जगदलपुर। बस्तर की अनोखी पहचान और सदियों पुरानी परंपरा बस्तर दशहरा को लेकर इस बार भी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। जिला कार्यालय के प्रेरणा कक्ष में हुई बस्तर दशहरा समिति की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक की अध्यक्षता सांसद एवं समिति अध्यक्ष महेश कश्यप ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि “बस्तर दशहरा हमारी संस्कृति और परंपरा की धरोहर है। इसे जीवित और संरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है।”
बलराम मांझी बने समिति के उपाध्यक्ष
बैठक में नए उपाध्यक्ष का चयन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से बलराम मांझी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई। नवनियुक्त उपाध्यक्ष को बधाई देते हुए सांसद महेश कश्यप ने कहा कि “बस्तर दशहरा सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है। यहां हर समाज अपनी परंपरागत भूमिका निभाता है और मिलकर इस अद्भुत उत्सव को जीवंत बनाता है।”
संस्कृति और पर्यटन से जुड़ी बड़ी पहल
सांसद कश्यप ने कहा कि दशहरा पर्व से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर संरक्षित किया जाएगा। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि राज्य सरकार के बजट के अलावा राष्ट्रीय कंपनियों से भी सहयोग लेकर बस्तर दशहरा 2025 के आयोजन को और भव्य बनाया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि बस्तर अब वैश्विक पहचान बना रहा है। यूनेस्को जैसी संस्थाओं से पर्यटन स्थलों को पुरस्कार मिल रहे हैं। ऐसे में दशहरा पर्व देखने आने वाले पर्यटक यहां की परंपरा के साथ-साथ बस्तर पर्यटन स्थलों का भी आनंद लेंगे।
देवी-देवताओं के आगमन की तैयारी
इस बार दशहरा पर्व में संभाग के सातों जिलों से देवी-देवताओं के आगमन को लेकर विशेष चर्चा की गई। इसके लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के साथ मिलकर व्यवस्था की जाएगी।
परंपरा निभाने वालों की भर्ती और सुविधा की मांग
बैठक में बस्तर राजपरिवार के माटी पुजारी कमलचंद भंजदेव ने कहा कि दशहरा में देवी-देवताओं और समाजों की भागीदारी इसका अनूठा स्वरूप है। उन्होंने मांग की कि मांझी, चालकी और सेवादारों की रिक्त पदों पर भर्ती की जाए और देवी-देवताओं के लिए ठहरने की उचित व्यवस्था हो।
महापौर और कलेक्टर की बात
बैठक में महापौर संजय पांडेय ने कहा कि बस्तर दशहरा हमारी सांस्कृतिक विरासत है और इसे देखने देश-दुनिया से लोग आते हैं। जगदलपुर प्रशासन की पूरी कोशिश है कि आने वाले पर्यटकों का स्वागत “अतिथि देवो भव:” की भावना से किया जाए।
कलेक्टर हरिस एस ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस बार भी पर्व को भव्य रूप से मनाने की तैयारी की जा रही है। साथ ही उन्होंने 2024 और 2025 के बजट आवंटन की जानकारी भी साझा की।
पौधरोपण से जुड़ी अनोखी पहल
बैठक के बाद समिति सदस्यों और मांझी-चालकी द्वारा नकटी सेमरा स्थित दशहरा वन स्थल पर पौधरोपण किया गया। खास बात यह रही कि इन पौधों को बस्तर के देवी-देवताओं के नाम समर्पित किया गया।
यह पहल इसलिए भी खास है क्योंकि हर साल रथ निर्माण के लिए करीब 200 पेड़ काटे जाते हैं। इसलिए उनकी प्रतिपूर्ति के लिए इस बार साजा, साल, महुआ, आम, नीम, आंवला, बांस, जामुन, कुसुम, सागौन सहित कई पवित्र और सामाजिक महत्व वाले पौधे लगाए गए। यह परंपरा आने वाले समय में बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर और पर्यावरण संरक्षण दोनों को सहेजेगी।