कांकेर। साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए कांकेर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी साइबर फ्रॉड से जुड़े 90 लाख रुपये को अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने में शामिल थे। पुलिस की टीम ने दोनों को पकड़कर न्यायालय में पेश किया है और मामले की जांच तेज कर दी गई है।
आरोपियों की पहचान अमन पासवान पिता श्रीराम पासवान, उम्र 30 वर्ष, निवासी पंखाजुर थाना पंखाजुर।
सुजित मजुमदार पिता सुधीर मजुमदार, उम्र 38 वर्ष, निवासी गढ़चिरौली, थाना गढ़चिरौली (महाराष्ट्र)।
मामला कैसे खुला?
दरअसल, पुलिस मुख्यालय को गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध पोर्टल से जानकारी मिली थी कि कुछ बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी के लिए किया जा रहा है। इस सूची में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, कांकेर शाखा का खाता नंबर 10181380466 भी शामिल था।
जांच में सामने आया कि इस खाते में धोखाधड़ी से हासिल रकम जमा की जा रही थी और फिर उसे आगे अन्य खातों में ट्रांसफर किया जा रहा था। आरोपी यह जानते हुए भी कि पैसा गलत तरीके से कमाया गया है, खाते का इस्तेमाल कर रहे थे। यह साफ तौर पर साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में संलिप्तता को दर्शाता है।
अपराध दर्ज और कानूनी कार्रवाई
साक्ष्य मिलने के बाद थाना कांकेर में अपराध क्रमांक 305/2025 दर्ज किया गया। आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 317(2), 317(4), 317(5), 318(4), 111 के तहत मामला पंजीबद्ध किया गया।
पुलिस अधीक्षक आई.के. एलिसेला (भा.पु.से.) के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिन्हा, आकाश श्रीमाल और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस मोहसीन खान के मार्गदर्शन में विशेष टीम बनाई गई। इसी टीम ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
जांच में जुटी पुलिस
कांकेर पुलिस अब इस मामले से जुड़े अन्य म्युल अकाउंट्स की जांच कर रही है। जिन-जिन खातों में पैसा ट्रांसफर किया गया है, उन्हें खंगाला जा रहा है और जरूरत पड़ने पर फ्रीज भी कराया जाएगा।
पुलिस टीम की अहम भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी कांकेर निरीक्षक मनीष नागर की अगुवाई में उप निरीक्षक मनोरथ जोशी, प्रधान आरक्षक सुरेश भुआर्य, आरक्षक शक्ति सिंह और कांकेर पेट्रोलिंग पार्टी का अहम योगदान रहा।
बढ़ते साइबर अपराध और सतर्कता की जरूरत
आजकल साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग फोन कॉल, मैसेज या ऑनलाइन लिंक के जरिए ठगे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी अनजान कॉल पर बैंक डिटेल या ओटीपी शेयर न करें। पुलिस भी लगातार आम लोगों को जागरूक कर रही है कि संदेहास्पद लेन-देन या मैसेज की तुरंत रिपोर्ट करें।
कांकेर पुलिस की इस कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि साइबर अपराध में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए जांच में जुटी है।