जितेंद्र साहू धमतरी छत्तीसगढ़ Odisha smugglers गरियाबंद जिले के देवभोग ब्लॉक से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आई है। यहां पुलिस ने वन्यजीव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। ओडिशा से आई एक कार को रोकने पर उसमें से 9 किलो वजनी जिंदा सालखपरी (पैंगोलिन) बरामद हुई। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
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खुटगांव चेकपोस्ट पर पकड़ी गई ओडिशा की कार
देवभोग थाना क्षेत्र के खुटगांव चेकपोस्ट पर पुलिस ने सोमवार को रूटीन चेकिंग के दौरान सफेद रंग की मारुति K10 कार को रोका। जब कार की डिक्की खोली गई, तो पुलिस भी दंग रह गई—क्योंकि बोरी में एक जिंदा सालखपरी छिपाई गई थी। जीव का वजन करीब 9 किलो बताया जा रहा है। Odisha smugglers
थाना प्रभारी ने बताया कि इस कार में तीन लोग सवार थे। पूछताछ में पता चला कि इनमें से दो ओडिशा के रहने वाले हैं और एक आरोपी देवभोग का स्थानीय सहयोगी है। तीनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। Odisha smugglers
छाल और बाइक भी बरामद, कीमत लाखों में
पुलिस ने तलाशी के दौरान आरोपियों से एक बाइक और लगभग 6 किलो सालखपरी की छाल भी जब्त की है। अधिकारियों के मुताबिक, जब्त की गई जीव और उसके अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 11 लाख 70 हजार रुपए है।
सूत्रों का कहना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और वन्यजीवों के अंगों को ओडिशा के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की कोशिश कर रहा था। Odisha smugglers
थाना प्रभारी का बयान
देवभोग थाना प्रभारी ने बताया –
“हमें गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ संदिग्ध तस्कर ओडिशा से देवभोग की ओर आ रहे हैं। इस पर पुलिस टीम गठित की गई और चेकिंग बढ़ाई गई। जांच के दौरान कार से जिंदा सालखपरी और छाल बरामद हुई। तीनों आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 39 और 51 के तहत कार्रवाई की गई है।” Odisha smugglers
क्या होती है सालखपरी (Pangolin)?
सालखपरी यानी पैंगोलिन दुनिया के सबसे ज्यादा तस्करी किए जाने वाले जीवों में से एक है। यह जीव पूरी तरह से संरक्षित श्रेणी (Schedule-I) में शामिल है। इसकी खाल और शल्क (Scales) की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी मांग होती है, जिनसे दवाइयां और अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। Odisha smugglers
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भारत में पैंगोलिन का शिकार या व्यापार कानूनन गंभीर अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
पुलिस अब बड़े नेटवर्क की जांच में जुटी
देवभोग पुलिस की सतर्कता से यह बड़ी तस्करी रोक ली गई है। अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि जिंदा सालखपरी और उसकी छाल कहां भेजी जानी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं। पुलिस को शक है कि इसके पीछे एक अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह सक्रिय हो सकता है। Odisha smugglers
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ओडिशा सीमा से लगे इलाकों में बीते कुछ महीनों से वन्यजीव अंगों की तस्करी बढ़ी है। जंगलों से पैंगोलिन और अन्य दुर्लभ जीवों को पकड़कर तस्कर शहरों के रास्ते सीमाओं के पार भेजने की कोशिश कर रहे हैं। Odisha smugglers
देवभोग पुलिस की चौकसी बनी मिसाल
देवभोग पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने वन्यजीव अपराधों पर कड़ा संदेश दिया है। जिंदा सालखपरी की बरामदगी न सिर्फ एक दुर्लभ प्राणी को बचाने का मामला है, बल्कि यह उन नेटवर्क्स के खिलाफ बड़ा झटका है जो जंगलों को अपनी कमाई का ज़रिया बना रहे हैं। Odisha smugglers
पुलिस विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि यदि किसी को वन्यजीवों की तस्करी या शिकार से जुड़ी जानकारी मिले तो तुरंत पुलिस या वन विभाग को सूचित करें। ऐसी सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। Odisha smugglers
देवभोग पुलिस की इस कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि सतर्कता और जिम्मेदारी से की गई जांच न सिर्फ अपराध रोक सकती है बल्कि प्रकृति की रक्षा भी कर सकती है। जिंदा सालखपरी की बरामदगी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर वन्यजीव तस्करी का जाल जंगलों से शहरों तक कितना फैला है? Odisha smugglers
अब देखना यह होगा कि जांच में और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं और क्या इस नेटवर्क का असली सरगना पुलिस की पकड़ में आता है या नहीं। Odisha smugglers