जितेंद्र साहू धमतरी Rishi Panchami 2025 आयोजन में बड़ी संख्या में लोग जुटे। आदिवासी समुदाय के स्वास्थ्य परंपरा विशेषज्ञ और औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने बताया कि छत्तीसगढ़ वन औषधियों का राज्य है। उन्होंने कहा, “यहाँ की जल, जंगल और जमीन ने ऋषि-मुनियों को जीवन जीने का आधार दिया। उन्होंने वनौषधियों से जीवन यापन किया और उपचार किया। यही कारण है कि इसे ‘छत्तीसगढ़ महतारी’ कहा जाता है।”
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जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने भी इस अवसर पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्राचीन समय में ऋषि-मुनि अपनी औषधियों से ही बड़ी बीमारियों का इलाज करते थे और आज भी ये पारंपरिक पद्धतियाँ असरदार हैं। उन्होंने सभी से कहा कि हमें अपनी विरासत और पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली पर गर्व होना चाहिए।
इस आयोजन में कई गणमान्य लोग शामिल हुए। सिहावा विधायक श्रीमती अंबिका मरकाम, उपाध्यक्ष गौकरण साहू, वन सभापति एवं जिला पंचायत सदस्य अजय ध्रुव, नगरी नगर पंचायत अध्यक्ष महेश गोटा, सिरसिदा के सरपंच नरसिंग मरकाम, प्रदेश वैद्यराज संघ से दशरथ नेताम, भीमा कोटेश्वर समिति अध्यक्ष मुकेश बघेल, मंदिर के पुजारी सत्यनारायण बाबा और भाजपा युवा नेता हनी कश्यप समेत अन्य गणमान्य नागरिक मौजूद थे। Rishi Panchami 2025
आयोजन की खास बातें
इस विशेष आयोजन में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान और औषधीय पौधों के महत्व पर जोर दिया गया। उपस्थित ग्रामीणों को वन औषधियों, उनकी पहचान और उपयोग के तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों और युवाओं को भी यह समझाया गया कि हमारी पारंपरिक चिकित्सा पद्धति कितनी प्राचीन और प्रभावशाली है।Rishi Panchami 2025
आयोजन के दौरान स्थानीय संस्कृति और रीति-रिवाजों का भी महत्व रखा गया। पारंपरिक गीत, भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने इस आयोजन को और भी जीवंत बना दिया। ग्रामीणजन उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग ले रहे थे और पुरानी परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास किया गया।Rishi Panchami 2025
विकास मरकाम ने वन औषधियों के संरक्षण पर भी जोर दिया और कहा कि हमारी आने वाली पीढ़ी को इन प्राकृतिक संसाधनों की महत्ता समझनी होगी। उन्होंने बताया कि आज के समय में जैविक औषधियों और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की मांग बढ़ रही है और यह हमारी सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। Rishi Panchami 2025
जिला पंचायत अध्यक्ष अरुण सार्वा ने इस बात पर भी बल दिया कि पारंपरिक चिकित्सा केवल बीमारियों का इलाज ही नहीं है, बल्कि यह जीवन शैली और स्वास्थ्य के प्राकृतिक तरीके को भी दर्शाती है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपनी स्थानीय परंपरा और ज्ञान को न भूलें और इसे संरक्षित करें। Rishi Panchami 2025
मंदिर के पुजारी श्री सत्यनारायण बाबा ने भी उपस्थित लोगों को ऋषि पंचमी के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि इस दिन ऋषि-मुनियों की पूजा और सम्मान करना जरूरी है, क्योंकि उन्होंने मानव जीवन के लिए ज्ञान और औषधियों का अनमोल खजाना छोड़ा है।Rishi Panchami 2025
स्थानीय समुदाय की भागीदारी
कार्यक्रम में ग्रामीणजन भी उत्साहपूर्वक शामिल हुए। उन्होंने पूजा-अर्चना में सहयोग किया और पारंपरिक ज्ञान साझा किया। बच्चों और युवाओं ने भी इस आयोजन में सक्रिय भागीदारी दिखाई। इसके साथ ही स्थानीय कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं, जिससे आयोजन और भी जीवंत और आकर्षक बन गया।Rishi Panchami 2025
इस तरह, ऋषि पंचमी का यह पर्व धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ स्थानीय पारंपरिक चिकित्सा और वन औषधियों के ज्ञान को फैलाने का माध्यम भी बना। आयोजन में उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों की सहभागिता ने इसे सफल और यादगार बना दिया।
आज का यह आयोजन केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं था, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को संरक्षित करने का प्रतीक भी था। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी और विशेषज्ञों के विचारों ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया।https://dainikhistory.com/