मथुरा। Vrindavan Samuhik Vivah भगवान श्रीकृष्ण की पावन नगरी वृंदावन ने मंगलवार को एक बार फिर मानवता, प्रेम और सामाजिक एकता की मिसाल पेश की। यहाँ 132 जोड़े एक साथ शादी के पवित्र बंधन में बंधे। यह भव्य सामूहिक विवाह समारोह संत बाबा बलराम दास के सानिध्य में आयोजित किया गया, जिसमें संत समाज, सामाजिक संस्थाओं और सैकड़ों भक्तों ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया।
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इस अवसर पर संत बाबा बलराम दास ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और दो संस्कृतियों का मिलन होता है। उन्होंने सभी नवदंपतियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे सच्चाई, ईमानदारी और संस्कारों के मार्ग पर चलते हुए अपना जीवन खुशहाल बनाएं। Vrindavan Samuhik Vivah
समारोह में विशेष अतिथि के रूप में भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री रघुराज सिंह मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि संत बाबा बलराम दास जैसे संत समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं, जो समाज को जोड़ने और गरीब परिवारों को संबल देने का कार्य कर रहे हैं। मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार भी ‘मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना’ के तहत अब तक 4 लाख 65 हजार कन्याओं का विवाह करा चुकी है, जिससे कई गरीब परिवारों का बोझ हल्का हुआ है। Vrindavan Samuhik Vivah
उपहार और आशीर्वाद से सजे नवविवाहित जोड़े
कार्यक्रम में सभी 132 जोड़ों को उपहार स्वरूप अलमारी, सिलाई मशीन, डबल बैड, कपड़े और राशन सामग्री प्रदान की गई। यह उपहार सामाजिक संस्थाओं और आयोजन समिति की ओर से दिए गए ताकि नवविवाहित जोड़े अपने नए जीवन की शुरुआत आत्मनिर्भर तरीके से कर सकें। समारोह स्थल पर पारंपरिक गीत-संगीत और भजन की गूंज ने वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया।
संत बाबा बलराम दास ने वर-वधु को विवाह की महत्ता समझाते हुए कहा कि “जीवन का यह बंधन केवल एक दिन का नहीं, बल्कि पूरे जीवन की साझेदारी का प्रतीक है। दोनों को एक-दूसरे का सम्मान और सहयोग करते हुए जीवन की हर परिस्थिति का सामना मिलकर करना चाहिए।” Vrindavan Samuhik Vivah
समारोह में उमड़ा भक्तों और श्रद्धालुओं का जनसैलाब
वृंदावन के इस सामूहिक विवाह समारोह में दूर-दूर से श्रद्धालु और संत पहुंचे। कई समाजसेवी संस्थाओं ने भी आयोजन में सक्रिय भूमिका निभाई। विवाह की हर रस्म को वेद मंत्रों और परंपरागत विधि-विधान से संपन्न कराया गया। मंदिर परिसर में सुंदर सजावट, पुष्पों की महक और भक्ति संगीत के बीच यह आयोजन किसी उत्सव से कम नहीं था। Vrindavan Samuhik Vivah
भक्तों ने बताया कि बाबा बलराम दास द्वारा किया गया यह आयोजन हर वर्ष समाज के गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए नई उम्मीद लेकर आता है। उनका मानना है कि ऐसे कार्यक्रम न केवल सामाजिक एकता का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं, बल्कि समाज में सहयोग और मानवता की भावना को भी मजबूत करते हैं।
समाज सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण बना वृंदावन का आयोजन
भाजपा नेता रघुराज सिंह ने कहा कि “आज जब समाज में विवाह जैसे आयोजनों पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, वहीं वृंदावन का यह सामूहिक विवाह समाज को सादगी, सेवा और संस्कार की दिशा दिखाता है।” उन्होंने सभी जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि वे एक आदर्श दांपत्य जीवन जिएं और आने वाली पीढ़ियों को अच्छे संस्कार दें। Vrindavan Samuhik Vivah
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संत समाज के अन्य विद्वानों ने भी कहा कि ऐसे आयोजनों से धर्म, समाज और संस्कृति का समन्वय बनता है। वृंदावन की इस पवित्र भूमि से जो भी कार्य होता है, वह मानवता को जोड़ने वाला होता है। Vrindavan Samuhik Vivah
समारोह के अंत में बाबा बलराम दास ने सभी उपस्थित लोगों को धर्म और समाज सेवा की दिशा में प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “जब समाज एकजुट होकर जरूरतमंदों की मदद करता है, तभी सच्चे अर्थों में मानवता की स्थापना होती है।”
अंत में नवविवाहित जोड़ों ने बाबा बलराम दास का आशीर्वाद लेकर अपने नए जीवन की शुरुआत की। हर जोड़ा मुस्कान और उत्साह के साथ विवाह मंडप से निकला, मानो वृंदावन की इस पावन धरती पर साक्षात श्रीकृष्ण-राधा का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हो गया हो। Vrindavan Samuhik Vivah