डिकेश शर्मा दुर्गूकोदल, 03 नवंबर। (Sarpanch Sangh protest) दुर्गूकोदल ब्लॉक में पंचायत प्रतिनिधियों का गुस्सा चरम पर है। ब्लॉक सरपंच संघ ने जनपद पंचायत में पदस्थ एसडीओ अश्वतकुमार मंडावी को तत्काल हटाने की मांग करते हुए सोमवार को तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। सरपंचों ने आरोप लगाया कि एसडीओ लगातार अपने कर्तव्यों में लापरवाही बरत रहे हैं, दफ्तर से लंबे समय तक अनुपस्थित रहते हैं और जनप्रतिनिधियों के साथ अभद्र व्यवहार करते हैं।
सरपंच संघ के अध्यक्ष श्रीमती शकुंतला नरेटी, उपाध्यक्ष बलराम टेमरिया और राम गावड़े, तथा सचिव मुकेश कुमार गावड़े ने बताया कि एसडीओ की निष्क्रियता से विकासखंड के कई महत्वपूर्ण कार्य अटक गए हैं। उन्होंने कहा कि फाइलों का सत्यापन समय पर नहीं होता, फोन कॉल रिसीव नहीं किए जाते, जिससे पंचायतों के भुगतान प्रस्ताव, टीएस स्वीकृतियाँ और विकास योजनाएँ ठप पड़ी हैं।
अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए सरपंच संघ ने कहा कि यह स्थिति ग्रामीण विकास की दिशा में बड़ी रुकावट बन गई है। उन्होंने बताया कि पंचायतें गांव के विकास की रीढ़ हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर सहयोग न मिलने से जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं। (Sarpanch Sangh protest)
सरपंच संघ ने यह भी कहा कि एसडीओ का व्यवहार जनप्रतिनिधियों के प्रति अपमानजनक और अनादरपूर्ण है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के खिलाफ है। संघ ने प्रशासन को चार दिनों का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी कि अगर तय समय में कार्रवाई नहीं की गई, तो सभी सरपंच आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से कुबेर दर्रो, मुकेश नरेटी, रामशिला कोयला, साधना सहारे, अनुपा कोवाची, मनीषा मंडावी, नीलिमा मरकाम, सोमनाथ नेताम, प्रेम पुडो, धनसाय हुरा, रमूला नरेटी (जनपद सदस्य एवं सभापति वन), मनकुंवर बोगा, मानिक कडियाम, जवाहर ठाकुर सहित अन्य कई सरपंच मौजूद रहे। (Sarpanch Sangh protest)
तहसीलदार ने सरपंच संघ का ज्ञापन प्राप्त कर आश्वासन दिया कि मामला उच्च अधिकारियों तक भेजा जाएगा और उचित कार्रवाई के लिए संज्ञान लिया जाएगा। (Sarpanch Sangh protest)
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक एसडीओ के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाया जाता, तब तक वे विकास कार्यों पर बैठकर चर्चा नहीं करेंगे। सरपंचों ने कहा कि गांवों के हित में समय पर निर्णय जरूरी हैं, और किसी भी अधिकारी का गैर-जिम्मेदार रवैया बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। (Sarpanch Sangh protest)
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स्थानीय लोगों का भी कहना है कि पंचायतों में रुके हुए कार्यों से ग्रामीण परेशान हैं। कई गांवों में पेयजल, सड़क और आवास योजनाओं के भुगतान लटके हुए हैं। ऐसे में यदि प्रशासन जल्द स्थिति नहीं संभालता, तो ग्रामीण भी सरपंच संघ के आंदोलन का समर्थन करेंगे। (Sarpanch Sangh protest)
सरपंच संघ की यह कार्रवाई स्थानीय प्रशासन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि यदि जमीनी स्तर पर अफसर जवाबदेही नहीं निभाएंगे, तो जनप्रतिनिधि अब चुप नहीं बैठेंगे। चार दिनों के भीतर सरकार इस मामले पर क्या रुख अपनाती है, यह देखना दिलचस्प होगा।