प्रदीप कुमार दुर्ग (छत्तीसगढ़)। Cyber Attack छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय एक बार फिर से साइबर हमले का शिकार हुआ है। सोमवार, 8 सितंबर 2025 को विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट हैक कर ली गई। इस बार भी वेबसाइट पर पाकिस्तान समर्थित नारे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक संदेश और भारत का मजाक उड़ाने वाले पोस्टर डाल दिए गए। चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले तीन महीनों में यह तीसरी बार है जब यूनिवर्सिटी की वेबसाइट को हैक किया गया है।
Table of Contents
तीसरी बार हैक हुई वेबसाइट
जानकारी के मुताबिक, 7 जुलाई और 7 सितंबर को भी इसी तरह की हैकिंग की घटनाएं हो चुकी हैं। उस समय भी प्रशासन ने वेबसाइट की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे किए थे और साइबर ऑडिट कराने का भरोसा दिलाया था, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। बार-बार हैकिंग की घटनाएं होने से साफ है कि वेबसाइट की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है और इसका खामियाजा सीधे छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। Cyber Attack
छात्रों के सामने बड़ी परेशानी
विश्वविद्यालय की वेबसाइट छात्रों के लिए बेहद अहम है क्योंकि यहीं से उन्हें परीक्षा परिणाम, प्रवेश प्रक्रिया और कई अन्य शैक्षणिक जानकारी मिलती है। लेकिन बार-बार वेबसाइट ठप होने से छात्रों की पढ़ाई और करियर पर असर पड़ रहा है। Cyber Attack
जब छात्रों ने वेबसाइट खोली तो वहां ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे और मोदी विरोधी संदेश देखकर हैरान रह गए। कई छात्रों ने इसका स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। कुछ ही देर में यह मामला पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया।
प्रशासन को भनक तक नहीं लगी
सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि जब वेबसाइट हैक हुई तब विश्वविद्यालय प्रशासन और वेबसाइट संभालने वाली निजी एजेंसी को इसकी कोई जानकारी तक नहीं थी। छात्रों के सोशल मीडिया पर हंगामा मचाने के बाद ही अधिकारियों को इसकी खबर लगी। इस लापरवाही ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली और निजी एजेंसी की क्षमता दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Cyber Attack
सिर्फ 3-4 मिनट में हैक, 10 मिनट में रिकवर
विश्वविद्यालय के कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप ने बताया कि वेबसाइट करीब 3 से 4 मिनट के लिए हैक हुई थी, लेकिन 10 मिनट में उसे रिकवर कर लिया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी पुलिस थाने, इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) और साइबर सेल को भी दे दी गई है। उनका दावा है कि वेबसाइट का सारा डाटा सुरक्षित है और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा इंतजामों को मजबूत किया जा रहा है। Cyber Attack Cyber Attack Cyber Attack Cyber Attack
सवालों के घेरे में निजी एजेंसी
विश्वविद्यालय की वेबसाइट का रखरखाव एक निजी एजेंसी करती है। लेकिन बार-बार हो रही हैकिंग की घटनाओं से साफ है कि एजेंसी अपनी जिम्मेदारी सही से नहीं निभा पा रही है। जुलाई और सितंबर में हुए हमलों के बाद भी यदि सुरक्षा इंतजाम नहीं सुधारे गए तो यह भविष्य में और बड़े खतरे का कारण बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए वेबसाइट बेहद संवेदनशील प्लेटफॉर्म होता है, जिसे साइबर हमलों से बचाने के लिए मजबूत सिक्योरिटी प्रोटोकॉल होना जरूरी है। Cyber Attack
पाकिस्तानी हैकर्स का दखल
इस बार की हैकिंग की जिम्मेदारी पाकिस्तानी हैकरों ने खुद ली है। इससे साफ जाहिर होता है कि यह हमला सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि साइबर वार का हिस्सा है। पाकिस्तान समर्थित हैकर ग्रुप अक्सर भारतीय वेबसाइट्स को निशाना बनाते रहे हैं ताकि साइबर जगत में भारत की छवि को नुकसान पहुंचाया जा सके। हालांकि, ऐसे हमलों को रोकने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाएं सुरक्षा खामियों को उजागर करती हैं। Cyber Attack
- छात्र बोले- कब सुधरेगी स्थिति?
वेबसाइट हैक होने से सबसे ज्यादा परेशानी छात्रों को ही हो रही है। कई छात्र सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि परीक्षा परिणाम और एडमिशन प्रोसेस जैसी महत्वपूर्ण जानकारी वेबसाइट पर निर्भर होती है, लेकिन बार-बार हैकिंग की वजह से उनका भविष्य अधर में लटक जाता है। छात्रों का कहना है कि जब भी वेबसाइट हैक होती है, तब उन्हें परिणाम देखने या एडमिशन फॉर्म भरने में भारी दिक्कत आती है।
साइबर सुरक्षा को लेकर सवाल
यह घटना छत्तीसगढ़ की साइबर सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब एक राज्य स्तरीय विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट इतनी आसानी से हैक हो सकती है तो बाकी सरकारी और शैक्षणिक वेबसाइट्स की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ना लाजमी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है जब विश्वविद्यालय और सरकारी विभाग अपनी साइबर सुरक्षा को प्राथमिकता दें और ठोस कदम उठाएं। Cyber Attack
भविष्य में क्या कदम उठाने होंगे?
- निजी एजेंसी पर सख्त कार्रवाई – विश्वविद्यालय प्रशासन को उस एजेंसी पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जो वेबसाइट का रखरखाव कर रही है।
- साइबर ऑडिट जरूरी – बार-बार हैकिंग की घटनाओं को रोकने के लिए वेबसाइट का साइबर ऑडिट तुरंत होना चाहिए।
- टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और फायरवॉल – वेबसाइट को सुरक्षित रखने के लिए उन्नत तकनीक का इस्तेमाल करना होगा।
- छात्रों को वैकल्पिक प्लेटफॉर्म – जब तक वेबसाइट पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाती, तब तक छात्रों को रिजल्ट और एडमिशन की जानकारी वैकल्पिक माध्यम से उपलब्ध कराना जरूरी है।
https://twitter.com/DainikHistory?t=un2EfdiIG8L5BD8EkPp2qg&s=08