प्रदीप कुमार भिलाई दुर्ग। जन्माष्टमी का पर्व इस बार दुर्ग जिले में खास रंग-रूप के साथ मनाया जा रहा है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिल रहा है। खासकर भिलाई के सेक्टर-6 स्थित अक्षय पात्र मंदिर में इस बार आयोजन को और भी भव्य रूप दिया गया है।
मंदिर प्रबंधन ने पहली बार मथुरा-वृंदावन के कलाकारों को बुलाया है, जो भगवान श्रीकृष्ण का श्रृंगार करेंगे। इससे श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव होगा मानो वे सीधे वृंदावन में ही कृष्ण भक्ति का आनंद ले रहे हों।
बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर सजावट
अक्षय पात्र मंदिर को इस बार बांके बिहारी मंदिर की तर्ज पर सजाया गया है। लगभग 5 लाख रुपये की लागत से मंदिर की भव्य सजावट की गई है। इसके लिए फूल मथुरा, कोलकाता, मदुराई और नागपुर से विशेष रूप से मंगवाए गए हैं। मंदिर की सुंदरता और दिव्य वातावरण देखने के लिए भक्तों की भीड़ लगातार उमड़ रही है।
पिछले वर्ष जहां करीब 50 हजार श्रद्धालुओं ने यहां दर्शन किए थे, वहीं इस बार 70 हजार से अधिक लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है।
15 साल से लगातार हो रहा आयोजन
हरे कृष्ण मूवमेंट के अध्यक्ष व्योमपद दास ने बताया कि भिलाई में यह आयोजन लगातार 15वें वर्ष किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए इस बार व्यापक तैयारियां की गई हैं।
दिनभर होंगे धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
जन्माष्टमी के अवसर पर पूरे दिन धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। सुबह 4:30 बजे से मंगल आरती के साथ उत्सव की शुरुआत होगी। इसके बाद दिनभर भक्ति गीत, झांकियां और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे।
शाम 8:15 से 9:30 बजे तक अगम अग्रवाल और उनके समूह द्वारा भजन संध्या का आयोजन होगा। इस दौरान भक्त कृष्ण भक्ति के रस में डूब जाएंगे।
आधी रात को महा अभिषेक और आरती
जन्माष्टमी की रात 10 बजे से भगवान श्रीकृष्ण का विशेष महा अभिषेक किया जाएगा। ठीक मध्यरात्रि 12 बजे महा आरती होगी, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे। आरती के बाद भक्तों को महाप्रसाद वितरित किया जाएगा।
इस बार आयोजन की खास बात यह है कि नंदलाल का अर्चन 1008 कमल पुष्पों से किया जाएगा।
विशेष क्षण का गवाह बनेगा दुर्ग-भिलाई
आयोजन समिति के अनुसार, रात 11 बजकर 55 मिनट पर भगवान के पट बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद ठीक 12 बजकर 5 मिनट पर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को गर्भगृह से बाहर लाया जाएगा। यह क्षण भक्तों के लिए सबसे खास होगा और हजारों लोग इस दिव्य पल के साक्षी बनेंगे।
अक्षय पात्र मंदिर में होने वाला यह आयोजन केवल दुर्ग-भिलाई ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों के श्रद्धालुओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। हर कोई यहां आकर कृष्ण जन्मोत्सव का आनंद लेने और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उत्सुक है।