शिक्षा सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व, सोच और सामाजिक कौशल के विकास का भी जरिया है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए पैराडाइज सी.बी.एस.ई. हायर सेकेंडरी स्कूल में 5 अगस्त 2025 को शिक्षक-पालक-बालक सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस खास मौके पर नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा तक के छात्र-छात्राएं अपने अभिभावकों के साथ स्कूल पहुंचे। यहां उन्होंने अपने पीरियॉडिक टेस्ट के नतीजे, विभिन्न विषयों में प्रगति और भाषाई कौशल, गणित, विज्ञान तथा व्यक्तित्व विकास के पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
बच्चों की प्रगति पर शिक्षकों से आमने-सामने बात
सम्मेलन में हर विषय के शिक्षक ने अपने-अपने विषय में छात्रों की प्रगति के बारे में जानकारी दी। न सिर्फ पढ़ाई, बल्कि शारीरिक शिक्षा, नैतिक शिक्षा, संगीत, नृत्य और कला में बच्चों की रुचि और प्रदर्शन पर भी बात हुई। इससे अभिभावकों को अपने बच्चों की क्षमताओं और सुधार के क्षेत्रों की स्पष्ट तस्वीर मिली।
सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, व्यक्तित्व विकास पर भी जोर
पैराडाइज स्कूल की खासियत है कि यहां शिक्षा का मतलब केवल किताबों का ज्ञान नहीं, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास है। स्कूल में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ आउटडोर और इनडोर गेम्स, मार्शल आर्ट, क्लासिकल और वेस्टर्न म्यूजिक, नृत्य, आर्ट एंड क्राफ्ट, नैतिक शिक्षा और यूथ इम्पावरमेंट क्लासेस दी जाती हैं।
इन गतिविधियों का उद्देश्य है कि बच्चे न केवल अकादमिक रूप से मजबूत हों, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से भी संपन्न हों।
जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष कक्षाएं
सम्मेलन में यह भी तय हुआ कि जिन बच्चों को अतिरिक्त ध्यान, रेमिडियल क्लास या काउंसलिंग की जरूरत है, उनके लिए स्कूल आने वाले दिनों में विशेष कक्षाएं आयोजित करेगा। इससे वे अपने पाठ्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे और अच्छे परिणाम हासिल कर पाएंगे।
अभिभावकों की खुशी और गर्व
कार्यक्रम के अंत में अधिकतर अभिभावकों ने स्कूल की पढ़ाई, प्रशिक्षण और बच्चों की प्रगति पर संतोष जताया। वे अपने बच्चों की उपलब्धियों से प्रसन्न और गौरवान्वित नजर आए।
एक अभिभावक ने कहा – “पैराडाइज स्कूल न केवल पढ़ाई पर ध्यान देता है, बल्कि बच्चों को जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए तैयार करता है।”
शिक्षकों का योगदान
इस आयोजन को सफल बनाने में प्राचार्य रश्मि रजक और एकेडमिक हेड सुनील कुमार पंडा के साथ-साथ वरिष्ठ शिक्षकों का अहम योगदान रहा। इनमें प्रीति झा, रूबी खान, पवित्र बराई, दीपांजली गोगोई, वर्षा रामानी, अवतार सिंह, मेघा सेवा, एस. मर्सी, तीरथ साहू, कृष्णापद कुंभकार, भारती सेठिया, अनिल कुमार ढाके, संगीता भारती, सरिता मिश्रा, शांतिलीना नेताम, रचना शर्मा, लक्ष्मीनारायण नामदेव, अपूर्वा ठाकुर, रामेश्वरी साहू, उज्जवल निर्मलकर, सुकदेव सरकार, पार्वती गजबल्ला, ऐश्वर्या साहू, पेंकटेश पटेल, रिंकी सेठी, अभिनव सिंह, यमुना बेलोधिया, टाकेश्वर साहू, आसीस उथानसिंह, ग्लोरिया रजक, तारा चंदेल, शलेम कुमार राम, एंजल इलियास, निशा जयसवाल, मनीषा साहू, नंदनी साहू, पूजा खरे और अंजू बारले शामिल हैं।