डिकेश शर्मा दुर्गुकोंदल। विकासखंड दुर्गुकोंदल में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर युवाओं और ग्रामीणों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। मंगलवार को बड़ी संख्या में युवा और ग्रामीण सड़क पर उतर आए और खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) कार्यालय का घेराव करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद तहसीलदार को चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर साफ कहा कि अगर 30 सितंबर तक कार्रवाई नहीं हुई, तो मुख्य चौक दुर्गुकोंदल में चक्काजाम कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
युवाओं ने भवन मरम्मत कार्य पर उठाए सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि हाल ही में स्कूल भवनों की मरम्मत में भारी गड़बड़ियां हुई हैं। मरम्मत के नाम पर घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और कार्यों को अधूरा छोड़ दिया गया। प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने आरोप लगाया कि इस पूरे खेल में ठेकेदारों के साथ-साथ कुछ अधिकारी और इंजीनियर भी शामिल हैं, जिनकी मिलीभगत से लाखों रुपये का बंदरबांट हुआ है।
चार सूत्रीय मांगों के साथ सौंपा ज्ञापन
तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में युवाओं और ग्रामीणों ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं:
खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को तत्काल हटाया जाए ताकि जांच निष्पक्ष हो सके।
स्कूल भवन मरम्मत कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सभी गड़बड़ियों को सामने लाया जाए।
भवन मरम्मत में दोषी पाए जाने वाले ठेकेदार, अधिकारी और इंजीनियरों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए।
विकासखंड में अब तक हुए सभी निर्माण कार्यों की जांच कराई जाए।
30 सितंबर तक कार्रवाई नहीं तो उग्र आंदोलन
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि 30 सितंबर तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वे मुख्य चौक दुर्गुकोंदल में चक्काजाम करेंगे। ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, अगर प्रशासन ने अनदेखी की तो बड़ा आंदोलन खड़ा होगा।
बीईओ कार्यालय का घेराव, रैली निकाली
इस दौरान युवाओं ने रैली निकालकर जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के बजाय अफसर और ठेकेदार भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। बीईओ कार्यालय का घेराव कर विरोध जताने वाले युवाओं ने साफ कहा कि वे किसी भी कीमत पर गड़बड़ियों को दबने नहीं देंगे।
ग्रामीणों का दर्द: बच्चों की पढ़ाई पर असर
ग्रामीणों ने बताया कि खराब निर्माण और मरम्मत कार्यों की वजह से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई स्कूल भवनों की हालत अभी भी जर्जर है, जहां बच्चे रोजाना खतरे के बीच पढ़ाई करने को मजबूर हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ है।
प्रशासन पर सवाल
युवाओं ने प्रशासन पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी गड़बड़ी संभव ही नहीं है। उन्होंने मांग की कि इस मामले की जांच उच्चस्तरीय टीम से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
आंदोलन की चेतावनी से बढ़ी हलचल
ग्रामीणों और युवाओं की इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या प्रशासन 30 सितंबर से पहले कार्रवाई करेगा या फिर दुर्गुकोंदल में बड़ा आंदोलन खड़ा होगा।