में गरीब और कमजोर लोगों की कोई सुनवाई नहीं हो रही है। आदिवासी महिलाओं के साथ मजाक बन गया है। आए दिन भाजपा के लोग ऐसी घटनाओं में शामिल पाए जाते हैं। कानून व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है।”

BJP जिला अध्यक्ष की सफाई: “अगर दोषी है, तो कार्रवाई होगी”
मामले में भाजपा छिंदवाड़ा जिला अध्यक्ष, शेषराव यादव ने कहा—

“अभी इस तरह का मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। अगर ऐसा कुछ हुआ है और तथ्य सामने आते हैं, तो भाजपा किसी भी गलत व्यक्ति का सहयोग नहीं करेगी। दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।”

महिला सुरक्षा पर सवाल
यह घटना केवल एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि महिला सुरक्षा की स्थिति पर भी सवाल खड़ा करती है। जब एक आदिवासी महिला, जो खुद और अपने परिवार के लिए मेहनत करके दुकान चलाती है, इस तरह खुलेआम धमकी और छेड़छाड़ का शिकार होती है, तो यह सोचने पर मजबूर करता है कि छोटे कस्बों और गांवों में महिलाएं कितनी असुरक्षित हैं।

पुलिस की भूमिका पर भी निगाहें
पीड़िता ने शिकायत SP को दी है और पुलिस से सुरक्षा की मांग की है। अब देखना यह है कि पुलिस कितनी तेजी और मजबूती से कार्रवाई करती है। ऐसे मामलों में लापरवाही न केवल पीड़ित को और खतरे में डाल सकती है, बल्कि अपराधियों के हौसले भी बढ़ा सकती है।

सामाजिक दृष्टिकोण: डर का माहौल
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब राजनीतिक पद पर बैठे लोग इस तरह के आरोपों में घिरते हैं, तो आम लोग शिकायत करने से भी डरते हैं। इससे अपराधियों के हौसले और बढ़ते हैं, और पीड़ित महिलाएं न्याय से दूर होती जाती हैं।

महिला सुरक्षा कानून और जरूरत
कानूनी तौर पर भारत में महिलाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार के उत्पीड़न, छेड़छाड़ और धमकी के खिलाफ सख्त कानून हैं। लेकिन जब आरोपी राजनीतिक रसूखदार हो, तो अक्सर पीड़ित महिलाओं को इंसाफ पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है। इस केस में भी पीड़िता ने साफ कहा है कि आरोपी अपने राजनीतिक पद का गलत इस्तेमाल कर रहा है।


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