जितेंद्र साहू धमतरी। student suicide case जिले के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय पथर्रीडीह में कक्षा 12वीं के छात्र की फांसी लगाकर आत्महत्या की घटना ने पूरे आदिवासी समाज को गहराई से झकझोर दिया है। इस दर्दनाक घटना के विरोध में मंगलवार को सर्व आदिवासी समाज, जिला धमतरी ने कुकरेल चौक (स्टेट हाइवे) पर चक्काजाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। समाज के सैकड़ों लोगों ने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए न्याय की मांग उठाई।
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चक्काजाम के दौरान समाज के पदाधिकारी, महिला प्रभाग, युवा प्रभाग और आम नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने मृत छात्र को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा और शासन-प्रशासन से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। student suicide case
आदिवासी समाज का आक्रोश फूटा
सर्व आदिवासी समाज के जिलाध्यक्ष जीवराखन मरई ने कहा कि –
“इससे पहले भी विद्यालय में छात्रों के साथ प्रताड़ना की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जांच समिति बनने के बावजूद किसी पर कार्रवाई नहीं हुई। अब छात्र की आत्महत्या की घटना यह साबित करती है कि विद्यालय प्रबंधन बच्चों पर मानसिक दबाव डाल रहा है। बाहरी लोगों की नियुक्ति से यह स्थिति और बिगड़ी है। आदिवासी विद्यालयों में नियुक्तियां स्थानीय आदिवासी वर्ग से ही होना चाहिए, लेकिन इस नियम की अनदेखी लगातार की जा रही है।”
वहीं सर्व आदिवासी समाज के तहसील अध्यक्ष जयपाल ठाकुर ने कहा –
“एकलव्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे आदिवासी समाज के हैं, जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की है। अगर सरकार और विभाग जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे तो समाज चुप नहीं बैठेगा।” student suicide case
प्रमुख मांगें सामने आईं
प्रदर्शन के दौरान समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि 15 दिनों के भीतर जांच शुरू नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो समाज बड़ा आंदोलन करेगा। student suicide case
मुख्य मांगें इस प्रकार रहीं —
- इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय मजिस्ट्रियल जांच कराई जाए।
- विद्यालय के प्राचार्य, वार्डन और संबंधित शिक्षकों को तत्काल निलंबित किया जाए।
- मृत छात्र के परिवार को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता दी जाए और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
- छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्थायी निगरानी समिति गठित की जाए।
- एकलव्य विद्यालयों में स्थानीय आदिवासी युवाओं को नियुक्ति में प्राथमिकता दी जाए।
न्याय न मिलने पर आंदोलन की चेतावनी
आदिवासी समाज ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर 15 दिनों में कार्रवाई नहीं हुई तो पूरे जिले में चक्काजाम और धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। समाज ने कहा कि शिक्षा के नाम पर बच्चों के साथ अत्याचार अब और बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। आने वाले दिनों में यह आंदोलन प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा। student suicide case
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सैकड़ों लोग हुए शामिल
आंदोलन में समाज के प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। इनमें जीवराखन मरई, जयपाल सिंह ठाकुर, महेश रावटे, विमल नेताम, गजानंद मरकाम, अश्वनी ठाकुर, कृष्णा ठाकुर, सुर्या नेताम, कमलनारायण ध्रुव, ओंकार नेताम, सजल नाग, विनोद मरकाम, राजकुमार मंडावी, नरेश मरकाम, सखाराम नेताम, संतुराम ओटी, श्रवण नेताम, नीलू छैदेया, चन्द्रकला नेताम, भूमिका कोर्राम, दीपिका ध्रुव, और प्रेमलता नेताम सहित सैकड़ों समाजजन उपस्थित रहे। student suicide case
इस घटना ने जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि पहले से शिकायतों पर कार्रवाई की गई होती, तो शायद यह हादसा टल सकता था। समाज अब इस मुद्दे पर एकजुट होकर न्याय के लिए संघर्ष करने के मूड में है। student suicide case
एकलव्य विद्यालय प्रकरण अब सिर्फ एक हादसा नहीं बल्कि आदिवासी समाज के आत्मसम्मान से जुड़ा मुद्दा बन गया है। समाज ने साफ कर दिया है कि वह अब चुप नहीं बैठेगा और जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।