डिकेश्वर शर्मा दुर्गूकोंदल। wild animal attack दुर्गूकोंदल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गोटुलमुंडा और उसके आसपास के गांवों में इन दिनों एक अज्ञात जंगली जानवर का आतंक फैला हुआ है। बीते एक महीने से यह रहस्यमयी जानवर रात के समय गांवों में घुसकर पालतू जानवरों को अपना शिकार बना रहा है। इन घटनाओं ने ग्रामीणों को इतना भयभीत कर दिया है कि लोग अब रात के समय घरों से बाहर निकलने से भी डरने लगे हैं।
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ग्रामीणों का कहना है कि यह जानवर या तो तेंदुआ हो सकता है या फिर चीतल जैसे किसी हिंसक प्रजाति का शिकारी जानवर, लेकिन अब तक इसकी स्पष्ट पहचान नहीं हो पाई है। वन विभाग की टीम भी इसकी मौजूदगी का सुराग नहीं लगा पाई है, जिससे ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है। wild animal attack
एक महीने में कई जानवर बने शिकार
गोटुलमुंडा गांव में इसी महीने दो बछड़ों पर इस जानवर ने हमला किया। इनमें से एक बछड़ा तो घर के अंदर कोठा में बंधा हुआ था, जिसे शिकारी जानवर ने वहीं मार डाला। दूसरा बछड़ा खेत के पास चर रहा था, जिसे यह जानवर घसीटकर ले गया और उसकी जांघ का हिस्सा खा गया। wild animal attack
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यही नहीं, पास के अमागुहान (दमकसा) इलाके से एक कुत्ते को भी उठा ले जाने की खबर सामने आई है। इसके बाद गोटुलमुंडा स्थित ABIS कंपनी के पास आधी रात को गायों के झुंड पर भी इस जानवर ने हमला किया, जिससे पूरा इलाका दहशत में आ गया। गायों के झुंड को खदेड़ते हुए यह जानवर खेतों की ओर भाग गया। wild animal attack
उसी रात तराईघोटिया गांव में भी गायों और बैलों के झुंड पर हमला करने की घटना घटी। कुछ दिन पहले तराईघोटिया में ही एक बछड़े को यह जानवर अपना शिकार बना चुका है। लगातार इन घटनाओं के बाद से ग्रामीणों के बीच डर और गुस्सा दोनों ही बढ़ गए हैं। wild animal attack
“हर रात सुनाई देती है दहाड़ जैसी आवाज़” — ग्रामीण
गांव के लोगों का कहना है कि देर रात अक्सर किसी जानवर की दहाड़ जैसी आवाजें सुनाई देती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक, जानवर बेहद चालाकी से चलता है और शिकार करने के बाद अंधेरे में गायब हो जाता है। कई बार ग्रामीणों ने इसकी झलक देखी है, लेकिन अंधेरे की वजह से सही पहचान नहीं कर पाए। wild animal attack
गोटुलमुंडा निवासी लच्छू मरकाम ने बताया,
“बीते दिनों हमारे गांव में बंधे बछड़े को किसी जंगली जानवर ने मार डाला। रात के वक्त हम लोगों ने कुछ आवाजें सुनी थीं, लेकिन बाहर निकलने की हिम्मत नहीं हुई।”
इसी तरह, अमागुहान के एक ग्रामीण धनसिंह नेताम ने कहा,
“यह जानवर रात में झुंड के जानवरों पर हमला करता है, और खेतों में खदेड़ देता है। हम सब अब बच्चों और मवेशियों को लेकर बेहद चिंतित हैं।”
वन विभाग से की कार्रवाई की मांग
लगातार हो रही घटनाओं से परेशान ग्रामीणों ने वन विभाग से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर जल्द ही इस जानवर को पकड़ा नहीं गया, तो यह किसी बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है। wild animal attack
ग्रामीण चाहते हैं कि विभाग गांवों में कैमरा ट्रैप लगाए, ताकि जानवर की सही पहचान हो सके। साथ ही पगमार्क, पंजों के निशान और शिकार की जगहों की जांच कर यह पता लगाया जाए कि यह कौन-सा जानवर है। wild animal attack
दुर्गूकोंदल के वन रेंजर ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है और टीम को जांच के लिए भेजा गया है।
“हम इलाके में निगरानी बढ़ा रहे हैं। पगमार्क के सैंपल लिए जाएंगे और कैमरा ट्रैप भी लगाए जाएंगे। ग्रामीणों से अपील है कि वे रात में अकेले खेतों की ओर न जाएं,” – वन विभाग अधिकारी।
बढ़ती दहशत, घटती नींद
गोटुलमुंडा, अमागुहान, तराईघोटिया और आसपास के कई गांवों में अब रात का सन्नाटा डर में बदल गया है। बच्चे घर से बाहर खेलने नहीं जा रहे, और मवेशियों को खुले में छोड़ने से लोग कतरा रहे हैं। ग्रामीण चौकसी बढ़ा चुके हैं और गांव के कुछ युवाओं ने रात में निगरानी के लिए समूह भी बना लिया है। wild animal attack
सभी गांववाले चाहते हैं कि जल्द से जल्द वन विभाग इस रहस्यमयी शिकारी की पहचान करे और उसे पकड़ने के उपाय करे, ताकि गांवों में फिर से शांति का माहौल लौट सके। wild animal attack
गोटुलमुंडा और आसपास के गांवों में अज्ञात जंगली जानवर की दहशत से ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। अब पूरा इलाका इस बात की प्रतीक्षा में है कि वन विभाग जल्द ही उस रहस्यमयी शिकारी को पकड़कर इस डर के माहौल को खत्म करे।