सागर ब्यूरो रिपोर्ट, दैनिक हिस्ट्री — (Sagar suicide attempt) मध्य प्रदेश के सागर जिले में सोमवार को एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। कलेक्टर कार्यालय के गेट नंबर 2 के सामने एक पति-पत्नी ने अपने छोटे बच्चे के साथ आत्महत्या करने की कोशिश की। मामला कुछ ही मिनटों में तूल पकड़ गया, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों और प्रशासन की तत्परता ने एक बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
क्या है पूरा मामला
घटना सोमवार की है। बताया जा रहा है कि युवक अपनी पत्नी और छोटे बच्चे के साथ सागर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा था। तीनों ने सड़क किनारे खड़े होकर अचानक अपने ऊपर केरोसिन तेल डाल लिया। युवक खुद को आग लगाने की कोशिश करने ही वाला था कि तभी वहां से गुजर रहे लोगों ने उसे रोक लिया। (Sagar suicide attempt)
आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ ही देर में सागर शहर के तहसीलदार और नगर निगम की फायर ब्रिगेड टीम मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने युवक को काफी समझाने-बुझाने के बाद आत्मघाती कदम उठाने से रोका। (Sagar suicide attempt)
पत्नी से दुर्व्यवहार और झूठे केस का लगाया आरोप
युवक ने बताया कि वह सागर के मोतीनगर थाना क्षेत्र का रहने वाला है। उसके मुताबिक, थाने में पदस्थ एक सब-इंस्पेक्टर (SI) ने उसकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार किया था। जब उसने इसकी शिकायत 181 हेल्पलाइन पर की, तो पुलिस अधिकारी और ज्यादा परेशान करने लगे। युवक ने कहा कि उसके खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए और उसे बार-बार थाने बुलाकर धमकाया गया। (Sagar suicide attempt)
युवक ने बताया कि लगातार मानसिक तनाव झेलने के बाद उसने कलेक्टर कार्यालय के सामने आत्महत्या करने का फैसला लिया, ताकि उसकी बात प्रशासन तक पहुंचे।
लोगों की सतर्कता से बची तीन जिंदगियां
घटना स्थल पर मौजूद राहगीरों ने बताया कि परिवार अचानक सड़क किनारे रुक गया और कुछ देर तक आपस में बहस करने के बाद केरोसिन की बोतल निकाल ली। यह देखकर लोगों ने शोर मचाया और तुरंत दौड़कर उन्हें रोकने की कोशिश की। इसी दौरान एक व्यक्ति ने फायर ब्रिगेड को फोन कर दिया। (Sagar suicide attempt)
तहसीलदार मौके पर पहुंचे और उन्होंने परिवार से बात कर उन्हें शांत किया। बच्चे की मौजूदगी देखकर मौके पर मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। काफी समझाने के बाद दंपत्ति ने आत्महत्या का विचार त्याग दिया। (Sagar suicide attempt)
प्रशासन ने भेजा घर, होगी जांच
सूत्रों के मुताबिक, तहसीलदार और पुलिस टीम ने स्थिति को काबू में लाने के बाद दंपत्ति को घर भेज दिया। अधिकारी अब इस मामले की विस्तृत जांच करवाने की बात कह रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों ने कहा है कि मामले की सच्चाई की जांच की जाएगी और यदि किसी पुलिसकर्मी द्वारा गलत व्यवहार किया गया है, तो कार्रवाई निश्चित रूप से होगी।
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मानवता की मिसाल बनी जनता
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आम लोगों की सतर्कता कई बार जान बचा सकती है। अगर वहां मौजूद लोग समय रहते न रोकते, तो स्थिति बहुत भयावह हो सकती थी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों में पारदर्शी जांच हो, ताकि किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ अन्याय न हो और पुलिस विभाग में बैठे लोग अपनी जिम्मेदारी का सही उपयोग करें।
सागर में कलेक्टर ऑफिस के बाहर हुई यह घटना न केवल प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि आम जनता किस हद तक मजबूरी में ऐसे कदम उठाने को तैयार हो जाती है। पुलिस और प्रशासन के लिए यह समय है कि वे ऐसे संवेदनशील मामलों को गंभीरता से लें, ताकि भविष्य में कोई भी परिवार इस तरह की निराशाजनक स्थिति में न पहुंचे।