अम्बिकापुर स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सरगुजा जिला एक बार फिर उदाहरण पेश कर रहा है। ठोस और प्लास्टिक कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए अंबिकापुर ब्लॉक के ग्राम पंचायत दरिमा में प्रदेश का दूसरा और सरगुजा संभाग का पहला जिला स्तरीय प्लास्टिक प्रोसेसिंग यूनिट (एम.आर.एफ.) शुरू किया गया है।
इस यूनिट का शुभारंभ लूण्ड्रा विधायक प्रबोध मिंज ने किया। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती निरूपा सिंह, उपाध्यक्ष देवनारायण यादव, जनपद सदस्य, स्थानीय प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
उद्घाटन के अवसर पर विधायक प्रबोध मिंज ने कहा कि सरगुजा जिला आज पूरे प्रदेश के लिए रोल मॉडल बन रहा है। यह प्रोसेसिंग सेंटर सिर्फ प्लास्टिक कचरे को सही तरीके से निपटाने का काम नहीं करेगा, बल्कि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देगा।
उन्होंने कहा – “यह केंद्र पर्यावरण संरक्षण के साथ ही महिलाओं की आत्मनिर्भरता और रोजगार बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। यहां से जुड़ी महिलाएं कचरे से कमाई कर परिवार को आर्थिक सहारा देंगी।”
569 ग्राम पंचायतों की 2500 दीदीयों को फायदा
जिला पंचायत अध्यक्ष निरूपा सिंह ने कहा कि प्लास्टिक आज गांव और शहर दोनों के लिए सबसे बड़ी समस्या है। यह न सड़ता है, न गलता है और लंबे समय तक प्रदूषण फैलाता है। इस यूनिट के जरिए जिले की 569 ग्राम पंचायतों से जुड़े करीब 2500 स्वच्छाग्राही दीदीयों को कचरे की बिक्री से सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा।
साथ ही, प्लांट में काम करने वाली 30-35 महिलाओं को हर महीने 7500 रुपये मानदेय पर रोजगार का अवसर मिलेगा।
जिला पंचायत सीईओ विनय कुमार अग्रवाल ने बताया कि प्लास्टिक प्रदूषण आज वैश्विक चुनौती बन चुका है। ऐसे में यह पहल प्रधानमंत्री के “स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत” के सपने को पूरा करने में बड़ी मदद करेगी।
उन्होंने कहा कि इस एम.आर.एफ. यूनिट से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिलेगी।
प्लास्टिक से बनेगी रस्सी, बाल्टी और डस्टबिन
यूनिट से जिले के सभी 569 सेग्रीगेशन शेड और 7 प्लास्टिक मैनेजमेंट सेंटर जुड़े हुए हैं। यहां गांव-गांव से कचरा लाकर प्रोसेस किया जाएगा।
फिलहाल प्लास्टिक के दानों से रस्सी बनाने का काम शुरू हो चुका है। आने वाले समय में प्लास्टिक की बाल्टी, डस्टबिन और अन्य घरेलू सामान भी इसी सेंटर से तैयार किए जाएंगे।
क्लस्टर आधारित जिम्मेदारी और मॉनिटरिंग
जिले में काम सुचारू रूप से चल सके, इसके लिए 10-12 गांवों को मिलाकर क्लस्टर बनाया गया है। इन क्लस्टरों की जिम्मेदारी पंचायत, जनपद और जिला स्तर की टीमों को सौंपी गई है। साथ ही, लगातार निगरानी और फॉलोअप की व्यवस्था भी की गई है, ताकि काम की गुणवत्ता बनी रहे और महिलाओं को समय पर लाभ मिल सके।
सरगुजा बना रोल मॉडल
यह पहल न सिर्फ प्लास्टिक कचरे के प्रबंधन में सरगुजा को आगे ले जा रही है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का भी बेहतरीन उदाहरण है। साफ है कि यह केंद्र जिले की महिलाओं के लिए रोजगार का नया द्वार खोलने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होगा।