जितेंद्र साहू, four children became orphans रायपुर छत्तीसगढ़ सूरजपुर जिले के भैयाथान इलाके से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहां बसकर गांव में जहरीले सांप के काटने से पति-पत्नी की मौत हो गई। घटना इतनी हृदय विदारक है कि पूरे गांव में मातम पसर गया है।
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जानकारी के मुताबिक, दंपत्ति अपने घर में जमीन पर सो रहे थे। इसी दौरान रात को अचानक एक जहरीले सांप ने उन्हें डस लिया। परिजनों ने देखा तो दंपत्ति की हालत बिगड़ती जा रही थी। लेकिन अफसोस की बात यह रही कि सही समय पर अस्पताल ले जाने की बजाय परिजन अंधविश्वास में फंस गए और झाड़फूंक कराने लगे। four children became orphans
देर हो गई इलाज में, नहीं बच पाई जान
परिजनों ने कई घंटों तक झाड़फूंक में समय बर्बाद कर दिया। हालत ज्यादा बिगड़ने पर जब दोनों को अस्पताल ले जाया गया तो तब तक काफी देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन पत्नी ने भैयाथान अस्पताल में दम तोड़ दिया और पति को जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी भी मौत हो गई। four children became orphans
चार मासूम बच्चे हुए अनाथ
इस हादसे ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया। दंपत्ति के चार छोटे-छोटे बच्चे अब अनाथ हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के भविष्य को लेकर वे बेहद चिंतित हैं। गांव में शोक और गम का माहौल है। हर किसी की जुबान पर बस यही सवाल है कि अगर समय रहते सही इलाज मिल जाता तो शायद दंपत्ति की जान बचाई जा सकती थी। four children became orphans
अंधविश्वास बना जानलेवा
विशेषज्ञों और स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि यह घटना अंधविश्वास और लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सर्पदंश जैसी घटनाओं को गंभीरता से नहीं लेते और झाड़फूंक पर भरोसा करते हैं। जबकि मेडिकल साइंस में सर्पदंश का तत्काल इलाज उपलब्ध है। अगर सही समय पर एंटी-स्नेक वेनम इंजेक्शन लगाया जाए तो मरीज की जान बचाई जा सकती है।https://dainikhistory.com/
ग्रामीणों में डर और जागरूकता की कमी
गांववालों का कहना है कि वे अक्सर खेतों और घर के आसपास सांप देख लेते हैं, लेकिन इसके बावजूद सर्पदंश से बचाव को लेकर लोग सावधानी नहीं बरतते। विशेषज्ञों का कहना है कि बरसात के मौसम में ऐसे मामले ज्यादा सामने आते हैं। इस दौरान लोगों को घर में सोते वक्त खटिया का उपयोग करना चाहिए, ताकि सांप का खतरा कम हो। four children became orphans
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को ऐसे मामलों पर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। स्कूल, पंचायत और गांव स्तर पर लोगों को समझाया जाए कि झाड़फूंक से किसी की जान नहीं बच सकती। केवल समय पर अस्पताल पहुंचकर ही मरीज की जान बचाई जा सकती है। four children became orphans
बसकर गांव की यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए सीख है। अंधविश्वास में पड़कर कीमती जिंदगी गंवाना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका यह बड़ा उदाहरण है। विशेषज्ञों ने अपील की है कि अगर कभी भी किसी को सांप काट ले तो तुरंत अस्पताल ले जाएं और डॉक्टर की सलाह लें। समय ही सबसे बड़ी दवा है।